डीएपी की किल्लत:मांग का 29% यूरिया, 22% डीएपी ही मौजूद, गेहूं की बुवाई में आएगा संकट

झालावाड़2 महीने पहले
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  • खाद की कमी से जूझ रहा जिला, फिर भी बुवाई शुरू

रबी की बुवाई शुरू हो चुकी है। बारिश का दौर थमते ही किसानों ने बुवाई तो शुरू कर दी, लेकिन अभी यूरिया के संकट से किसानों को जूझना पड़ रहा है। जिaले में जितनी मांग है, उसका केवल 29 फीसदी यूरिया ही हमारे पास है। डीएपी की बात करें तो केवल 22 फीसदी ही मौजूद है। इसके चलते अभी तक किसान गेहूं की बुवाई शुरू नहीं कर पा रहे हैं। सरसों और चने की बुवाई तो शुरू हो चुकी है, लेकिन यूरिया संकट के चलते गेहूं की बुवाई शुरू नहीं हो पाई है।

दरअसल इस साल यूरिया कंपनियों का सरकार से सब्सिडी कम मिलने का विवाद चल रहा है। इसी विवाद का असर यहां खाद की कमीं के रूप में दिखाई दे रहा है। लगातार किसान डीलरों के यहां चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी उन्हें यूरिया नहीं मिल पा रहा है। जिले में अभी 17 हजार 299 एमटी यूरिया उपलब्ध है। जबकि मांग 60 हजार एमटी की है। इसी तरह डीएपी 3172 एमटी है जबकि इसकी मांग 14 हजार 450 एमटी की है। एसएसपी यहां पर मांग से अधिक है, लेकिन किसान उसको अधिक उपयोग में नहीं ले रहे हैं। मांग 25 हजार एमटी है, लेकिन इसके एवज में 32 हजार 785 एमटी मौजूद है। यूरिया की कमी को देखते हुए कृषि विभाग में भी बैठकों का दौर जारी है, लेकिन फिर भी जरूरत के हिसाब से यूरिया नहीं आ पा रहा है। यहां से लगातार यूरिया और डीएपी की मांग की जा रही है।

3 लाख 21 हजार रबी की बुवाई का लक्ष्य है जिले में रबी की फसल का लक्ष्य 3 लाख 21 हजार हैक्टेयर है। इसमें गेहूं की 1 लाख 20 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में पैदावार होगी। चने की 45 हजार, सरसों की 50 हजार, मसूर की 10 हजार, धनियां, लहसुन, मैथी, अश्वगंधा, चारा और सब्जियां 1 लाख हैक्टेयर और जौ की फसल की 3 हजार हैक्टे. में पैदावार होगी।अभी सरसों और चने की शुरू हुई है बुवाईअभी यहां सरसों और चने की बुवाई शुरू हुई है। सरसों 750 हैक्टेयर क्षेत्र और चना 225 हैक्टेयर क्षेत्र में बोया गया है। अन्य फसलों की बुवाई 75 हैक्टेयर क्षेत्र में हुई है। अब किसान गेहूं की फसल की बुवाई शुरू करेंगे, लेकिन अभी यूरिया की कमी के चलते किसान बुवाई से पीछे हट रहे हैं।

यूरिया और डीएपी की कमी के चलते प्रशासन ने रणनीति बनाई है। अब एसएसपी के लिए किसानों को प्रेरित किया जाएगा। जिले में किसानों ने रबी फसल में सरसों की बुवाई शुरू कर दी है। ऐसे में खाद की उपलब्धता को लेकर कलेक्टर हरिमोहन मीना की अध्यक्षता में गुरूवार को मिनी सचिवालय में बैठक आयोजित की गई। इसमें डीएपी की वर्तमान उपलब्धता को देखते हुए सभी को 1 बैग डीएपी के स्थान पर 3 बैग एसएसपी और 1 बैग यूरिया प्रयोग में लिए किसानों को समझाइश करने के लिए निर्देश दिए गए।

डीएपी की तुलना में सिंगल सुपर फास्फेट और एनपीके को विकल्प के तौर पर उपयोग लिया जा सकता हैं। एसएसपी उर्वरक डीएपी की तुलना में सस्ता एवं बाजार में आसानी से उपलब्ध है। विभागीय सलाह अनुसार 1 बैग डीएपी के विकल्प के रूप में 3 बैग एसएसपी एवं 1 बैग यूरिया का प्रयोग किया जाता है, तो इससे भी कम मूल्य पर अधिक नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस तथा अतिरिक्त सल्फर प्राप्त किया जा सकता है।

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