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  • Such Pressure Of The Police That The Amount Of Bribe Had To Be Brought On Interest, The Broker Caught Red Handed Taking 25 Thousand Rupees

घूसखाेरी:पुलिस का ऐसा दबाव कि ब्याज पर लानी पड़ी रिश्वत देने की राशि, 25 हजार रुपए लेते रंगेहाथ दलाल पकड़ा

बूंदी19 दिन पहले
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लाखेरी. दलाल के साथ कोटा एसीबी की टीम व परिवादी। - Dainik Bhaskar
लाखेरी. दलाल के साथ कोटा एसीबी की टीम व परिवादी।
  • एससी-एसटी के मामले में मांगी थी रिश्वत, दूसरा आरोपी हैडकांस्टेबल हरेंंद्र चौधरी फरार

धारा 3 एससी-एसटी के प्रकरण को रफा-दफा करने के लिए पुलिस का रिश्वत को लेकर पीड़ित पर इतना भारी दबाव देखने को मिला कि उसे 3 रुपए सैकड़ा के ब्याज पर रुपए जुटाने पड़े। इसकी शिकायत पर कोटा एसीबी की टीम ने रिश्वत ले रहे दलाल को 25 हजार रुपए के साथ रंगेहाथों दबोच लिया। दूसरा आरोपी हैडकांस्टेबल भाग गया।लबान गांव के गिरिराजप्रसाद पुत्र मांगीलाल ने एसीबी के टोल फ्री नंबर पर शिकायत की थी। इसमें बताया था कि उसके बड़े भाई मोहनलाल के खिलाफ लबान गांव के शिवराज मीणा ने एससी-एसटी एक्ट में झूठा मुकदमा दर्ज करा रखा है।

इसकी जांच लाखेरी डीएसपी घनश्याम वर्मा कर रहे हैं। इस प्रकरण को रफा-दफा करवाने के लिए डीएसपी का रीडर हैडकांस्टेबल हरेंद्र चौधरी 30 हजार रुपए की बार-बार मांग कर रहा था, जबकि पीड़ित डीएसपी से मिलना चाहता था। हैडकांस्टेबल ने पीड़ित को अधिकारी नहीं मिलाया और बार-बार रिश्वत मांगता रहा। हरेंद्र ने मामला निबटाने के लिए दलाल प्रेमशंकर का नाम लिया और उसे 30 हजार रुपए देने की बात कही। परिवाद का सत्यापन कर सोमवार शाम को दलाल को रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई कोटा एसीबी के सीआई नरेश चौहान के सुपरविजन मे हुई। इस दौरान सीआई अजित बागडोलिया के साथ भरतसिंह, मोहम्मद खालिक, देवेन्द्रसिंह, बृजराज, मनोज, योगेंद्र सिंह, हेमंतसिंह, जोगेन्द्रसिंह साथ रहे।

लाखेरी में पोस्टिंग, डीएसपी कार्यालय में काम

हैडकांस्टेबल हरेंद्र हाल ही में पदोन्नत होकर लाखेरी थाने पर लगाया गया था। अपनी तैनातगी के बाद से ही वह डीएसपी कार्यालय में कथित सेवाएं देने लगा था। कुछ दिनों पूर्व अवकाश लेकर भी उसे डीएसपी कार्यालय में काम करते देखा गया। हैडकांस्टेबल जमीन सबंधी मामलों को लेकर भी चर्चित रहा है। पुलिस थाने में समझाइश के बाद भी उसका दखल देखने को मिला। इस प्रकरण में फिलहाल हैडकांस्टेबल व दलाल प्रमुख रूप से आरोपी हैं। आगे की जांच से और राज खुल सकते हैं।डीएसपी वर्मा की भूमिका जांच के बाद होगी स्पष्ट: फरियादी ने अपनी शिकायत में डीएसपी घनश्याम वर्मा पर भी गंभीर आरोप लगाया है। एसीबी ने फिलहाल उनकी भूमिका को संदिग्ध नहीं माना है, लेकिन उन्हें क्लीन चिट भी नहीं दी है।

एसीबी एएसपी ठाकुर चन्द्रशील का कहना है कि जब फरार पुलिसकर्मी हरेंद्र गिरफ्तार होगा, उसके बाद ही डीएसपी घनश्याम वर्मा की भूमिका स्पष्ट हो पाएगी। दो साल पहले डीएसपी ओमप्रकाश भी इसी जगह से हुआ था ट्रैप: लाखेरी डीएसपी ऑफिस घूस मांगने के मामले में पहले भी बदनाम रहा है। एसीबी कोटा ने दो साल पहले इसी ऑफिस में तैनात डीएसपी ओमप्रकाश चंदोलिया को 24 हजार रुपए की रिश्वत लेते ट्रैप किया था। रिश्वत की रकम शराब दुकान मालिक से मासिक बंधी के रूप में ली गई थी। छापेमारी के दौरान लाखेरी डीएसपी के घर में भारी में ब्रांडेड शराब की बोतलें भी बरामद की गई थीं। शराब का बाजार मूल्य भी उस वक्त 1 लाख रुपए था।

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