जलसंकट / 15 मिनट ही पानी मिल रहा, 3 जगह प्रदर्शन, जलदाय दफ्तराें पर जड़े ताले, जेईएन को दिखाई चूड़ियां

Getting water for 15 minutes, demonstrations at 3 places, locks locked at water supply offices, bangles visible to JEN
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Getting water for 15 minutes, demonstrations at 3 places, locks locked at water supply offices, bangles visible to JEN

  • परेशान लोगों ने कहा- लॉकडाउन में कोई सुनवाई नहीं हो रही

दैनिक भास्कर

May 21, 2020, 05:00 AM IST

बूंदी. अनियमित जलापूर्ति के चलते शहर में पेयजल संकट के हालात बन गए हैं। कई हिस्सों में दो दिन में महज 15-20 मिनट ही पानी आ रहा है। पेयजल के बिगड़े हालात पर बुधवार को शहर में तीन-तीन प्रदर्शन हुए। परेशान लोगों ने कहा कि लॉकडाउन में सुनवाई नहीं होने से सड़क पर आना पड़ा। जलदाय विभाग कार्यालय में कोई सक्षम अधिकारी नहीं मिला तो पार्षदों ने एक्सईएन कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। डेढ़ घंटे तक धरने पर बैठ रहे। पुलिस ने आकर लॉकडाउन के नियमों का हवाला देकर उन्हें जाने का कहा। पुलिस के रवैये से पार्षद नाराज हो गए। पार्षदों का कहना था कि वार्डों में पानी नहीं आ रहा है। वार्डवासी हमें परेशानी बताते हैं। अधिकारी सुनते नहीं है। यहां नहीं आए तो कहां जाएं। एसआई अशोक शर्मा ने जेईएन को बुलाया। जेईएन ने उन्हें समझाना चाहा, लेकिन पार्षद संतुष्ट नहीं हुए और उन्हें चूडियां दिखाने लगे। बाद में पार्षद प्रेम जांगिड़, संजय पांडे, संजय भुटानी, मुरली दाधीच, गौरव वर्मा, हरिप्रसाद बैरवा, पार्षद पति अनिल चतुर्वेदी नगर परिषद कार्यालय पहुंचे। कार्यवाहक आयुक्त अरुणेश शर्मा को परेशानी बताई। उन्हाेंने आश्वस्त कर राेष शांत किया।
बैठक में नहीं आए अधिकारी
पेयजल संकट से निबटने के लिए सभापति महावीर मोदी ने बुधवार शाम को 4 बजे अभियंताओं के साथ बैठक प्रस्तावित की हुई थी। अभियंताओं का सभापति, पार्षद व अधिकारी इंतजार ही करते रह गए, लेकिन कोई नहीं आया। सभापति ने कहा कि अभियंताओं के मोबाइल पर कॉल करना चाहा, तो एईएन ने जाखमूंड होने की बात कही। एक जेईएन का मोबाइल स्विच ऑफ आया। नाराज सभापति ने इन्हें नोटिस जारी करते हुए गुरुवार शाम को दुबारा बैठक रखी है।
1. एईएन कार्यालय के कार्मिक बाहर निकाले

जलसंकट से त्रस्त वार्ड 17 के बाशिंदे पीजी कॉलेज के सामने एईएन कार्यालय पहुंचे, लेकिन एईएन नहीं मिलने पर नाराज महिलाओं-पुरुषों ने कार्यालय के अंदर बैठे कर्मचारियों को बाहर निकालकर ताला जड़ दिया। पार्षद रमेश हाड़ा व हरिओम सैनी के साथ आए क्षेत्रवासियाें की समस्या सुनने के लिए कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। मोबाइल पर बात की तो कोई रिस्पांस नहीं मिला। लोगों ने कर्मचारियों को बाहर निकलने के लिए कहा और कार्यालय पर ताला लगा दिया। बाद में पुलिस आई। समझाइश कर उन्हें रवाना किया।
2. लाइन डाल दी, पर कनेक्शन नहीं

वार्ड नंबर 21 लुहारकटला, अमरकटला के बाशिंदे जलसमस्या को लेकर जलदाय विभाग के कार्यालय पर पहुंचे। मुख्य गेट के सामने प्रदर्शन किया। क्षेत्रवासियाें का कहना था कि 2 माह से पानी की व्यवस्था बिगड़ी हुई है। 15-20 मिनट पानी आ रहा है। वह भी समय पर नहीं दिया जा रहा है। 24 से 48 घंटों में जलापूर्ति हो रही है। रमजान का पाक महीना चल रहा है। सुबह से ही पानी के लिए भटकना पड़ता है। पार्षद ने भी सुनवाई नहीं की। अमृत पेयजल योजना की लाइन भी यहां से गुजर रही है, लेकिन अभी तक भी उसमें कनेक्शन नहीं किए।
3. यहां के बाशिंदाें का भी सब्र टूटा

छत्रपुरा, वल्लभनगर, दीनबंधु कॉलोनी के बाशिंदाें ने पार्षद हरिओम सैनी, रमेश हाड़ा, पूर्व पार्षद शिवकरण मीणा के साथ देवपुरा जलदाय विभाग आकर कार्यालय पर ताला लगा दिया। विभाग के खिलाफ घंटेभर नारेबाजी की। पानी नहीं आने के कारण इंजीनियराें को कोसते रहे। कॉलोनी की चेतना शर्मा ने बताया कि दो-तीन दिन पहले जब हमने छत्रपुरा में रोड पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया था तो पुलिस-जलदाय कर्मियों ने हमें आश्वासन दिया था कि आपकी समस्या दूर हो जाएगी, परंतु कुछ नहीं हुआ। इंजीनियराें को भी अवगत करा चुके। आज कोई सक्षम अधिकारी नहीं मिल रहा। हमें प्रदर्शन करना पड़ रहा है। जाएं तो कहां जाएं, कहीं कोई सुनने वाला नहीं है। प्रदर्शन में भरत धाबाई, युगल सैनी, शंभु प्रजापत, मयंक सैनी, रेखा कुमावत, सीमा, बसंती शामिल रही।
इसलिए बिगड़ी व्यवस्था: जेईएन

जेईएन राजेंद्र सैनी ने कहा कि पहले जितना पानी मिल रहा था, उतना ही अभी मिल रहा है, जबकि गर्मी में पानी की खपत बढ़ जाती है। चंबल से शहर में 20 एमएलडी पानी आता है। चंबल का पानी कोटा-बूंदी के बीच आ रहे 19 गांवों व 12 ढाणियों को भी मिलना है। इसका काम पूरा हो चुका है। लाइन टेस्टिंग चल रही है। 3-4 एलएलडी पानी टेस्टिंग में जा रहा है। पहले शहर में 14 टंकियां थी, अब 6 नई टंकियां भी शुरू हो चुकी। इन्हें भी भरकर पानी सप्लाई किया जाता है। बिजली की सप्लाई से भी व्यवस्था बिगड़ती है।

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