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बड़ी समस्या:पहले टोकन के लिए चक्कर काटे, टोकन मिला तो जून तक की डेट मिली, अब दिक्कत यह-गेहूं को कहां रखें, कैसे संभालें

बूंदीएक महीने पहले
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  • किसानों के लिए जी का जंजाल बना समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर उपज बेचना

समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसानों के सामने समस्याएं कम होने का नाम ही नहीं ले रही। पहले पटवारियों की हड़ताल के चलते गिरदावरी रिपोर्ट नहीं मिल रही थी। सरकार ने पिछले साल की गिरदावरी रिपोर्ट का विकल्प निकाला तो फिर ऑनलाइन टोकन नहीं मिल पाने के कारण किसान ई-मित्र सेंटरों पर चक्कर काटते रहे। कई दिनों तक चक्कर काटने के बाद मंगलवार दोपहर बाद जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन हुआ तो आधा घंटे में ही कूपन का कोटा पूरा हो गया। दोपहर दो बजे तक तो किसान ऑनलाइन ओटीपी जेनरेट नहीं होने से परेशान होते रहे, जब ओटीपी मिला तो महज आधा घंटे में ही टोकन का कोटा पूरा हो गया और बहुत से किसानों को मई और जून में गेहूं बेचने की तारीखें मिली हैं। यानी तब तक गेहूं की रखवाली घर या खलिहान में करो। हालत यह है कि किसान को तत्काल पैसों की जरूरत होती है। यह दिक्कत एफसीआई के खरीद केंद्रों पर आई है। सबसे ज्यादा गेहूं एफसीआई ही खरीदती है।जिले में एफसीआई का टारगेट करीब 1.96 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का है तो राजफेड 36,600 मीट्रिक टन और तिलम संघ का करीब 4000 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य है। जहां एफसीआई के जिले में 11 गेहूं खरीद केंद्र हैं, जिनमें कापरेन में मंगलवार से खरीद शुरू हुई, केपाटन में शनिवार से शुरू हो गई थी, वहीं बूंदी में बुधवार से खरीद शुरू हो जाएगी। बड़ा नयागांव और सीतापुरा में एक अप्रैल से खरीद केंद्र शुरू करने की बात है।^अब टोकन मिलने लगे हैं, कुछ केंद्रों पर गेहूं खरीद जारी है, कुछ एक अप्रैल से शुरू हो जाएंगे। ऊपर से निर्देश हैं कि राजफेड और तिलम संघ को बारदाना नहीं देना है।-माधुरी पांडे, प्रबंधक, एफसीआई^यह सही है क राजफेड के पास बारदाने की व्यवस्था नहीं हो पा रही। परिवहन ठेके के टेंडर भी अभी फाइनल नहीं हो पाए हैं। इस संबंध में कलेक्टर ने मीटिंग लेकर एफसीआई के अधिकारी को राजफेड को बारदाना देने को कहा है। राजफेड चना-सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद एक अप्रैल से शुरू कर देगा, पर गेहूं की खरीद शुरू करने में थोड़ा वक्त लगेगा।-मुकेशमोहन गर्ग, उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, बूंदी

राजफेड के पास नहीं बारदाना, टेंडर में भी दिक्कत, कैसे करें खरीद

समर्थन मूल्य पर खरीदनेवाली दूसरी बड़ी एजेंसी राजफेड से जुड़ी दिक्कतें भी कम नहीं। राजफेड के पास जिले में अपने 19 खरीद केंद्रों पर अभी बारदाने का बंदोबस्त ही नहीं हो पा रहा। राजफेड एफसीआई की तरफ बारदाने की आस लगाए बैठी है, पर एफसीआई के पास ऊपर से निर्देश आ चुके हैं कि राजफेड और तिलम संघ को बारदाना नहीं देना है। वहीं राजफेड के टेंडर को लेकर भी दिक्कत खड़ी हो गई है। रेट ज्यादा आने के कारण माल परिवहन के टेंडर फाइनल नहीं हो सके, अब स्टेट लेवल की कमेटी को यह फाइनल करना है। इससे लगता नहीं कि राजफेड के जिले में 19 खरीद केंद्रों पर एक अप्रैल से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद शुरू हो पाएगी। हालांकि उप रजिस्ट्रार सहकारी समिति मुकेश मोहन गर्ग भी मान रहे हैं कि बारदाने की बड़ी समस्या आ रही है। राजफेड एक अप्रैल से सरसों, चना की खरीद शुरू कर देगी, पर गेहूं खरीद में अभी वक्त और लगेगा। मंगलवार को हुई बैठक में बारदाने के पांच-पांच बंडल देने का फैसला हुआ, एक बंडल में 2500 कट्‌टे होते हैं।

