रमजान / जुमातुल अलविदा की नमाज अदा की

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  • देश में खुशहाली, भाईचारा अमन, कोरोना से जल्दी छुटकारा पाने के लिए दुआ

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 07:04 AM IST

बूंदी. मस्जिदों में शुक्रवार को अकीदतमंदों ने जुमातुल अलविदा की नमाज अदा कर देश में खुशहाली, भाईचारा अमन, कोरोना से जल्दी छुटकारा पाने के लिए दुआ की। 
राजस्थान काजी कौंसिल संरक्षक पीरजादा अब्दुल शकूर क़ादरी ने बताया कि रोजा अल्लाह की इबादत का एक तरीका है। इस्लाम की बुनियादी तालीम में चौथा हिस्सा रोजा है। पहला कलमा, दूसरा नमाज, तीसरा ज़कात व चौथा रोजा 5वां हज रोजा एक इबादत है। इस महीने में खुदा ने इंसानों को सीधा रास्ता दिखाने के लिए अपनी आखिरी किताब कुरान पाक को नाजिल किया, जो दुनिया में रहकर दुनिया तक इंसान की हिदायत के लिए रोशनी की मीनार है। रमजान में एक महीने तक रोजेदार की एक तरह से ट्रेनिंग हो जाती है। वह सुबह से शाम तक खाना पीना और अपनी ख्वाहिशों से परहेज करता है। रोजेदार अपने हाथ, कान, आंख व कदमों से भी रोजा करता है। अर्थात हाथों से किसी पर जुल्म न करना, कानों से बुरी बातें नहीं सुनना, आंखों से किसी पर बुरी नजर नहीं डालना, जुबान से गाली गलौज नहीं करना, कदमों से बुरे मार्गो पर नहीं चलना है। 
वक्फ कमेटी के पूर्व सदर मौलाना असलम ने बताया कि जुमातुल अलविदा की नमाज के वक़्त लॉकडाउन का पूरा ध्यान रखा गया। चंद लोगों ने मस्जिदों में नमाज अदा की, बाकी लोगों ने घरों पर नमाज अदा की। फ़र्राशों के तकिये में शहर काजी मौलाना गुलाम गोस ने नमाज अदा करवाई-दुआ की गई। जामा मस्जिद में इमाम शाह आलम की पूर्व वक्फ कमेटी सदर मौलाना असलम ने दस्तारबंदी की।

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