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भास्कर आंखों देखी:स्ट्रेचर पर कोरोना मरीजों का इलाज, वार्डों में पसरी गंदगी

झालावाड़16 दिन पहले
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अस्पताल में ऑक्सीजन बेड के अभाव में - Dainik Bhaskar
अस्पताल में ऑक्सीजन बेड के अभाव में
  • जिले का सबसे बड़ा अस्पताल ही बदहाल, इमरजेंसी वार्ड के एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती, बेड नहीं मिलने से मरीज हाे रहे परेशान, तो कोरोना रोगी के पास रहते हैं 5-5 तीमारदार
  • जिंदगी की जंग, एेसे जीतेंगे हम... 1 सिलेंडर से 3 मरीजाें काे दे रहे अाॅक्सीजन

कोरोना मरीजाें के साथ माैताें का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है, वहीं जिले के सबसे बड़े अस्पताल में अव्यवस्थाएं काेराेना मरीजाें का मर्ज और बढ़ा रही हैं। यहां न तो मरीजों को बेड मिल पा रहा है न ही पर्याप्त ऑक्सीजन। हैरत की बात ताे यह है कि काेविड अस्पताल में ही गाइडलाइन की सख्ती से पालना नहीं कराई जा रही है। एक मरीज के पास पांच-पांच लाेग बैठे रहते हैं, लेकिन काेई उन्हें राेकता तक नहीं। ऐसे में और भी लाेगाें में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। काेविड अस्पताल में ही गंदगी पसरी पड़ी है, लेकिन जिम्मेदाराें का उस तरफ ध्यान ही नहीं जा रहा। भास्कर टीम ने रविवार को अस्पताल के हर वार्ड का जायजा लिया ताे स्थिति चाैंकाने वाली मिली।

इमरजेंसी वार्ड : मरीजाें की कतार, बेड तक नहीं मिल रहे इमरजेंसी वार्ड में रविवार को मरीजों की कतारें लगी हुई थी। यहां 25 वार्ड हैं, सभी फुल हैं। यहां भर्ती सभी मरीजों को ऑक्सीजन पर रखा गया है, लेकिन ऑक्सीजन का फ्लो इतना धीमा कि मरीज घबरा रहे हैं। कोविड-19 से भी मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में ही पहुंचाया जा रहा है। इसी के चलते यहां मरीजों की भीड़ कम नहीं हो पा रही है। यहां तक कि एक बेड पर 2 मरीजों को भर्ती कर रखा है। मध्य प्रदेश से आए एक मरीज के परिजन ने बताया कि पिछले 1 घंटे से वह अपनी बारी का इंतजार कर रहा है, लेकिन अभी तक न तो डॉक्टर की सलाह मिल पाई और न ही बेड। कई मरीजों को यहां बेड नहीं होने से नीचे लिटाया गया था। हैरानी की बात ताे यह है कि वार्ड में न डॉक्टर और न नर्सिंगकर्मी पीपीपी किट पहन रहे हैं।

600 से अधिक ऑक्सीजन सिलेंडर की होगी खपत अस्पताल में प्रतिदिन मरीजों की संख्या बढ़ने से ऑक्सीजन सिलेंडरों की डिमांड भी बढ़ती जा रही है। वर्तमान में 600 सिलेंडर ऑक्सीजन की खपत हो रही है। सिया गैस कंपनी की दिन में तीन से चार बार अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की गाड़ी पहुंच रही है। ऑक्सीजन की सप्लाई पर नजर रखने के लिए एसडीएम के नेतृत्व में कमेटी बना रखी है जो हर सिलेंडर की निगरानी कर रही है।

जिम्मेदार बाेले- हालात बेकाबू हाेते जा रहे है

अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने से हालात बेकाबू हो रहे हैं। फिर भी डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ पूरी कोशिश कर रहे हैं। ऑक्सीजन बेड की डिमांड अधिक है, लेकिन मरीज ज्यादा होने से वे कम पड़ रहे हैं। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं। हमें रेमडेसिविर इंजेक्शन की भी जरूरत है, लेकिन रविवार को मिले ही नहीं। ऐसे में ऑक्सीजन के सहारे मरीजों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। - डॉ. संजय पोरवाल, अधीक्षक, जिला एसआरजी अस्पताल

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