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अव्यवस्था:सामान्य वार्ड में भर्ती मरीज की मौत, जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई, ट्रैक्टर में ले गए शव

किशनगंजएक महीने पहले
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अस्पताल में महिला की मौत के बाद ऑटो रिक्शा से शव ले जाते परिजन। - Dainik Bhaskar
अस्पताल में महिला की मौत के बाद ऑटो रिक्शा से शव ले जाते परिजन।
  • किशनगंज अस्पताल में चार दिन में 4 मौतें, गंभीर मरीजों का भी ओपीडी वार्ड में कर रहे भर्ती

कस्बे का अस्पताल कई अव्यवस्थाओं के साथ संचालित हो रहा है। अस्पताल में एंबुलेंस नहीं होना भी मरीजों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। शुक्रवार को किशनगंज अस्पताल के ओपीडी वार्ड में भर्ती मरीज की मौत हो गई। मरीज को सांस लेने में तकलीफ होने से भर्ती किया गया था। उसका ऑक्सीजन लेवल कम आ रहा था, जिससे ऑक्सीजन लगाकर उपचार शुरू किया गया था।

शुक्रवार सुबह 11 बजे करीब मरीज की मृत्यु हो गई। मरीज गुरुवार रात को 10 बजे जिला स्वास्थ्य विभाग से मिली रिपोर्ट में कोरोना से संक्रमित था, जिसकी अस्पताल प्रबंधन को भी जानकारी नहीं थी। मरीज का सामान्य मौसमी बीमारियों के मरीजों के साथ ही भर्ती कर उपचार किया गया था। मरीज जिस बेड पर भर्ती किया गया था उसके आसपास अन्य सामान्य मौसमी बीमारियों के मरीज व उनके परिजन भी थे।

ऐसे में वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों व उनके परिजनों को भी संक्रमित होने का खतरा है। परिजन अस्पताल से खुले में ही ट्रैक्टर में ही शव को अपने साथ ले गए। शुक्रवार शाम को भी गंभीर अवस्था में एक महिला की मृत्यु हो गई। महिला की मृत्यु के बाद शव को ऑटो रिक्शा से ले जाना पड़ा।

चिकित्सा प्रभारी ओमप्रकाश मीणा ने बताया कि उक्त महिला के 5-6 दिन से बुखार आ रहा था। जिसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर अस्पताल लेकर आए थे। उपचार के दौरान महिला की मौत हो गई। किशनगंज अस्पताल में पिछले 4 दिनों में अब तक 4 मृत्यु हो चुकी है।

यह है लापरवाही- संक्रमण के बीच एक ही वार्ड में हो रहा उपचार

अस्पताल में गंभीर अवस्था में आने वाले मरीजों को सीधे ही सामान्य वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है। वर्तमान कोरोना काल में तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर मरीज को अस्पताल लेकर आया जाता है। जिसकी बिना कोरोना संक्रमण की जानकारी लिए सीधे ही सामान्य वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया जाता है।

शुक्रवार को अस्पताल में इलाज के लिए आया एक मरीज कोरोना संक्रमित था। जिसको जनरल वार्ड में भर्ती कर उपचार किया गया था। उपचार के दौरान उक्त मरीज की मृत्यु हो गई। तब सामने आया कि उक्त मरीज कोरोना संक्रमित था।

अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीज को उपचार के लिए आवंटित बेड की चादर तक नहीं बदली। ऐसे में कैसे कोरोना संक्रमण की चैन तोड़ी जा सकती है। जबकि सामान्य वार्ड में अन्य कई मरीज व उनके परिजन भी मौजूद रहते हैं।

अस्पताल प्रसव कक्षा और जच्चा-बच्चा वार्ड में भी अव्यवस्थाएं

अस्पताल के प्रसव कक्ष एवं जच्चा बच्चा कक्ष में कई तरह की अव्यवस्था देखने को मिल रही है। इन कक्षों में कोई भी आदमी प्रवेश कर जाता है। जिनको कोई रोकने ठोकने वाला वार्ड बॉय भी मौजूद नहीं रहता। इन महिलाओं के कक्षों में पुरुषों का आना-जाना बेरोकटोक लगा रहता है।

यहां तक की कई बार जच्चा बच्चा कक्ष में खाली बेड पर पुरुष आकर आराम भी फरमाते देखे गए हैं। यहां पर कार्यरत एएनएम गर्भवती महिलाओं की सार संभाल करें या फिर इन आने जाने वाले पुरुषों को रोके यह बहुत बड़ी विडंबना बनी हुई है।

गंभीर बीमारियों वाले मरीजों को अलग वार्ड में भर्ती करने की व्यवस्था शुरू करेंगे। सुबह की पारी के दौरान हुए इस मामले की जानकारी नहीं है।
- डॉ. ओम प्रकाश मीणा, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी

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