पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

हालात पहले से बेहतर:मरीजों की संख्या कम होने के साथ संक्रमण दर भी लुढ़की, 92% पहुंची जिले की रिकवरी रेट

बूंदी19 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
ऐसी जागरूकता जरूरी- वार्ड 48 में सेनेटाइजर का स्प्रे। - Dainik Bhaskar
ऐसी जागरूकता जरूरी- वार्ड 48 में सेनेटाइजर का स्प्रे।
  • तीसरी लहर की अगस्त-सितंबर में आने की आहट को देखते हुए पूरी सावधानी जरूरी
  • लाॅकडाउन से संक्रमण की चेन टूटी, डोर टू डोर सर्वे से मरीजों की हुई तलाश, हर घर सेनेटाइज

जिले में हालात पहले से बेहतर होते जा रहे हैं। पॉजिटिव केस कम होने के साथ ही संक्रमण दर में भी गिरावट आ रही है। अच्छी बात यह है कि मरीजों की रिकवरी रेट 92% से ऊपर पहुंच गई है। हालांकि अगस्त-सितंबर में कोरोना की तीसरी लहर के सक्रिय होने की आशंका को देखते हुए हमें सावधानी को नहीं छोड़ना है, क्योंकि खतरा अभी टला नहीं है।

चिकित्सा विभाग सैंपलिंग बढ़ाने की जरूरत महसूस कर रहा है। जिले के प्रत्येक ब्लाॅक के बीसीएमओ को प्रतिदिन 150 सैंपल करवाने के लिए कहा गया है, ताकि कोरोना पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया जा सके।बूंदी राजस्थान में वह जिला है, जो वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के शुरुआती 2 महीने मार्च और अप्रैल में ग्रीन जोन में रहा है। मई में पॉजिटिव केस सामने आने लगे थे, लेकिन नियंत्रण में था।

अगस्त माह में सर्वाधिक केस आए, उसके बाद संक्रमण की रफ्तार घटती गई। इस साल 15 अप्रैल से 15 मई के बीच कोरोना का भयावह रूप लोगों ने देखा। कई परिवारों ने अपनों को खो दिया। प्रशासन व चिकित्सा विभाग का प्रयास है कि जो हालात पहले बने, वह फिर से नहीं बने।

हालात सुधरे हैं, लेकिन हमें अब भी पूरी सावधानी बरतनी है। सैंपलिंग बढ़ाने की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में प्रत्येक ब्लॉक से 150 सैंपल करवाने के लिए बीसीएमओ को निर्देश दिए गए हैं। लाॅकडाउन खुलने के बाद सावधानी रखनी है। अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलना है, मास्क लगाना है। जैसे नंबर आए, वैसे ही वैक्सीन भी लगवानी है। डॉ. महेंद्र त्रिपाठी

प्रशासन व चिकित्सा विभाग ने डोर टू डोर सर्वे की शुरुआत की, ताकि जो संक्रमित घरों में हैं, उन्हें तलाशा जा सके। टीमों ने खांसी, जुकाम, बुखार के रोगियों को घरों में आइडेंटिफाइड कर उन्हें दवाइयां उपलब्ध करवाई। साथ ही जिन लोगों में कोरोना के लक्षण थे, उन्हें सीएससी में भर्ती करवाया गया, ताकि समय पर उनका उपचार हो सके। इस सर्वे में शिक्षा विभाग और आईसीडीएस ने सहयोग किया और कर भी रहे हैं।

पीएचसी-सीएचसी की मजबूती से अच्छा असर

अस्पताल में आने वाले अधिकांश रोगियों को ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ी। प्रशासन दिन-रात ऑक्सीजन सिलेंडरों की व्यवस्था में जुटा रहा। ऑक्सीजन की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए ऑक्सीजन कन्संट्रेटर की व्यवस्था की गई। अस्पताल में लगातार बढ़ रहे रोगियों की संख्या को देखते हुए पीएचसी व सीएससी स्तर पर कोरोना योगियों के उपचार की व्यवस्था शुरू की।

उसके लिए 14 सीएचसी व 2 सीएचसी में ऑक्सीजन सिलेंडर व कन्संट्रेटर पहुंचाए गए और इसका सीधा असर जिला अस्पताल में देखने को मिला।

​​​​​​​

खबरें और भी हैं...