कोरोना के चलते चौथ माता मेला निरस्त:मुख्य मार्गों पर पुलिस का पहरा, फिर भी पहाड़ी के दुर्गम रास्तों से पहुंच रहे सैकड़ों श्रद्धालु

बूंदी10 महीने पहले
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बूंदी के बाणगंगा रोड स्थित चौथ माता मंदिर में माता के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु। - Dainik Bhaskar
बूंदी के बाणगंगा रोड स्थित चौथ माता मंदिर में माता के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु।

प्रदेश में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़े धार्मिक आयोजनों और मेलों पर रोक लगाई हुई है। इसके चलते बूंदी के बाणगंगा रोड स्थित चौथ माता मंदिर में तिल चौथ के अवसर पर 20 से 22 जनवरी तक आयोजित होने वाले मेले पर भी रोक थी। चौथ माता मंदिर के आसपास करीब 8 थानों की पुलिस व 200 से अधिक पुलिस जवान बैरिकेड लगाकर व्यवस्था किए हुए थे। फिर भी सैकड़ों श्रद्धालु माता के दर्शन करने के लिए पहाड़ियों के रास्तों से मंदिर तक पहुंच गए। जवान भी दर्शनार्थियों को कोविड-19 की पालना के चलते मंदिर बंद होने की जानकारी देते हुए उन्हें वहां से हटाते हुए नजर आए। लेकिन श्रद्धालुओं की श्रद्धा के आगे पुलिस की एक नहीं चली, माता के जयकारों के आगे सब कुछ फीका पड़ गया।

20 से 25 किलोमीटर पैदल सफर कर पहुचे श्रद्धालु
कोरोना वायरस के चलते पूरे बूंदी जिले में सभी धार्मिक प्रतिष्ठान प्रशासन ने बंद करा रखे हैं। यहां पर कोई भी आयोजन नहीं हो रहा है। इस बीच कोरोना वायरस के इस दौर में भी लोग माता के दर्शन करने से नहीं चूक रहे हैं। हालांकि भगवान के पट बंद हैं, लेकिन आस्था इतनी अधिक है कि भक्तजन दूर से ही भगवान के धोक लगा रहे हैं और अपनी मनोकामना पूर्ण करने का आशीर्वाद मांग रहे हैं। शुक्रवार सवेरे बड़ी संख्या में महिला-पुरुष दर्शन करने माता के दरबार में पहुंचे। आम रास्ते की जगह महिलाएं चट्टानों में बने कठिन रास्तों से आते हुए दिखाई दिए। पुलिस तो आम रास्ते पर ही बैरिकेड लगाकर आने जाने वाले लोगों को रोक रही थी, लेकिन दर्शनार्थी पहाड़ियों के रास्तों से करीब 20 से 25 किलोमीटर का सफर तय कर नंगे पैर माता के दर्शन करने पहुंचे और दर्शन किए। माता का मंदिर चारों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इन पहाड़ियों के बीच आने-जाने के रास्ते हैं।

दर्शनार्थियों का प्रवेश एवं दर्शन पूर्णत बंद
जिला कलेक्टर रेनू जयपाल ने कोविड गाइडलाइंस का हवाला देते हुए निर्देश दिए थे कि कोविड-19 संक्रमण के चलते 20 से 22 जनवरी तक आयोजित होने वाला चौथ माता का मेले के आयोजन पर रोक रहेगी। किसी भी प्रकार की दुकान, चकरी झूले इत्यादि नही लगेंगे। इस अवधि में दर्शनार्थियों के लिए मन्दिर में प्रवेश, दर्शन पूर्णतः बंद रखने के आदेश थे। केवल मन्दिर प्रबन्धन समिति द्वारा ही पूजा, अर्चना की अनुमति थी। जिला कलेक्ट्रेट ने जिले सहित समीप के अन्य जिलों यथा कोटा, टोंक, बारां, सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा, झालावाड़ एवं अन्य जिलों, राज्यों के नागरिकों से अपील की थी कि मेले एवं दर्शन की अनुमति नहीं होने के कारण मन्दिर स्थल की ओर प्रस्थान नहीं करें, लेकिन रोक के बावजूद भी दर्शनार्थी मेले में पहुंचे।

पहाड़ी पर स्थित है चौथ माता का मंदिर
बूंदी शहर से 6 किलोमीटर दूर बाणगंगा रोड स्थित चोटी पर चौथ माता का मंदिर है। यह बहुत ही प्राचीन वास्तुकला का प्रतीक है। बता दें कि इस मंदिर की स्थापना बूंदी के राजा द्वारा की गई थी और विशाल मंदिर यहां बनवाया गया था। उसी के साथ ही जब भी कोई बड़ा पर्व होता है तो यहां पर श्रद्धालुओं का तांता देखने को मिलता है। जब करवा चौथ का दिन होता है तो चौथ माता के मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि करवा चौथ के दिन माता के दर्शन और पूजा करने से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। साथ ही दांपत्य जीवन में भी सुख बढ़ता है। कई साल पहले सवाई माधोपुर के चौथ का बरवाड़ा से चौथ माता का एक प्रतिरूप बूंदी के राजा लेकर आए थे। बाणगंगा की पहाड़ी पर माता का मंदिर बनवाकर बूंदी के शासकों ने कुल देवी माना था। तभी से ही कई चमत्कार चौथ माता के यहां पर देखे जा रहे हैं और हर साल माता का जब भी मेला लगता है तो हजारों की तादाद में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंच जाते हैं।