मध्य प्रदेश के मजदूर झालावाड़ में फंसे:काम करवाया लेकिन नहीं दी मजदूरी, खानपुर वन विभाग के अफसर कर रहे बदसलूकी

झालरापाटन11 दिन पहले
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मध्यप्रदेश के 25 मजदूर परिवार झालावाड़ में वन विभाग की लालफीताशाही के शिकार हो गए।मजदूर परिवार यहां आए तो मेहनत मजदूरी कर दो जून रोटी कमाने के लिए थे लेकिन विभाग का चाबुक ऐसा चला कि अब इनकी भूखों मरने जैसी नौबत है और दर-दर भटकने को मजबूर हैं। दरअसल खानपुर वन विभाग का एक ठेकेदार अधिकारियों के कहने पर मध्यप्रदेश के सतना व उमरिया जिले के 25 मजदूर परिवारों को मजदूरी के लिए खानपुर लेकर आया था। करीब 2 माह पहले खानपुर पहुंचे इन परिवारों को अच्छी मजदूरी देने की बात कही गई थी। यहां आने के बाद से वन विभाग ने इनसे जमकर मजदूरी भी करवाई। मजदूरों का कहना है कि विभाग ने 10000 वर्ग फीट के दो प्लाटों पर 20780 गड्ढे खुदवाए,45×45 साइज के गड्ढों की खुदाई व गुडाई के काम में इनकी नियमानुसार 3,54,600 रुपए मजदूरी के बनते हैं। लेकिन वन विभाग अधिकारियों ने काम के दौरान इनको सिर्फ खर्चे के लिए 102000 रुपए दिए हैं। मजदूरों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने शेष मजदूरी के 2,52,600 रुपए मांगे तो खानपुर वन विभाग के डिप्टी ब्रजमोहन,नाकेदार सरफराज,व सुमेर सिंह के अलावा बाबू फरियाद ने गालीगलौज कर अभद्रता की और वर्क साइट से भगा दिया। जिसके बाद वर्क साइट पर अस्थाई रूप से टेंट व झोपड़ी बनाकर रह रहे यह मजदूर परिवार बेघर हो गए और खानपुर से जिला मुख्यालय झालावाड़ आ गए। हाड कंपाती सर्दी में अपने बीवी बच्चों के साथ कुछ दिन इधर उधर भटकने के बाद कुछ मजदूर परिवार तो अपने घरों को लौट गए,लेकिन करीब 6-7 परिवार झालावाड़ के जिला अस्पताल में हाड़ कंपाती सर्दी में अपनी रातें गुजार रहे हैं। अब इन परिवारों ने झालावाड़ जिला कलेक्टर को लिखित में शिकायत देकर मजदूरी दिलवाने व दुर्व्यवहार करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।उधर वन विभाग खानपुर डिप्टी बृजमोहन मीणा का कहना है कि करवाए गए काम का एक भी पैसा भी सरकार से नहीं आया है।पैसा आने के बाद मजदूरों को दे दिया जाएगा।तो ऐसे में सवाल तो यह भी उठता है कि अगर पैसा नहीं आया पहले खर्चे के लिए 10,2000 रूपये कहां से दिए गए थे।

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