जन्माष्टमी:कोरोना की वजह से कृष्ण जन्म का उल्लास फीका

बूंदी2 वर्ष पहले
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  • शहर के सजे रहे सभी मंदिर, पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बंद रही

छोटी काशी में कोरोना के चलते इस बार श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के रंग फीके रहे। हर साल मंदिरों में रात 9 बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ शुरू हो जाती थी। हर गली और चौराहे कृष्ण के भक्तों से भरा रहता था। जगह-जगह मटकियां फोड़ दी जाती थी, जिसमें कई हजार श्रद्धालु उमड़ते थे। रात 2 बजे तक शहर में चहल-पहल रहती थी।

यह पहली बार है कि मंदिरों में जय कन्हैयालाल की नहीं सुनाई दी। श्रद्धालुओं की बजाय पुलिस के पहरे में कान्हा का जन्म हुआ। पुलिस मंदिरों के आगे जमी रही और लगातार गश्त करती रही, ताकि लोग मंदिरों तक ना जाएं। सार्वजनिक आयोजन नहीं हुए। मंदिरों पर आकर्षक विद्युत सजावट की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान के ऑनलाइन दर्शन किए। प्रमुख चारभुजा मंदिर, रावभावसिंह, गोपाल मंदिर अाैर कृष्ण मंदिरों में भगवान को नई पोषाक धारण करवाई गई। रावभावसिंह के मंदिर में झांकी सजाई गई, लेकिन श्रद्धालुओं की आवाजाही नहीं थी। चारभुजा मंदिर में आरती के समय भीड़ नहीं थी। मंदिरों में रात 12 बजे भगवान का पंचामृत से स्नान करवाकर आरती की गई, जिसे फेसबुक पर लाइव किया गया। श्रद्धालुओं ने घर पर बैठकर भगवान के दर्शन किए।

रंगनाथजी मंदिर में भी सादगी से मना पर्व

रंगनाथजी मंदिर में भी गाइडलाइन की पालना कर सादगी से जन्माष्टमी मनाई गई। पुजारी मुकेशकुमार शर्मा ने बताया कि मंदिर में लोगों का प्रवेश बंद होने के चलते झांकियां भी नहीं सजाई गई। रात 12 बजे कृष्ण जन्मोत्सव पर पंचामृत से कान्हा का अभिषेक किया और विशेष आरती की गई।

दही हांडी का नहीं हुआ आयोजन: जन्माष्टमी पर मंदिरों में सजी झांकियां देखने के लिए भीड़ उमड़ती थी, लेकिन इस बार दही हांडी का आयोजन करने वाले युवा भी निराश नजर आए।

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