डग में छोड़-फाड़ की अनोखी परंपरा:खाल से बनी छोड़ को गाय के सींग से फड़वाया, असुरों पर देवीय शक्ति की मानी जाती है जीत

झालावाड़24 दिन पहले
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गाय के सींग से छोड़ फड़वाता किसान। - Dainik Bhaskar
गाय के सींग से छोड़ फड़वाता किसान।

झालावाड़ जिले के डग क्षेत्र में गोवर्धन पूजा के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में छोड़-फाड़ का अनोखा आयोजन देखने को मिला। यह परंपरा बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर निभाई जाती है। परंपरा के तहत दीपावली के अगले दिन ग्रामीण अंचल में गोवर्धन पूजा के साथ छोड़-फाड़ का आयोजन किया गया। इस दिन समस्त ग्रामवासी और आस-पास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग गांव के बाहर एक बड़े मैदान में एकत्र हुए। यहां किसान अपनी गायों को लेकर पहुंचे। इस दौरान जानवर की खाल से बने छोड़ से गोवंश को आक्रामक किया गया, जिसके बाद गोवंश अपने सींग से छोड़ को फाड़ती है।

जालनी गांव के सरपंच गोविंद सिंह ने बताया ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में छोड़-फाड़ परंपरा प्राचीनकाल से चली आ रही है। इस दिन मरे जानवर की खाल को साफ कर छोड़ बनाया जाता है। जिसे त्रिभुजाकार में एक लकड़ी से बांधा जाता है। महिलाएं गोवर्धन पूजा करने के बाद छोड़ की पूजा करती है। इसके बाद छोड़ और गायों को सजाकर गांव के बाहर मैदान में ले जाया जाता है। यहां मैदान की पूजा के बाद छोड़ व गायों की पूजा होती है। इसके बाद छोड़-फाड़ परंपरा का खेल शुरू होता है।

उन्होंने बताया कि छोड़-फाड़ में गाय के मालिक अपनी गाय के साथ हिस्सा लेते हैं। एक तरफ चमड़े के छोड़ को आग में तपाकर युवक खड़े होते हैं। दूसरी तरफ मालिक अपनी गाय को लेकर आता है और गाय सींगों से खाल से बनी छोड़ को फाड़ती है। इसके लिए एक निर्धारित संख्या में अवसर दिए जाते हैं। इस दौरान सबसे पहले जो गाय छोड़ फाड़ती है वो विजेता होती है। इसे असुरों पर देवीय शक्ति की विजय और गायों की रक्षा के रूप में मनाया जाता है।

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