खाद्य असुरक्षा / पात्र लोगों के नाम जुड़वाने पर रोक वजह- सूची में है 15 फीसदी से ज्यादा अपात्रों के नाम

Prohibition on adding the names of eligible people - more than 15 percent ineligible names in the list
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Prohibition on adding the names of eligible people - more than 15 percent ineligible names in the list

  • बड़ा सवाल...जिनके गलत नाम जुड़ गए उन पर तो जुर्माना, लेकिन जो जोड़ रहा उसकी जांच तक नहीं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:29 AM IST

झालावाड़. खाद्य सुरक्षा योजना पात्रों के लिए असुरक्षा बन चुकी है। यानी जिन लोगों के नाम खाद्य सुरक्षा योजना में नहीं जुड़ने चाहिए, ऐसे जिले में 15 फीसदी से अधिक लोगों के नाम जुड़ गए हैं। इसका नुकसान यह हो रहा है कि जो पात्र परिवार हैं, वह कतारों में लगे हुए हैं। अपात्रों की अधिक संख्या को देखते हुए सरकार ने खाद्य सुरक्षा योजना में नए नाम जोड़ने पर रोक लगा दी है। इससे उन लोगों को झटका लगा है, जो महीनों से इस योजना में आवेदन कर चुके हैं। यह लोग पात्र होते हुए भी अब कई महीनों तक इस योजना में नहीं जुड पाएंगे। 
दरअसल, खाद्य सुरक्षा योजना में 53 फीसदी शहरी और 69 फीसदी ग्रामीणों को जोड़ा जाना था, लेकिन जिले में हालात यह हो गए कि 80 फीसदी से अधिक लोगों के नाम खाद्य सुरक्षा योजना में जुड़ गए। खाद्य सुरक्षा योजना में जिले में 2 लाख 92 हजार 841 राशन कार्ड जुड़े हुए हैं, जिनमें 12 लाख 30 हजार 251 लोग इसमें जुड़े हुए हैं जो इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ उठा रहे हैं। इतनी बड़ी तदाद में लोगों के नाम जुड़े हुए हैं और इनको गेहूं भी बराबर मिल रहा है। इससे सरकार को हर माह करोड़ों रुपए की चपत लग रही है। इसी को देखते हुए अब अपात्रों के नाम हटाने और उन पर जुर्माने का प्रावधान किया हुआ है।

इसके बाद ही पात्रों के नाम जोड़े जाएंगे। शासन सचिव सिद्धार्थ महाजन ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग को पत्र लिखकर ई-मित्रों के माध्यम से खाद्य सुरक्षा योजना के आवेदन प्रक्रिया को आगामी आदेशों तक बंद करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद शुक्रवार से ई-मित्रों पर खाद्य सुरक्षा के नए आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं। जो पुराने आवेदन लंबित पड़े हैं, उन पर भी रोक लग चुकी है। यानी अब पात्रों को खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जुड़वाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
 सोशल डिस्टेंसिंग का नहीं रखा ध्यान...रसद विभाग में जुर्माना जमा करवाने और नाम हटवाने के लिए दिनभर लगी रही शिक्षकों की भीड़
इधर, रसद विभाग में जिन अपात्र शिक्षकों के नाम भी खाद्य सुरक्षा योजना में जुड़े हुए हैं, उनके नाम हटवाने और उन पर लगे जुर्माने जमा करवाने के लिए दिनभर शिक्षकों की भीड़ लगी रही। इसके चलते यहां सोशल डिस्टेंसिंग की पालना भी नहीं हो पाई। इस योजना में अपात्र शिक्षक सालों से योजना का लाभ उठा रहे थे, लेकिन अब जैसे ही नोटिस मिला है, इनकी दौड़ शुरू हो गई है। किसी पर 50 हजार रुपए तक जुर्माना हुआ है तो किसी पर 60 हजार। इधर, सबसे बड़ी बात यह है कि करीब डेढ़ साल से भवानीमंडी में यह कार्रवाई चल रही थी, लेकिन उस समय भी अपात्र शिक्षकों ने अपने नाम नहीं हटवाए। इसी का नतीजा रहा कि अब उन पर रसद विभाग ने 27 रुपए प्रति किलो गेहूं के हिसाब से जुर्माना लगाया है। 
पढ़िए...नाम जुड़वाने में चला मिलीभगत का खेल, अब कार्रवाई नहीं हो रही 
खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जुड़वाने में पूरी तरह से मिलीभगत का खेल चला है। इसी का नतीजा है कि बड़ी संख्या में अपात्रों के नाम जुड़ते गए। सरकारी कर्मचारी और शिक्षकों के नाम बड़ी तादाद में जुड़ गए। कई सरपंचों के नाम भी इस सूची में हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि विभाग ने जांच अभियान चलाकर शिक्षकों और सरकारी कार्मिकों पर जुर्माना तो कर दिया, लेकिन नाम जोड़ने वालों की अभी तक जांच तक नहीं की। इसमें यह देखा जाना था कि इतनी बड़ी संख्या में खाद्य सुरक्षा में अपात्रों के नाम कैसे जुड़ गए। इसके पीछे जिम्मेदारों तक पहुंचना था, लेकिन विभाग ऐसी जांच नहीं कर रहा है।

इसमें रसद विभाग के कई कार्मिकों की मिलीभगत भी सामने आ सकती है। इसी का नतीजा है कि अपात्रों के नाम जोड़ने वालों तक पहुंचने में विभाग पहल नहीं कर रहा है। जिले में असनावर उपखंड से तो बकानी, झालरापाटन सहित जिले के अन्य क्षेत्रों के लोगों के नाम भी खाद्य सुरक्षा योजना में जुड़ गए। इस मामले में तत्कालीन एसडीएम ने असनावर थाने में मामला भी दर्ज करवा रखा है, लेकिन प्रभारी मंत्री के आदेश के बाद भी अब तक इस मामले की जांच नहीं हो पाई है।
^ खाद्य सुरक्षा योजना में फिलहाल नए नाम जोड़ने पर रोक लगा दी है। अग्रिम आने आने तक यह रोक जारी रहेगी। आलोक झारवाल, डीएसओ

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