सब्जी उत्कृष्टता केंद्र / ड्रीम प्रोजेक्ट का ऐसा हश्र : 10 करोड़ खर्च, वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजी, लेकिन प्रदेश के किसानों का बेनीफिट जीरो

केंद्र में 13 लाख से बना पॉली हाउस... जो आज बेकार पड़ा है केंद्र में 13 लाख से बना पॉली हाउस... जो आज बेकार पड़ा है
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केंद्र में 13 लाख से बना पॉली हाउस... जो आज बेकार पड़ा हैकेंद्र में 13 लाख से बना पॉली हाउस... जो आज बेकार पड़ा है

  • बजट की कमी से काम नहीं आ रही हाइटैक प्लग नर्सरी और पॉली हाउस

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 07:47 AM IST

बूंदी. 10 करोड़ रुपए लगाकर बूंदी में बनाए गए प्रदेश के एकमात्र सब्जी उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल) का फायदा प्रदेश के किसानों को नहीं मिल रहा। डेढ़ साल पहले शुरू हुए केंद्र से अब तक एक भी किसान को फायदा नहीं मिला है। वजह बजट ही नहीं। बड़े इंतजार के बाद पिछले महीने 40 लाख रुपए मंजूर हुए, जो सिर्फ इसे रन करने के लिए हैं, बाकी प्रोजेक्टस के लिए नहीं।

न पूरा स्टाफ है, न फर्नीचर, न प्रोजेक्ट के लिए पैसा। बजट की कमी का सीधा नुकसान प्रदेशभर के किसानों को हो रहा है। उत्कृष्टता केंद्र का रिसर्च सेंटर है, मुख्य मकसद प्रदेश में सब्जियों का उत्पादन दोगुना करना, दुनिया की लेटेस्ट टेक्नॉलाॅजी खेतों तक पहुंचाना, किसानों को सब्जियों से ज्यादा इनकम दिलाना है।    

सब्जी उत्कृष्टता केंद्र विश्वस्तरीय टेक्नॉलॉजी से लेस है। बड़ा कैंपस, शानदार बिल्डिंग, आवासीय ट्रेनिंग सेंटर, 92 लाख से बनी हाइटैक पलग नर्सरी है, जो फुल ऑटोमैटिक है। सिस्टम में एक दफा तापमान और नमी सेट करने के बाद सिस्टम खुद-ब-खुद काम करता है। टेम्प्रेचर बढ़ते ही कूलिंग सिस्टम काम करता है, फोग्स सिस्टम ओंस से बारीक बूंदों से वातावरण को कंट्रोल कर लेता है।

ज्यादा टेंप्रेचर पर नर्सरी में लगे पर्दे अपने आप खुल जाते हैं। मोबाइल के जरिए जयपुर से भी नर्सरी को ऑपरेट किया जा सकता है। सीसी टीवी कैमरे लगे हैं। 13 बजट के बिना हाइड्रोपोनिक्स, एक्सापोनिक्स, लो टनल-वॉकिंग टनल, किसानों को ट्रेनिंग, फसलों की ग्रीडिंग, सर्टिंग, वॉशिंग, वर्टिकल फार्मिंग, रूफटॉप गार्डनिंग, ओपन फील्ड डेमोंस्ट्रेशन, ऑर्गेनिक फार्मिंग से लेकर जितने भी प्रोजेक्ट हैं, वे धरातल पर नहीं उतर पा रहे। ट्रेनिंग सेंटर के लिए फर्नीचर नहीं है। लंबे इंतजार के बाद मिले 40 लाख रुपए ऊंट के मुंह में जीरा है।  

प्रदेश में 80 करोड़ से 8 उत्कृष्टता केंद्र बनाए गए
प्रदेश में 80 करोड़ से 8 उत्कृष्टता केंद्र बनाए गए थे। बूंदी में सब्जी उत्कृष्टता केंद्र, नांता-कोटा में नींबू, झालावाड़ में संतरा, देवड़ावास टोंक में अमरूद, सवाई माधाेपुर में फूल, बस्सी-जयपुर में अनार, खेमरी-धौलपुर आम और जैसलमेर में खजूर उत्कृष्टता केंद्र शुरू हुए। हर केंद्र पर 10 करोड़ रुपए खर्च हुए।

