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  • The Victory Of Stubbornness... 3 Anicuts Made With Public Participation, The Ground Water Level Living At 300 Feet Came To 20 In Rain And 60 Feet In Summer

इच्छाशक्ति से बदली तस्वीर:जिद की जीत...जन सहभागिता से बने 3 एनीकट, 300 फीट पर रहने वाला ग्राउंड वाटर लेवल बारिश में 20 और गर्मी में 60 फीट पर आया

बूंदी11 दिन पहले
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नैनवां. मानपुरा गांव में माना का घाटा बड़ा खाल पर बनाया गया एनीकट। - Dainik Bhaskar
नैनवां. मानपुरा गांव में माना का घाटा बड़ा खाल पर बनाया गया एनीकट।
  • मानपुरा में सिंचाई, पेयजल संकट दूर, होने लगी गेहूं और गन्ने की फसल

नैनवां खानपुरा पंचायत के गांव मानपुरा के लोग कभी पीने के पानी को तरसते थे। ऐसे में फसलों को सिंचाई के लिए तो पानी तो दूर की कौड़ी थी। इसलिए गांववाले गेहूं और गन्ना जैसी फसल बोने की तो सोच भी नहीं सकते थे। बस सरसों व चना जैसी कम पानीवाली फसलें ही कर पाते थे। पानी पाताल में जा चुका था, पर आज तस्वीर बदल गई है। पीने के लिए भरपूर पानी है। गेहूं और गन्ने की खेती करने लगे हैं। ग्राउंड वाटर लेवल जो कभी 300 फीट से नीचे चला गया था, अभी बारिश में 20 फीट पर आ चुका है और भरपूर गर्मी में भी 60 फीट के आसपास रहता है।

यानी मौजां ही मौजां... पर ये हुआ कैसे! कैसे तदबीर से तकदीर बदली, यही सब इस कहानी में पढ़िए...गांव के पास से बरसात में पानी का खाल गुजरता था, पर पानी कोई काम नहीं आ रहा था, यूं ही बह जाता था। ऐसे में सामुदायिक सहभागिता से इस पर तीन एनीकट बनाए गए, जो गांव के लिए वरदान बन गए। इन एनीकट के बन जाने के बाद पानी जमीन में रिचार्ज होने लगा। पीने और सिंचाई के पानी की समस्या दूर हो गई तो गांव के किसान अब गेहूं व गन्ने की खेती भी करने लगे। दरअसल, रिलायंस फाउंडेशन आगे आया। जो मुख्यरूप से जल सुरक्षा, जल जागरूकता लाने के लिए, ग्रामीणों के क्षमतावर्धन और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के लिए काम करता है। फाउंडेशन ने गांववालों को जल संरक्षण से जोड़ा। इसके तहत मानपुरा में अप्रैल-2019 में गांववालों की सभा की। इसमें गांव की समस्याओं को समझा गया, उन्हें चिन्हित किया गया। उन पर सामूहिक चर्चा कर उनका समाधान सोचा गया।

मुख्य समस्या पानी की थी। गांववालों ने बताया कि गांव के पास में खालों में बारिश का पानी बहुत आता है, पर बेकार बहकर चला आता है। अगर इन नालों का पानी रोका जाए तो जल संकट दूर हो सकता है। सूख रहे कुएं, बोरिंग फिर से जिंदा हो सकते हैं। समस्या और उसका समाधान मिल गया था। अब प्लान बनाने और उसे धरातल पर उतारने की बारी थी। ऐसे में पहले गांव का वाटर बजट तैयार किया गया। पानी की आवक से अधिक पानी का दोहन सामने आया। उसी के आधार पर गांव का वाटर सिक्योरिटी प्लान तैयार बनाया गया। मई-जून 2019 मे जन सहभागिता से बन्नी के महादेव और माना का घाटा पर एनीकट बनाए गए। गांव में बनाई तलाई में पानी की आवक बढ़ाने के लिए झाड़ोली नाले पर एक और एनीकट बनाकर उसके पानी को फीडर के जरिए तलाई तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इसके परिणामस्वरूप बारिश का पानी इन एनीकटों मे भरा रहने लगा।

दिसंबर-जनवरी में भी टैंकर मंगवाते थे, अब इसकी जरूरत नहीं पीने के पानी के लिए दिसंबर, जनवरी में भी पानी के टैंकर मंगवाने पड़ते थे। इनकी जरूरत अब नहीं पड़ती। मानपुरा गांव में यह सामुदायिक भागीदारी का एक अनूठा उदाहरण है। रिलायंस फाउंडेशन की ओर से गांववालों की सहभागिता से आंव का खेड़ा, देवरी बड़वा, खेरुणा, बागेड़ा, देवपुरा, खोलाड़ा, सूंथली में भी एनीकट बनाए हैं, जो काफी फायदेमंद साबित होंगे।

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