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कागजाें में उलझा उम्मीदाें का बांध:40 साल बाद भी बांध कागजों में, नतीजा- चार गांवाें में न पक्की सड़क, न ही बिजली

झालावाड़13 दिन पहले
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  • मनोहरथाना की घोड़ा पछाड़ और अजनार नदी पर प्रस्तावित है बांध
  • क्षेत्रीय विधायक भी कई बार विधानसभा में उठा चुके मुद्दा

मनोहरथाना कस्बे से दो किमी की दूरी पर घोडा पछाड और अजनार नदी का संगम है। इस पर 1980 में बांध बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन यहां बांध तो नहीं बना, 40 साल से इसके डूब में आ रहे 4 गांवों का विकास भी थम गया है। इन गांवों में जब भी सड़क, बिजली, पानी सहित अन्य विकास कार्यों के लिए स्वीकृति मिलती है तो डूब क्षेत्र में होने के चलते यहां पर काम निरस्त हो जाते हैं। ऐसे में लोग सालों से सुविधाओं को तरस रहे हैं। इसी परियाेजना में 32 गांव आंशिक डूब में आ रहे हैं। इनमें भी जब कोई विकास कार्यों आते हैं तो इनमें डूब क्षेत्र की अटकलें लगती हैं।

अभी भी केंद्रीय जल आयोग के पास इस बांध के निर्माण की फाइनल स्वीकृति की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। वर्तमान में इस परियोजना की पर्यावरण स्वीकृति के लिए राज्य स्तरीय पर्यावरण मूल्यांकन समिति जयपुर को ईआईए, ईएमपी की ड्राफ्ट रिपोर्ट विभाग ने प्रस्तुत की है। पर्यावरण और अन्य आवश्यक स्वीकृतियों के बाद ही इस परियाेजना का रास्ता साफ हाेगा। क्षेत्र के विधायक गोविंद रानीपुरिया लगातार इस मुद्दे को विधानसभा में उठाते रहे हैं, लेकिन जवाब में अभी भी इस मध्यम सिंचाई परियोजना को प्रक्रियाधीन ही बताया जा रहा है।

या ताे बांध निर्माण की स्वीकृति मिले या इसकी फाइल ही बंद कर दें^घोड़ा पछ़ाड़ और अजनार नदी के संगम पर बांध निर्माण का 1980 में प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन आज तक इसको स्वीकृति नहीं मिली है। इससे इसके डूब क्षेत्र के गांवों में विकास नहीं हो पा रहा है। हर बार जब मैंने इस मुद्दे को उठाया तो यही कहा गया कि यह बांध निर्माण की स्वीकृति फाइल प्रक्रियाधीन है, लेकिन यह प्रक्रिया कब तक चलेगी। या तो बांध निर्माण की फाइल ही बंद करें या फिर बांध निर्माण को स्वीकृति दें।

गोविंद रानीपुरिया, विधायक, मनोहरथानाबांध के लिए पर्यावरण स्वीकृति मिलनी हैघोड़ा पछ़ाड और अजनार नदी के संगम पर बांध निर्माण को पर्यावरण स्वीकृति मिलनी है। इसमें समय लगता है। कई सारी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। पहले इसमें दो राज्यों राजस्थान और मध्यप्रदेश के क्लीयरेंस का इश्यू था, जब वह पूरा हुआ तो अब पर्यावरण स्वीकृति मिलनी है। यह मामला उच्च स्तर का है।- आरके त्यागी, एसई, जलसंसाधन विभाग, झालावाड़

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