अव्यवस्था / 5 विभागों में फैकल्टी की कमी, पीजी डिग्री की मान्यता पर संकट, स्टूडेंट्स भी तनाव में

Lack of faculty in 5 departments, crisis on recognition of PG degree, students also under stress
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Lack of faculty in 5 departments, crisis on recognition of PG degree, students also under stress

  • एमसीआई का निरीक्षण जल्द, चार अन्य विभागों पर मान्यता का संकट

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 08:01 AM IST

झालावाड़. झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के पांच विभागों में पीजी कर रहे स्टूडेंट्स की डिग्री की मान्यता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कारण एमसीआई का निरीक्षण होने वाला है और पांचों विभागों में फैकल्टी की कमी है। ऐसे में एमसीआई को इन विभागों में फैकल्टी नहीं मिली तो स्टूडेंट्स की डिग्री की मान्यता नहीं मिलेगी।

फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए मेडिकल कॉलेज ने यूटीबी बेसिस पर फैकल्टी की भर्ती के लिए इंटरव्यू भी किए, लेकिन केवल एक विभाग को ही सफलता मिली, वह भी डॉक्टरों के अपने रिलेशन से। नहीं तो इस विभाग को भी अन्य विभागों की तरह खाली हाथ रहना पड़ता। फैकल्टी नहीं मिलने से पीजी स्टूडेंट्स का तनाव लगातार बढ़ रहा है। खासकर एनेस्थीसिया विभाग को, क्योंकि सबसे ज्यादा फैकल्टी की कमी इसी विभाग में है।

झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के पांच विभाग मेडिसिन, आर्थोपेडिक, पीडियाट्रिक, गायनिक व एनेस्थीसिया विभाग में पीजी कर रहे स्टूडेंट्स की डिग्री की मान्यता के लिए एमसीआई का निरीक्षण होना है, लेकिन संकट यह है कि बिना फैकल्टी के कॉलेज निरीक्षण करवाए कैसे? इस मुद्दे को जयपुर में गत दिनों शासकीय मंडल की बैठक में उठाया तो 3 महीने के लिए यूटीबी बेसिस पर फैकल्टी की भर्ती करने की सरकार ने अनुमति दी।

फेकल्टी भर्ती के लिए शुक्रवार व शनिवार को मेडिकल कॉलेज में इंटरव्यू हुए, लेकिन केवल आर्थोपेडिक विभाग को ही सफलता मिली। चार अन्य विभागों के लिए इंटरव्यू में कोई नहीं आया। ऐसे में झालावाड़ मेडिकल कॉलेज की पीजी डिग्री की मान्यता खतरे में है।

हालांकि एमसीआई का निरीक्षण हो गया और फैकल्टी की कमी रही तो झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के लिए 3 लाख रुपए फीस जमा कराकर कंप्लाइज निरीक्षण का चांस है, लेकिन तब तक भी फैकल्टी की कमी पूरी नहीं हुई तो एमसीआई यहां से पीजी कर रहे स्टूडेंट्स की डिग्री को मान्यता नहीं देगी। पीजी कर रहे स्टूडेंट्स कभी विशेषज्ञ नहीं बन पाएंगे।

सरकार भलीभांति परिचित, फिर भी नियमित भर्ती नहीं
 सरकार भलीभांति परिचित है कि एमसीआई केवल नियमित फैकल्टी होने पर ही मान्यता देती है। इसके बावजूद सरकार ने फैकल्टी की कमी को पूरा करने के लिए तीन महीने के लिए यूटीबी (अर्जेट ट्रेंपरेरी बेसिस) की अनुमति दी। जबकि मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. दीपक गुप्ता ने शासकीय मंडल की बैठक में कहा था कि यूटीबी में कोई नहीं आता है, फिर भी सरकार ने नियमित भर्ती की स्वीकृति नहीं दी।

फैकल्टी के नहीं आने के ये हैं प्रमुख कारण

  • कोई डॉक्टर अन्य जगह से जहां उसकी अच्छी प्रैक्टिस चल रही हो और यहां से ज्यादा वेतन मिल रहा हो, वह क्यूं आएगा।
  • यहां फैकल्टी को एसआर से 10 हजार रुपए कम वेतन दिया जा रहा है। एसआर को 80 हजार और असिस्टेंट प्रोफेसर को 70 हजार ही वेतन दिया जा रहा है।
  • इसके अलावा तीन महीने झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी कार्य करती है तो उसका अनुभव भी नहीं जोड़ा जाता। 

यह होगा नुकसान

  • मेडिकल कॉलेज के पांच विभागों में पीजी कर रहे स्टूडेंट्स की डिग्री को एमसीआई की मान्यता नहीं मिली तो पूरे देश में उनकी डिग्री मान्य नहीं होगी और न वे एमडी एमएस विशेषज्ञ बन पाएंगे।
  • अगर एमसीआई पीजी डिग्री की मान्यता रद्द कर देती है तो मेडिकल कॉलेज में पीजी सीटें भी कम हो जाएंगी। उदाहरण के तौर पर जैसे मेडिसिन विभाग में 14 पीजी सीटें हैं तो यहां मूल सीटें 4 ही रह जाएंगी।
  • पीजी सीटें नहीं होने पर यहां रेजिडेंट डॉक्टर की कमी हो जाएगी।

किस-विभाग में कितनी फेकल्टी कम
मेडिसिन विभाग         4 असिस्टेंट प्रोफेसर व 2 एसआर
एनेस्थीसिया विभाग    2 एसोसिएट प्रोफेसर व 2 असिस्टेंट प्रोफेसर
आर्थोपेडिक विभाग    3 असिस्टेंट प्रोफेसर
पीडियाट्रिक विभाग    1 एसोसिएट प्रोफेसर व 1 असिस्टेंट प्रोफेसर
गायनिक विभाग        1 असिस्टेंट प्रोफेसर

मेडिकल कॉलेज को 1 एपी और 4 एसआर ही मिल पाए
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की कमी पूरी करने के लिए इंटरव्यू आयोजित किए गए थे। इसमें केवल आर्थोपेडिक विभाग को यूटीबी पर 3 असिस्टेंट प्रोफेसर मिल गए हैं, बाकी अन्य चार विभाग के लिए कोई नहीं आया। इसके अलावा सोमवार को आयोजित हुए इंटरव्यू में 4 सीनियर रेजिडेंट मिले हैं, इनको एक साल के लिए लिया गया है।


अन्य विभागों के लिए कोई नहीं आया
^ फैकल्टी के लिए यूटीबी पर इंटरव्यू किए थे, इसमें आर्थोपेडिक विभाग के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर 3 फैकल्टी मिली है, अन्य विभागों के लिए कोई नहीं आया। इसके अलावा सोमवार को एसआर के इंटरव्यू हुए, उसमें चार एसआर ही मिले हैं।
डॉ. पी. झंवर, एडिशनल प्रिंसिपल, झालावाड़ मेडिकल कॉलेज

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