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भास्कर एक्सक्लूसिव:घबराइए नहीं... कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने के लिए हम तैयार, 100 बेड का वार्ड और 12 बेड की आईसीयू भी उपलब्ध

बूंदी9 दिन पहले
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  • जिले में 0-18 आयु वाले 5 लाख से अधिक हैं बच्चे, ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं

बीरू शर्मा | कोरोना की दूसरी लहर में कई तरह की परेशानियों से जूझ चुके चिकित्सा विभाग ने तीसरी लहर से मुकाबला करने की पूरी तैयारी कर ली है। कोरोना की तीसरी लहर के सितंबर माह में सक्रिय होने की संभावना है। तीसरी लहर का खतरा सबसे ज्यादा 0 से 18 साल के बच्चों में है। जिले में 5 लाख से अधिक बच्चे 0 से 18 साल के हैं। ऐसा नहीं है कि कोरोना की दूसरी लहर में बच्चे संक्रमित नहीं हुए। परिजनों के साथ बच्चों में भी कोरोना का संक्रमण मिला है।

डॉक्टरों की राय के अनुसार दूसरी लहर में करीब 10 से 15% बच्चे भी कोरोना से संक्रमित हुए, लेकिन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होने से वे जल्दी ठीक हो गए।पिछले दिनों डूंगरपुर, दौसा, झालावाड़ में बच्चों में कोरोना संक्रमण मिलने के बाद प्रशासन ने कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। बच्चों के लिए अभी कोई वैक्सीन तैयार नहीं हुई है। ऐसे में जिन दवाओं से बड़ों को ठीक किया गया, उन्हीं से ही बच्चों को भी ठीक किया जाएगा। बच्चों के लिए वैक्सीन तैयार की जा रही है, लेकिन उसे अभी आने में समय लगेगा। जिले में शिशु रोग विशेषज्ञों की कमी है, लेकिन जो हैं, उनका मनोबल काफी ऊंचा है।

जिला अस्पताल में बच्चों के लिए 100 बेड आरक्षित किए गए हैं। इनमें एमसीएच विंग के फर्स्ट फ्लोर पर 70 बेड और सामान्य अस्पताल में 30 बेड के वार्ड आरक्षित हैं। इसके अलावा 12 बेड की आईसीयू तैयार की गई है। सभी सीएचसी व पीएचसी में भी पूरी तैयारी की हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों का सीएचसी व पीएचसी में ही उपचार होगा। क्रिटिकल स्थिति होने पर उन्हें उपचार के लिए बूंदी अस्पताल भेजा जा सकेगा। प्रशासन ने शिशु रोग विशेषज्ञों को आश्वस्त किया है कि ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। सीएससी व पीएचसी में ऑक्सीजन कन्संट्रेटर रखवाए गए हैं। इसके अलावा सिलेंडरों की भी व्यवस्था की हुई है।

संभावित खतरे को लेकर लगातार चल रही है ऑनलाइन ट्रेनिंग व जूम मीटिंग कोरोना की तीसरी लहर के संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा शिशु रोग विशेषज्ञों को लगातार ऑनलाइन ट्रेनिंग व जूम मीटिंग के जरिए जानकारियां दी जा रही हैं, उन्हें बताया जा रहा है कि किस तरह से बच्चों को उनके वजन व आयु के हिसाब से दवाएं दी जाएंगी।बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखेंगेतीसरी लहर के सितंबर में सक्रिय होने की संभावना है। खतरा तो है, लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है। माता-पिता बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। आवश्यकता पड़ने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।

कोरोना की दूसरी लहर में भी बच्चे इन्फेक्टेड हुए थे, सभी को स्वस्थ किया गया। आगे भी किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी।- डॉ. गोविंद गुप्ता, शिशु रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पतालसभी पीएचसी व सीएससी में उपचार की व्यवस्था है। ऑक्सीजन कन्संट्रेटर रखवा दिए गए हैं। चिकित्सकों से लगातार संपर्क बनाया हुआ है। इसके अलावा आईसीडीएस विभाग 4 डी वाले बच्चों का सर्वे कर रहा है। कुपोषित व कम वजन वाले बच्चों के लिए स्पेशल पैकेट एनजीओ के माध्यम से तैयार करवाने की कोशिश की जा रही है।- डॉ. महेंद्र त्रिपाठी, सीएमएचओ, बूंदी

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