इनमें अनार, नींबू और खजूर उत्कृष्टता केंद्र इंडो-इजराइल प्रोजेक्ट हैं, बाकी राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में है। इन केंद्रों को 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी पैसा राज्य सरकार देती है। ये केंद्र तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधराराजे के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक थे। मकसद था किसानों को खेती से जुड़ी दुनिया की लेटेस्ट टेक्नॉलॉजी से जोड़ना। सब्जियों से किसानों की इनकम बढ़ाना। इजराइल दौरे के बाद उन्होंने प्रदेश में भी ऐसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस लगाना तय किया। तत्कालीन कृषिमंत्री प्रभुलाल सैनी ने इन प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारा। 

केंद्र ने 10 करोड़ दिए, राज्य डेढ़ साल लटका कर 40 लाख रुपए
^ केंद्र सरकार ने इन केंद्रों के लिए 10-10 करोड़ रुपए दिए, राज्य सरकार ने दिखाने को सेंक्शन कर दिया, उधर वित्त विभाग को पैसा रिलीज करने से मना कर दिया। डेढ़ साल लटका कर अब 40 लाख रुपए दिए भी हैं तो इनसे कौनसा तीर मार लेंगे। इनसे तो बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन का पैसा भी अब तक नहीं चुका। मैं राज्य सरकार की आलोचना नहीं कर रहा, पर उत्कृष्टता केंद्रों को पूरा पैसा मिलता तो प्रदेश के लाखों किसानों को फायदा होता। 
प्रभुलाल सैनी, पूर्व कृषिमंत्री 


जल्द पॉली हाउस में रंगीन मिर्च उगाई जाएगी
^लॉकडाउन के बावजूद राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में मई में राज्य सरकार से 40 लाख रुपए मिले हैं। इससे इन्फ्रास्ट्रक्चर रन हो जाएगा। मल्चिंग-बीज के टेंडर प्रोसेस में है। जल्द पॉली हाउस में रंगीन मिर्च उगाई जाएगी। हाइटैक नर्सरी में पौध तैयार की जाएगी।  हितेंद्रकुमार गेरा, उपनिदेशक, सब्जी उत्कृष्टता केंद्र

यह है सब्जी उत्कृष्टता केंद्र का मकसद

सब्जी उत्पादन दोगुना करना
 प्रदेश का सब्जी उत्पादन प्रति हैक्टेयर 10.50 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 20 मीट्रिक टन करना। राष्ट्रीय औसत 20 मीट्रिक टन है। तमिलनाडु में सब्जियों की पैदावार राष्ट्रीय औसत से भी ऊपर 30 मीट्रिक टन है। 

किसानों के लिए पौध तैयार करना
 सब्जियों के हाइब्रीड बीज बहुत महंगे होते हैं, किसान को पौध तैयार करने में काफी पैसा-मेहनत लगती है। इसमें भी 30 से 40 फीसदी पौध नष्ट हो जाती है। बची पौध भी उच्च गुणवत्ता की नहीं रह पाती। किसान सब्जी उत्कृष्टता केंद्र को बीज दे दे, केंद्र अपनी 90 लाख की हाइटेक प्लग नर्सरी में एक रुपए के हिसाब से कीट व्याधि से मुक्त उच्च गुणवत्ता की पौध तैयार कर दे देगा। 

लोटनल-वॉकिंग टनल
अगेती फसल लेने के लिए सही तापमान जरूरी होता है, लोटनल टेक्निक उचित टेम्प्रेचर बनाकर पौध को नष्ट होने से बचाना, वाकिंग टनल से बेलवाली फसल तैयार करना। 

फसलोत्तर प्रबंधन-सब्जियों की ग्रीडिंग, सर्टिंग, वॉशिंग यानी उनमें वैल्यु एडिशन करना ताकि ज्यादा कीमत मिले। जो सब्जियां बिक नहीं पाती, कम कीमत मिलती है, उनके लिए पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट करना। 

टेक्निक की ट्रेनिंग: राज्यभर के किसानों, कृषि अधिकारियों, कर्मचारियों को खेती की लेटेस्ट टेक्नॉलाॅजी का प्रशिक्षण देना। 

वर्टिकल फार्मिंग: मिनिमन जगह में सब्जियों का ज्यादा उत्पादन। 

रूफटॉप गार्डनिंग : छतों पर सब्जियां कैसे उगाएं।

ड्रिप सिस्टम से सब्जी उत्पादन का प्रोटोकॉल तैयार करना।

हाइड्रोपोनिक्स: बिना मिट्‌टी के केवल पानी में सब्जियां उगाना। 

एक्वापोनिक्स: मछलियों और सब्जियों की खेती साथ-साथ।

ऑर्गेनिक सब्जियां तैयार करना- इसका प्रोटोकॉल तैयार करना। 

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