ऐसा भी हाेता है:झिरना में बरगद के दो पेड़ों की जड़ों से निकल रहे पानी से पहाड़ी पर तैयार हो रहा है बगीचा

कस्बाथाना8 महीने पहले
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कस्बाथाना. पेड़ की जड़ से पानी निकलने के बाद भरा पानी। यहां गर्मी में भी पानी की कमी नहीं आती। - Dainik Bhaskar
कस्बाथाना. पेड़ की जड़ से पानी निकलने के बाद भरा पानी। यहां गर्मी में भी पानी की कमी नहीं आती।
  • गर्मी के माैसम में सभी जल स्त्राेत सूख जाते हैं, लेकिन बारां के झिरना वाले स्थान पर जलधारा बहती रहती है

अमित मेहता| एक ओर गर्मी शुरू होने के साथ ही लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है, वहीं कस्बे के समीप जंगल में स्थित झिरना वाले स्थान पर पिछले कई सालों से बरगद के दो पेड़ों के नीचे जड़ों से पानी निकल रहा है, जो लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है।क्षेत्र में गर्मी में जलस्तर गिरने से भले ही तालाब, नदी, नाले सूख गए हैं। लोग टैंकरों से पीने का पानी मंगवा रहे हैं, लेकिन कस्बे से करीब 10 किमी दूर जंगल में स्थित झिरना वाले स्थान पर दो बरगद के पेड़ों की जड़ों से निकल रही जलधारा कभी बंद नहीं हाेती है। यह अविरल बहती रहती है। इस पानी का उपयाेग यहां पहुंचने वाले लोग पीने के साथ ही अन्य कामों में कर रहे हैं। यहां रहने वाले संत कल्याणदास त्यागी ने बताया कि वे इस स्थान पर करीब आठ-दस साल से रह रहे हैं। तभी से बरगद के पेड़ की जड़ाें से पानी निकल रहा है। यह कभी बंद नहीं होता है। इससे गर्मी में भी पानी की समस्या नहीं आती है। भीषण गर्मी में आसपास के लोग भी यहीं पानी लेने आते हैंं।

बाबा ने 6300 पौधे मंगवाकर लगाए थे संत त्यागी ने देहरादून से 63 सौ पौधे मंगवाकर जंगल में लगाए थे। इन पौधों में से पांच हजार फलदार पौधे तैयार हो रहे हैं। बरगद की जड़ों से निकलने वाले पानी को गड्‌ढा खोदकर उसमें छोटी मोटर लगाकर पहाड़ी पर चढ़ाते हैं और पेड़-पौधों की सिंचाई करते हैं। आसपास रहने वाले वन्य जीव भी इसी पानी से प्यास बुझाते हैं।झिरना वाले स्थान पर प्राचीन प्रतिमाओं को एक पेड़ के पास रखा हुआ है। इनमें दो प्राचीन शिवलिंग भी हैं। इन प्रतिमाओं पर पेड़ों का मंडप बना हुआ है। इन प्रतिमाओं की देखरेख संत त्यागी करते हैं।

गोमुख से भी निकल रहा है पानी झिरना वाले स्थान पर हजारों वर्ष पुराने पेड़ों से शिवलिंग के ऊपर अाश्रय बना हुआ है। यहां कई किस्माें के सैकड़ों वर्ष पुराने पेड़ हैं। इस स्थल की पश्चिम दिशा में एक पुराना बरगद का पेड़ है, जिसकी जड़ों से भी पानी निकल रहा है। पेड़ के आसपास दीवार बनाकर गोमुख बना रखा है। इसी गोमुख से पानी बाहर निकलता है। यहां शिवलिंग के पास एक छोटा सा कुंड बना हुआ है। इस कुंड में भी ऊपर ही पानी भरा हुआ है। कुंड को हालांकि चारों ओर दीवार से ढंक दिया है, लेकिन इसमें वर्ष भर पानी भरा रहता है।

एक्सपर्ट की राय : भूमिगत जल स्त्रोत में अधिक होने से पेड़ की जड़ के साथ बाहर आ रहा है पानी मैंने भी पूर्व में उस स्थान का कई बार दौरा किया है। कई साल से वहां मीठा पानी निकल रहा है। आसपास के हैंडपंपों में पानी नहीं होने के बावजूद उस स्थान पर पर्याप्त मात्रा में पानी पेड़ के जड़ के सहारे बाहर निकल रहा है। उस स्थान पर गहराई में जल स्त्रोत है, जो अधिक पानी होने और दबाब के चलते पेड़ की जड़ के सहारे स्वच्छ और मीठा पानी बाहर निकल रहा है। जमीन के अंदर जल स्त्रोत है, जो ऊपर के हिस्से से नीचे की ओर बह रहा है। बरगद के पेड़ से जुड़कर पानी आ रहा है। वहां पानी भराव का अच्छा स्थान है। भूमि में बिकर जाेन हो सकता है जिससे अपने आप पानी निकल रहा है। बारिश में रिचार्ज होने के कारण पानी कभी खत्म नहीं होता है। वहां लाइम स्टोन भी अधिक है और जहां लाइम स्टोन होते है वहां गहराई में पानी होने की संभावना बढ़ जाती है। -केएल सुजानिया, वरिष्ठ भू वैज्ञानिक, कोटा

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