जर्जर नाव पर 300 बच्चों की जिंदगी टिकी:35 फीट गहरी घोड़ापछाड़ नदी के उस पार है स्कूल, 90 मीटर की पुलिया के लिए 25 वर्षों से लोग कर रहे संघर्ष

बूंदी17 दिन पहलेलेखक: दिनेश शर्मा
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बरूंधन गांव के 300 बच्चों के सामने टूटी-फूटी नाव से 35 फीट गहरी और जिले में सबसे तेज बहने वाली घोड़ापछाड़ नदी को पार कर स्कूल जाना-आना पड़ रहा है। फोटो- कौशल सैनी। - Dainik Bhaskar
बरूंधन गांव के 300 बच्चों के सामने टूटी-फूटी नाव से 35 फीट गहरी और जिले में सबसे तेज बहने वाली घोड़ापछाड़ नदी को पार कर स्कूल जाना-आना पड़ रहा है। फोटो- कौशल सैनी।

स्कूल खुल गए हैं और इसके साथ ही बरूंधन गांव के 300 बच्चों के सामने टूटी-फूटी नाव से 35 फीट गहरी और जिले में सबसे तेज बहने वाली घोड़ापछाड़ नदी को पार कर स्कूल जाना-आना पड़ रहा है। बारिश का मौसम है और घोड़ापछाड़ नदी तेज बहाव पर है, ऐसे में नाव पलट जाए तो कोई बचा भी नहीं सकता। इन बच्चों के पास कोई सुरक्षा उपकरण भी नहीं होते। इस पार से उस पार एक तार का सहारा है, उसे पकड़कर ही नाव में बैठे बच्चे और ग्रामीण इस पार से उस पार सफर करते हैं।

बच्चे राजी-खुशी जब तक घर लौट नहीं आते, तब तक उनके मां-पिता की सांसें अटकी रहती हैं। कई बच्चों के पिता और शिक्षक ऐसे भी हैं, जो खुद भी इसी तरह नाव से नदी पार कर पढ़े। अब उनके बच्चे भी वैसी ही स्थिति में पढ़ाई कर रहे हैं। बूंदी से महज 32 किमी दूर घोड़ापछाड़ नदी गरड़दा के पहाड़ों से निकलकर करीब 60 किमी का सफर तय करते हुए संगावदा के पास मांगली नदी में मिल जाती है। नदी का नाम घोड़ापछाड़ इसलिए पड़ा कि इसका बहाव इतना तेज है कि घोड़े भी नदी को पार नहीं कर सकते।

ग्रामीणों ने खून से लिखे थे पीएम व सीएम को खत

बरूंधन गांव में घोड़ापछाड़ नदी पर महज 90 मीटर पुलिया बनाने के लिए ग्रामीण 25 साल से लड़ाई लड़ रहे हैं। बच्चों और गांववालों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को खून से खत लिखे।

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