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नई तकनीक:संभाग में पहली बार नई तकनीक का प्रयोग... संतरा के 50 पेड़ों को जड़ से सुरक्षित निकाला और दूसरी जगह लगा दिया

झालावाड़एक महीने पहले
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  • दिल्ली से बुलाए विशेषज्ञ, किसान को पाॅलीहाउस लगाना था, पेड़ों को काटने के बजाय शिफ्ट करा दिया

संभाग में पहली बार संतरा के किसानों ने नई तकनीक का प्रयोग किया है। जहां संतरा का बगीचा लगा हुआ था, वहां पर पॉलीहाउस लगाना था तो इन संतरे के पेड़ों को काटने के बजाय किसान ने उन्हें तकनीक के सहारे पहले जड़ से सुरक्षित निकलवाया और फिर दूसरे स्थान पर शिफ्ट करवा दिया। इससे सभी संतरे सुरक्षित तरीके से दूसरे स्थान पर लग गए।अब इससे किसान की आय कम नहीं होगी। यदि किसान इन संतरे के पेड़ों को काट देता तो किसान की आय खत्म हो जाती। यह तरीका संभाग में पहली बार रामगंजमंडी के किसान कालूलाल लोधवाल ने अपनाया है। उन्होंने अपने बगीचे से 50 पेड़ों को दूसरी जगह शिफ्ट करवाया। इसके लिए उन्होंने दिल्ली की कंपनी से एग्रीमेंट किया। दिल्ली से विशेषज्ञ बुलवाए। प्रति पेड़ इसके बदले 2500 रुपए दिए गए। इसके बाद अब हर पेड़ से उन्हें 3 हजार रुपए की आय हो सकेगी। किसान के यहां 277 संतरे के पेड़ लगे हुए हैं। इससे उन्हें पिछले वर्ष 9 लाख रुपए की आय हुई थी। इसी को लेकर अब वह संतरे के पेड़ों को खत्म नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने यहां तकनीक अपनाई तो उनके पौधे बच गए। अब इससे वह हर साल आय ले सकेंगे।

बगीचे को हमेशा काटने वाले किसानों के लिए अच्छा संदेश दरअसल, झालावाड़ जिले में भी बड़ी संख्या में संतरा किसान दूसरी उपज लेने के लिए अपने बगीचों को हर साल काट रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से उन्हें इसी तकनीक का सहारा लेने का संदेश दिया गया है, ताकि संतरा किसानों को बेहतर लाभ मिल सके। इधर, कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने बताया कि किसान गर्मी के संतरे की जगह सर्दी का संतरा लेना शुरू करें तो अनियमित फसल की परेशानी से भी निजात मिल सकती है। साथ ही बगीचे में खाद और उर्वरक को भूमि जांच के अनुसार डालते रहें। कीट बीमारी नियंत्रण के लिए अप्रैल, अगस्त, दिसंबर माह में स्थानीय जरूरत के हिसाब से दवाइयों का छिड़काव किया जाए। किसान कालूलाल का कहना है कि उन्हें अपने संतरे के पेड़ों की जगह पॉलीहाउस लगाना था, लेकिन संतरे के पेड़ों को भी नष्ट नहीं करना था, क्योंकि यह कमाई का बेहतर साधन हैं। इसी के लिए उद्यान विशेषज्ञ रामराज मीणा से सलाह ली। उन्होंने ही इस तकनीक की जानकारी दी और बाद में इसको अमलीजामा पहनाया। तब जाकर सारे पेड़ बच सके।पॉलिसी में बदलाव की जरूरतउद्यान विभाग में कई बार गैर उद्यानिकी विशेषज्ञों को भी लगाया जाता है, जबकि उद्यानिकी का अनुभव रखने वालों को लगाया जाए तो उद्यान किसानों को खासा फायदा मिल सकेगा।

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