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विश्व थैलेसीमिया दिवस विशेष:हमारे रक्तदाता चाैकस, इसलिए थैलेसीमिक बच्चों को रक्त के लिए नहीं जाना पड़ा बाहर

बूंदीएक महीने पहले
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  • सरकारी रिकार्ड में हमारे यहां 35 से 40 बच्चे इस बीमारी से हंै पीड़ित, जिन्हें हर 15 दिन में चाहिए खून

कोरोनाकाल में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए राहत की बात यह रही कि उन्हें न तो रक्त की कमी के कारण जूझना पड़ा और न ही रक्त चढ़वाने के लिए उन्हें बूंदी से बाहर जाना पड़ा। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को हर 15 दिन में रक्त की आवश्यकता पड़ती है। इनके लिए ब्लड बैंक में सुविधा से रक्त मिलता रहा, जिससे ऐसे बच्चों और उनके परिजनों को परेशान नहीं होना पड़ा।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 40 बच्चे थैलेसीमिक बीमारी से पीड़ित सरकारी रिकाॅर्ड के अनुसार जिले में 35 से 40 बच्चे इस बीमारी से पीड़ित हैं। जब कभी किसी ब्लड ग्रुप की कमी आई तो ब्लड बैंक की ओर से जागरूक रक्तदाताओं से संपर्क कर तत्काल कमी को दूर किया।

इस संकटकाल में मरीजों को रक्त की कमी से नहीं जूझना पड़े, इसके लिए सरकार ने हाल ही में गाइडलाइन जारी की है, जिसके अंतर्गत सोशल डिस्टेंसिंग की पालना कर ब्लड डोनेशन कैंप लगाए जा सकते हैं। इनमें खासकर ब्लड बैंक में ही कैंप लगाने को प्राथमिकता दी जाएगी। विशेष बात यह कि 18 प्लस के युवा भी काेराेना से निजात की वैक्सीन लगवाने से पहले ब्लड डोनेट कर सकते हैं।

पीड़ित बच्चाें काे इसलिए बार-बार चाहिए खून शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जीएस कुशवाहा बताते हैं कि यह रोग बच्चों में जन्म से मौजूद रहता है। 3 माह की उम्र के बाद ही इसकी पहचान होती है। इससे बच्चे के शरीर में खून की भारी कमी होने लगती है। उसे बार-बार खून की जरूरत होती है।

खून की कमी से हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. गोविंद गुप्ता बताते हैं कि हीमोग्लोबिन में दो चेन होती है-अल्फा और बिटा। इनमें बनावट में गड़बड़ हो जाती है। हमारे शरीर में बोन मैरो खून बनाता है। थैलेसीमिया होने पर खून तो बनता है, लेकिन सामान्य खून नहीं बन पाता है। ऐसे में पीड़ित बच्चों को खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है।

हम करेंगे खून की जरूरत पूरी: डाॅ. कच्छावा

ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. ऋषि कच्छावा बताते हैं कि थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को रक्त चढ़ाने के लिए बाहर नहीं भेजा गया। यही उनकी पूर्ति हो गई है। ब्लड बैंक में अलग-अलग ग्रुप का 100 यूनिट का स्टाॅक है। सरकार की ओर से ब्लड डोनेशन को लेकर गाइडलाइन आई है। इसके लिए ब्लड डोनेशन कैंप लगाने वाली संस्थाओं को लेटर ईशु कर रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए ब्लड बैंक में ही शिविर लगाकर जरूरत पूरी की जाएगी।

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