पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

मत भूलें, हम इंसान हैं:इंसानियत पर कमाई हावी; पिता के शव को गांव पहुंचाने के लिए 4 घंटे गिड़गिड़ाता रहा, एंबुलेंस चालक नहीं पसीजे

बूंदीएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
पिता के शव को लेकर पांच घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करता रहा बेटा। - Dainik Bhaskar
पिता के शव को लेकर पांच घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करता रहा बेटा।
  • बूंदी से देई जाने के किसी एंबुलेंस चालक ने मांगे 7 हजार तो किसी ने मांगे 5 हजार

अपनी आंखों में आंसू लेकर एक बेबस बेटा जिला अस्पताल के बाहर खुले मैदान में अपने पिता की देह काे गांव पहुंचाने की 4 घंटे तक एंबुलेंस चालकों से गुहार लगाता रहा। किसी चालक ने उससे 7 हजार रुपए मांगे तो किसी ने 5 हजार रुपए मांगे। वह अपने पिता के शव के साथ गिड़गिड़ाता रहा। मोबाइल डिस्चार्ज होने से वह अपने परिजनों को भी सूचित नहीं कर पाया। एक दिन पहले वह अपने बीमार पिता को गांव से 1500 रुपए में गाड़ी करके इलाज के लिए बूंदी लाया था।

अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती देई के पास डेलपुरा गांव निवासी नानका मीणा की बुधवार रात मृत्यु हुई तो बेटे लड्डू मीणा पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बेटे की बेबसी की सूचना पर कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा व सामाजिक कार्यकर्ता मनीष मीणा रात को अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कोविड-19 कलेक्ट्रेट कंट्रोल रूम जाकर शव को गांव भिजवाने का आग्रह किया।

कलेक्ट्रेट कंट्रोल रूम वालों ने सीएमएचओ कंट्रोल रूम और नगर परिषद के कंट्रोल रूम को निर्देश दिए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। वापस आकर शर्मा ने एंबुलेंस चालक से ढाई हजार रुपए में छोड़ने को कहा। ड्यूटी डॉ. रघुवीर मीणा ने भी मानवता की दुहाई दी तो चालक ने एक बार हां कर ली, लेकिन वह नजर चुराकर अस्पताल से एंबुलेंस लेकर भाग गया। रात को 1 बजे चर्मेश शर्मा व मनीष मीणा ने निजी वाहन मंगवाया। स्वयं आवागमन का खर्च उठाते हुए शव को गांव पहुंचाया।

जवान बेटे के शव के साथ परेशान हुए पिता

कोविड वार्ड में जयपुर निवासी सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर के 33 वर्षीय बेटे की मृत्यु हो गई। अपने बेटे के शव को जयपुर लेकर जाने के लिए वाहन की व्यवस्था के लिए उन्होंने कलेक्ट्रेट व नगर परिषद कंट्रोल रूम में भी सूचना दी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। एंबुलेंस चालक आदिल के सहयोग से बिजोलिया से एंबुलेंस मंगवाई और सुबह 4 बजे के बाद शव को जयपुर के लिए रवाना किया।

खबरें और भी हैं...