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हे भगवान! 24 घंटे में 21 मौतें:मौत के बाद शवों को गांव ले जाने के लिए नहीं मिल रही एंबुलेंस, चालकों का अजीब बहाना-मैं अभी दूर हूं

बूंदीएक महीने पहले
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बूंदी. एंबुलेंस नहीं मिलने पर शव को कार में रखकर परिजनों को ले जाना पड़ा। - Dainik Bhaskar
बूंदी. एंबुलेंस नहीं मिलने पर शव को कार में रखकर परिजनों को ले जाना पड़ा।
  • जिला अस्पताल कैंपस के एंबुलेंस चालक भी फाेन अाने पर टालते रहे, गुरुवार को 128 पॉजिटिव

हे भगवान...! ये क्या हो रहा है? ऐसा लग रहा है मानो यहां संवेदनाएं बची ही नहीं हो। एक तो कोरोना की मार...उस पर किसी के परिजन की मौत हो जाए तो शव को उसके गांव तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं मिल पा रही। यहां तक कि एंबुलेंस के चालक भी अजीब-अजीब बहाने बना रहे। कारण चाहे भी जो भी रहे, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में न ऐसा माहौल, न ऐसी जवाबदेही, न ऐसी कार्यप्रणाली मानवीय दृष्टिकोण से सही है, बल्कि जिम्मेदारों की जिम्मेदारी पर सवालिया निशान भी लगा रही है।जिला अस्पताल में पिछले 24 घंटे में 21 जनों की माैत हो गई। इनमें 8 जनों ने कोरोना से दम तोड़ा, जबकि 13 जनों की जान आइसोलेशन में गई।

अस्पताल में पिछले 15 दिन में 163 मौतें हुई हैं। इनमें कोरोना से 47 व आइसोलेशन में 117 जनों की जान गई है। इस बीच अस्पताल में मौत के बाद शव ले जाने के लिए 2 से 3 घंटे तक परिजनों को इंतजार करना पड़ रहा है। भरता बावड़ी की 30 वर्षीया महिला की रात को इलाज के दौरान मौत हो गई।परिजन सुबह 5.30 बजे से मुख्य गेट के बाहर शव को लेकर बैठे रहे, लेकिन 8 बजे तक भी एंबुलेंस नहीं मिली। मृतका के पति ने बताया कि बुधवार को दोपहर को तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में लेकर आए, लेकिन डॉक्टरों ने ट्रीटमेंट देकर यह कहकर भेज दिया कि यहां ऑक्सीजन नहीं है। पत्नी ऑक्सीजन की कमी से तड़प रही थी, लेकिन भर्ती नहीं किया गया। मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल में ले गए, लेकिन वहां ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था। रात को फिर तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। प्राइवेट डॉक्टरों ने सरकारी अस्पताल में रैफर कर दिया। रात को यहां मौत हो गई।

हद है... नगर परिषद में अंतिम संस्कार के लिए 3 एंबुलेंस... चालक कहीं जाने को तैयार नहीं

शव को गांव ले जाने के लिए अस्पताल के आसपास चक्कर लगाते रहे। सुबह 8 बजे एंबुलेंस आने तक परिजन बिलखते रहे। यहां प्राइवेट एंबुलेंस के जो नंबर लिखे हुए हैं, उन्हाेंने फोन पर आने से साफ मना कर दिया। बाद में नगर परिषद की एंबुलेंस से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि पहले स्थानीय शव काे श्मशान छोड़कर आएंगे, फिर लेकर जाएंगे। दूसरे वैन चालक ने कहा कि मैं 11 तारीख तक छुट्टी पर हूं। तीसरे एंबुलेंस चालक ने फोन पर कहा कि मैं गांव हूं और चार-पांच घंटे बाद आऊंगा, जबकि नगर परिषद में 3 एंबुलेंस अंतिम संस्कार के लिए लगा रखी है। इसी तरह अस्तौली के एक बुजुर्ग की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजन एंबुलेंस के लिए अस्पताल परिसर में चक्कर लगाते रहे। बाद में कार से शव ले गए।

...इनकी ये अच्छी पहल

20 स्टूडेंट्स ने संभाला मोर्चाजिला अस्पताल में एएनएम फाइनल ईयर के 20 स्टूडेंट्स को नॉन कोविड ड्यूटी में लगाया गया है। मेडिकल टीमें घर-घर जाकर आमजन का ऑक्सीजन लेवल व थर्मल स्कैनर से जांच करेगी। टीम के पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घरों में जाकर खांसी-जुकाम-बुखार के रोगियों की जांच कर उन्हें दवा देगी। ऐसा चिकित्सा विभाग इसलिए कर रहा है कि संभावित कोरोना पॉजिटिव अपने घरों से बाहर नहीं निकलें। ये टीम ग्रामीणाें काे वैक्सीन लगवाने-बीमार लाेगाें काे कोविड टेस्ट करवाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजेगी।{विहिप ने 3 शवों का किया संस्कारजिला अस्पताल में दम तोड़ने वाले तीन जनों के शवों का विहिप कार्यकर्ताओं ने अंतिम संस्कार किया। जिला उपाध्यक्ष महेश जिंदल ने कहा कि नगर परिषद के कर्मचारियों से बात की तो उन्होंने कहा कि शवों को लाने की व्यवस्था नहीं है। आयुक्त ने फोन ही नहीं उठाया। जिंदल ने कहा कि मुक्तिधाम में कोरोना से मरने वालों का भी अंतिम संस्कार हो रहा है। मुक्तिधाम को राेज तीन बार सेनेटाइज करना चाहिए।

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