तत्काल प्रबंध करे सरकार, वरना आंदोलन करना पड़ेगा : अभा किसान संघर्ष समन्वय समिति जिला संयोजक राजेंद्र जैन की सुनिए...किसानों को रोजाना करोड़ों रुपए का चूना लग रहा है। अभी तक सरकारी कांटे नहीं लगने से रोजाना राजस्थान की मंडियों में हजारों क्विंटल गेहूं की फसल एमएसपी से लगभग 250 से लेकर 300 रुपए प्रति क्विंटल कम भाव में बिक रहा है, जिससे प्रतिदिन प्रदेश के किसानों को करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। एक तरफ सरकार किसानों की आय दुगुनी करने की बात करती है। यहां तो ऐसा लग रहा है किसानों की आय खत्म हो रही है। पहले ही इस बार गेहूं की पैदावार पिछले साल के मुकाबले लगभग 3 क्विंटल प्रति बीघा कम हुई है, ऊपर से प्राकृतिक प्रकोप और बारिश से किसानों की फसल खराब हुई और अब सरकार अभी तक भी समर्थन मूल्य के कांटे न लगाकर जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर किया जा रहा है। क्या एमएसपी कागजों में ही रहेगी या किसानों को मिलेगी। सरकार जल्द सरकारी कांटे लगवा करके किसानों का पूरा माल ऑफलाइन एमएसपी पर खरीदने का प्रबंध करे, वरना मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।

जिलेभर के किसानों की पीड़ा

{गणपतपुरा काटूनारा के किसान मांगीलाल मीणा कई दिनों से एफसीआई की ऑनलाइन वेबसाइट बंद होने के कारण टोकन के लिए परेशान रहे। उनके मुताबिक पहले ई मित्र पर इसी वेबसाइट में बैंक खाता, मोबाइल नंबर व व्यक्तिगत पहचान अंकित की गई थी, रजिस्ट्रेशन हो गया था। बाद में बताया गया था कि इस रजिस्ट्रेशन के आधार पर ही टोकन नंबर जारी होंगे, लेकिन 15 दिन हो गए, अब तक टोकन जारी नहीं हो रहा।{गणेशपुरा के किसान धर्मराज मीणा के मुताबिक ओने-पौने दामों में गेहूं बेचने की नौबत आ रही है। आए दिन मौसम बिगड़ रहा था, ऐसे में जल्दबाजी में गेहूं की फसल कटवा ली। घर में रखने के लिए भी जगह नहीं है। अब रजिस्ट्रेशन के बाद टोकन जारी नहीं होने और जैसे-तैसे टोकन जारी होने लगे तो मई, जून में नंबर आ रहा है।{पूर्व सरपंच महावीर सीनम, रामेश्वर धाबाई का कहना है कि कि किसानों की खरीद की तारीख तो तय कर दी, लेकिन कोई तैयारियां नहीं की गई। कई किसान तो सूदखोरों के पैसे चुकाने के लिए ओने-पौने दामों पर फसल बेच रहे हैं। मंडी में 1700-1800 तक का भाव मिल रहा है, जबकि समर्थन मूल्य में 1900 रुपए से भी अधिक है। एक काश्तकार को 10 बीघा गेहूं की फसल में 10000 से ₹15000 रुपए का नुकसान हो रहा है।{कापरेन के किसान हेमंत पंचोली के मुताबिक 25-30 बीघा गेहूं की फसल घर में पड़ी है। 26 मार्च से गेहूं खरीद शुरू होनी थी, लेकिन 5 दिन बाद तक टोकन के लिए पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। एफसीआई की वेबसाइट 8 दिन से सर्वर चल नहीं चल पाने के कारण किसानों की भीड़ ईमित्रों की दुकानों पर लगी रही। हेमंत पंचोली कापरेन पालिका के वाइस चेयरमैन भी हैं।

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