रामगढ़ अभयारण्य / टाइगर को रोकने के लिए पर्याप्त प्रेबेस; कुनबा बढ़ाने के लिए टाइग्रेस लाना जरूरी

307 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैली है रामगढ़ सेंचुरी, नए व पुराने पाथ दुरुस्त 307 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैली है रामगढ़ सेंचुरी, नए व पुराने पाथ दुरुस्त
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307 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैली है रामगढ़ सेंचुरी, नए व पुराने पाथ दुरुस्त307 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैली है रामगढ़ सेंचुरी, नए व पुराने पाथ दुरुस्त

  • टाइगर की वजह से ही 4000 करोड़ की इंडस्ट्री बन चुका है रणथंभौर, बूंदी में उससे कहीं ज्यादा रिच जंगल और बेहतर जगह

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 08:20 AM IST

बूंदी. रामगढ़ अभयारण्य में टाइगर के आने के बाद टाइग्रेस का जल्द छोड़ना जरूरी है। ऐसा नहीं होता है तो टाइगर कुछ दिन तफरीह कर लौट सकता है। सेंचुरी टाइगर्स से फिर से आबाद हो, इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि राज्य सरकार जल्द से जल्द जोड़ा बनाने के लिए यहां टाइग्रेस छोड़े, ताकि उनका कुनबा बढ़े। दो दशकों तक टाइगरहीन रहने के बाद अब अभयारण्य टाइगर के स्वागत के लिए तैयार है। इस बार टाइगर रामगढ़ सेंचुरी में आया है।

हालांकि अभी पहचान नहीं हो सकी। टाइगर को रोकने के लिए यहां पर्याप्त संख्या में प्रेबेस होने के साथ वन्यजीवों की जीवन रेखा मेज नदी है, जिसमें हमेशा पानी रहता है। वाइल्ड लाइफ के दृष्टिकोष से जिला काफी रिच है। बूंदी में 27 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र में आता है। वाइल्ड लाइफ जिले की अर्थव्यवस्था का तीसरा मजबूत पिलर बन सकती है। रणथंभौर बाघों की वजह से ही 4000 करोड़ की इंडस्ट्री बन चुका है, बूंदी में उससे कहीं ज्यादा रिच जंगल और बाघों के लिए ज्यादा बेहतर जगह है।

सेंचुरी में नया फुटान वाला जंगल है, जबकि रणथंभौर टाइगर रिजर्व का जंगल काफी पुराना है। शाकाहारी वन्यजीवों के लिए धोक का जंगल, फल-वनस्पति प्रचुर मात्रा में है, जिसमें खजूर, लसोड़े सहित अन्य फल आते हैं। जंगली सूअरों के लिए बंबू है। पहाड़ाें के अलावा खुला मैदानी भाग है। प्राकृतिक कंद्राएं टाइगर की आश्रय रही है। आंबावाला नला, चाैथ का काल, रामझर में गर्मी में भी पानी रहता है। मेज नदी में दो सहायक माछली-तरजूनी नदी का पानी भी आता है।

एक टाइगर 20 किमी में बनाता है टेरेटरी 
रामगढ़ सेंचुरी 307 वर्ग किमी में फैली है। जहां टाइगर की संख्या अधिक रहती है, वहां एक टाइगर को टेरेटरी बनाने के लिए 10 से 15 वर्ग किमी जगह चाहिए होती है, लेकिन जहां टाइगर की संख्या कम है, वहां एक टाइगर 20 वर्ग किमी में अपनी टेरेटरी बनाता है। ऐसे में सेंचुरी में संघर्ष की स्थिति नहीं बन सकती है। इससे पहले सेंचुरी में दो टाइगर आ चुके हैं। टी-62 अगस्त 2013 में आया था और वो मार्च 2015 में रणथंभौर चला गया। इसी तरह टी-91 आठ माह तक यहां रहा। इनके आने के दौरान वनकर्मियों ने बेहतर ट्रैकिंग की। सेंचुरी में नए व पुराने पाथ को दुरुस्त किया है। वनकर्मियों को वॉकी-टॉकी दी हुई है। 

टाइगर आने के बाद कर्मियों को मुस्तैद कर दिया 
टाइगर आने के बाद कर्मचारियों को मुस्तैद कर दिया गया है। टाइगर की ट्रैकिंग के लिए अनुभवी स्टाफ है। टाइगर के लिए पर्याप्त शिकार, पानी व प्राकृतिक आवास है। शाकाहारी वन्यजीवों के लिए ग्रासलैंड बनाए गए हैं। इसके अलावा फल-वनस्पति भी प्रचुर मात्रा में है। धर्मराज गुर्जर, रेंजर, जैतपुर रेंज रामगढ़ सेंचुरी

प्रस्तावित टाइगर रिजर्व को जल्द मंजूरी मिले। सेंचुरी में टाइग्रेस छोड़ी जाए, ताकि टाइगर का कुनबा बढ़े। इसके लिए जल्द प्रयास शुरू करने की आवश्यकता है। बाघों से सेंचुरी आबाद होंगी तो पर्यटन-रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

पृथ्वीसिंह राजावत, पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक बूंदी सीएम और वनमंत्री से जयपुर में करेंगे चर्चा
हरिमोहन शर्मा, पूर्वमंत्री ने कहा कि मेरी वाइल्ड लाइफ के डीएफओ बीजू जॉय से चर्चा हुई है। डीएफओ ने बताया है कि टाइगर के पगमार्क मिले हैं। सबसे पहले टाइगर की पहचान होगी, उसके बाद यह देखा जाएगा कि वो सेंचुरी के किस हिस्से को सबसे ज्यादा पसंद करता है। इसके बाद राज्य सरकार को टाइग्रेस छोड़ने के लिए निवेदन करेंगे। बूंदी मंे टाइगर रिजर्व बनाने की सीएम की बजट सत्र में घोषणा पर वन विभाग ने वनों का विस्तृत सर्वे कर प्रस्ताव भिजवा दिए। अब जयपुर जाकर सीएम व वनमंत्री से चर्चा करेंगे। टाइगर को रोकने के लिए टाइग्रेस छोड़ने पर भी बात करेंगे।

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