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ग्रामीणों ने मनाया घास भैरू महोत्सव:बैलों से खींचकर गांव में निकाली जाती है सवारी, सालभर रहती है खुशहाली, गांव में नहीं आती बीमारी

बूंदीएक महीने पहले
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देही कस्बे में घास भैरू महोत्सव मनाते ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
देही कस्बे में घास भैरू महोत्सव मनाते ग्रामीण।

बूंदी जिले के देई कस्बे शनिवार सुबह सामाजिक एकता का प्रतीक घास भैरू महोत्सव मनाया गया। घास भैरू चौक से घास भैरू को मदिरापान चढ़ाने के बाद पूजा अर्चना की गई। दर्जनों बैल की जोड़ियों से उनकी सवारी देई कस्बे में निकाली गई। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में सभी समाज के लोग मौजूद रहे। दर्जनों बैलों की जोड़ियां घास भैरू को खींचती हुई शहर के विभिन्न इलाकों से घास भैरु चौक पहुंची। जहां विधिवत पूजा-अर्चना आने वाले साल की खुशहाली की कामना की गई।

मान्यता के अनुसार गांव घास भैरू की सवारी गांव में निकालने से पूरे साल सुख संपत्ति रहती है और किसी भी प्रकार की बीमारियां गांव में नहीं होती है। इसके अलावा नवजात से 1 साल तक के बच्चे-बच्चियों को भी बैलों की जोड़ियों के नीचे से निकालते हैं। इससे किसी को बीमारी नहीं होती। घास भेरू सवारी के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह रहती है कि ये रस्सी के सहारे बैलों को जोता नहीं जाता। आदमी स्वयं ही हाथों से बैलों की जोड़ी को जुपता है और उसे खींचता है।

सबसे पहले बैल की जोड़ी मीणा समाज की लगाई जाती है। दूसरे नम्बर पर गुर्जर समाज उसके बाद एक-एक करके सभी समाज के लोग बैलों की जोड़िया लगाकर घास भैरू का गांव में भ्रमण करवाते है। इस दौरान जगह-जगह लोग उन्हें मदिरा चढ़ा कर आने वाले साल की खुशहाली की कामना करते है।

सैकड़ों की संख्या में घास भैरू महोत्सव में आते हैं कस्बे के लोग
घास भैरू की सवारी निकालने से 10 घंटे पूर्व शुक्रवार रात को घास भैरू चौक में पंच-पटेलों की एक मीटिंग होती है। उसमें गांवों के कई मामलों पर समीक्षा की जाती है। पंच के निर्णयों पर कोई विरोध नहीं करता। सुबह 5 बजे से ही घास भैरू की सवारी निकालने की तैयारी शुरू होती है। उसके बाद महोत्सव में कोई भी व्यक्ति नशे में उत्पात करता है तो उसे दंडित भी किया जाता है। सभी समाजों के साथ मिलकर यह महोत्सव मनाया जाता है।