गरड़दा के दिन फिरे:राजस्थान के सबसे ऊंचे मिट्टी के बांध गरड़दा के दिन फिरे

बूंदी8 महीने पहले
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ड्रोन फोटो-कौशल सैनी, कंटेंट-दिनेश शर्मा। - Dainik Bhaskar
ड्रोन फोटो-कौशल सैनी, कंटेंट-दिनेश शर्मा।
  • 11 साल पहले टूटे डैम को नया बनाने का काम आखिरी पायदान पर
  • सीडब्लूसी की टीम कर चुकी जांच, अब जीएसआई की टीम आएगी
  • इस मानसून में भरा जाएगा, 111 गांव, 92 ढाणियों की प्यास बुझाएगा

11 साल पहले टूटे गरड़दा डैम को नया बनाने का काम आखिरी पायदान पर है। उम्मीद है कि इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का काम इस मानसून तक पूरा हो जाएगा और इसी साल उसमें टेस्ट के लिए पानी भरने की तैयारी है। हाल ही सीडब्लूसी (सेंट्रल वाटर कमीशन) की टीम डैम का निरीक्षण कर चुकी है। टीम ने फाउंडेशन में आ रही पत्थर की लेयर को हटाने का सुझाव दिया है। करीब डेढ़ से दो मीटर लेयर हटाने का काम चल रहा है। अब जीएसआई (जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) की टीम भी जायजा लेने आएगी।सीडब्लूसी डैम की डिजायन और जीएसआई चट्‌टानों में क्रेक की जांच करती है।

उनके सुझाव के मुताबिक ट्रीटमेंट किया जाता है। अगर जीएसआई टीम ने हरी झंडी दे दी तो उम्मीद है कि अगले ढाई-तीन महीनों में काम पूरा हो जाएगा। अनब्रिज का पाॅर्शन कंपलीट हो चुका है। अब नाला पाॅर्शन का काम चल रहा है। सीओटी का काम पूरा हो चुका है, सफाई, मिट्‌टी के बांध, रिपरेप का काम साथ चल रहा है।

नई टेक्नोलॉजी-डैम के पुनर्निर्माण में जीयो टेक्सटाइल फिल्म लगाई

गरड़दा मिट्‌टी के बांधों में प्रदेश का सबसे ऊंचा बांध है। इसकी हाइट 31 मीटर है। इसी तरह यह प्रदेश का पहला डैम है, जिसमें नई टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की गई है। डैम के पुनर्निर्माण में जीयो टेक्सटाइल फिल्म लगाई गई है। अपस्ट्रीम में 100 जीएसएम, 400 जीएसएम की जियो टेक्सटाइल फिल्म, एचडीपीई फिल्म, 400 जीएसएम फिल्म लगाई गई है। डाउन स्ट्रीम में 250 जीएसएम जियो टेक्सटाइल फिल्म लगाई गई है। 100 और 400 जीएसएम की फिल्म सोयल पार्टीकल रोकने के लिए और एचडीपीई फिल्म पानी को लेकर लगाई गई है। पानी पास करने के लिए डाउन स्ट्रीम में चिमनी फिल्टर के साथ 250 जीएसएम की जियो टेक्सटाइल फिल्म लगाई गई है। इससे बांध की गुणवत्ता मजबूत रहेगी।

10 हजार हैक्टेयर भूमि में सिंचाई होगी गरड़दा डैम काे फिर से तैयार करना पूरे जलसंसाधन विभाग के लिए बड़ा चैलेंज था। 15 अगस्त 2010 में पहली बार भरने के दौरान टूटे इस डैम ने भारी तबाही मचाई थी। फिर जांच-दर-जांच, बार-बार डिजायन बदलने, बजट सरीखे ब्रेकर आते गए। यही वजह रही कि इसके पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अटकती चली गई। आखिरकार वर्ष 2017 में पुनर्निर्माण शुरू हुआ। उम्मीद है अब और कोई ब्रेकर नहीं आएगा। इसका पूरा होना इसलिए जिले के लिए महत्वपूर्ण है कि इस बांध से 111 गांव, 92 ढाणियों की प्यास बुझेगी।किसानों की 9261 हैक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी।

डैम के पुनर्निर्माण का प्रोजेक्ट 400 करोड़ रुपए का है। डैम की पानी की कैपेसिटी 44.4 मिलियन क्यूबिक है। डैम का काम पूरा होने के बाद मानसून में इसमें पूरी कैपेसिटी का पानी नहीं भरा जाएगा। इसे किश्तों में भरा जाएगा। अगले साल मानसून में इसके पूरा भरने की उम्मीद है। सीडब्लूसी की टीम निरीक्षण कर चुकी है। सीडब्लूसी के सुझाव के मुताबिक पत्थर की करीब डेढ़-दो मीटर लेयर हटाने का काम चल रहा है। अब दो-चार रोज में जीएसआई की टीम आने की संभावना है। उम्मीद है सबकुछ ठीक रहा तो इस मानसून से पहले काम कंपलीट हो जाएगा और डैम में एक लेवल तक पानी भरा जाएगा।-राजीव विजय, एक्सईएन, जलसंसाधन विभाग

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