आज विजयादशमी पर विशेष:इस रावण का नहीं हाेता दहन... झालरापाटन में 181 सालाें से अपने परिजनाें के साथ खड़ा है रावण

झालावाड़2 महीने पहले
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  • 1943 से पहले तक दशहरे के अवसर पर सिर्फ रावण की नाभि में तीर मारकर रंगीन पानी से भरी मटकी फाेड़ी जाती थी, अब पत्थर-मिट्टी से बने रावण दरबार के पास ही रावण, मेघनाद व कुंभकरण के पुतलों का होता है दहन

मनीष यादव | झालरापाटन पिछले 181 सालों से झालरापाटन के मेला मैदान में रावण अपने पूरे परिवार के साथ खड़ा है। हर साल दशहरे पर रंग-रोगन कर रावण सहित उसके पूरे परिवार को संवारा जाता है। संभवताया देश में सिर्फ झालरापाटन में ही पत्थर व मिट्टी से बने रावण व उसके परिजन यूं ही खड़े हैं। दरअसल, 1840 में पूर्व नरेश महाराज राणा मदनसिंह झाला ने झालरापाटन में दशहरा पर्व मनाने की शुरुआत की। तब यहां पत्थर और मिट्टी से रावण सहित मंदोदरी, मेघनाद, कुंभकरण, मारची, खरदूषण का रूप तैयार किया गया। यहां रावण की बहन सूर्पणखा की रक्षा के लिए दो रक्षक भी तैनात हैं।

इस स्थान काे भी रावण दरबार से मिली पहचान

झालरापाटन के मेला मैदान में जिस जगह रावण अपने परिवार के साथ खड़ा है उस स्थान काे रावण दरबार के नाम से जाना जाता है। यहां रावण अपने बाकी परिजनाें के साथ खड़ा नजर आता है, जबकि कुंभकरण साेने की मुद्रा में ही रहता है। पत्थर व मिट्टी से बने रावण व उसके परिजनाें के स्थायी प्रतीक आमजन में आकर्षण का केंद्र भी हैं। फाेटाे: प्रकाशवीर तिवारी

पहले ये थी परंपरा...तब रावण की नाभि में तीर मारकर फाेड़ा जाता था रंग से भरा मटका1943 से पहले यहां हर साल दशहरा पर रावण की नाभि में लाल रंग से भरा एक मटका रखा जाता था। उसमें एक थैली में लाल रंग भरा जाता था। उसी पर एक तीर चलाया जाता था। तीर लगने से जैसे ही थैली फटती ताे रक्त के प्रतीक के रूप में लाल रंग बाहर निकलता था। इस तरह यहां रावण के वध की परंपरा निभाई जाती थी। 1943 के बाद से दशानन के इसी कुनबे के बीच रावण का पुतला खड़ा कर उसका दहन करने की परंपरा शुरू हुई। तब से आज तक नगरपालिका की और से रावण व उसके परिजनाें के पुतले खड़े कर उनका दहन किया जाता है।रंग-रोगन से संवारा जाता है रावण का परिवारपत्थर व मिट्टी से बने रावण व उसके परिवार काे आज भी हर साल रंग रोगन कर संवारा जाता है। इस बार भी लगातार दूसरे साल भले ही रावण दहन का आयाेजन नहीं होगा, लेकिन फिर भी यहां मिट्टी-पत्थर के बने रावण व उसके परिवार का रंग रोगन कर उसे संवारा गया है।

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