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बारिश का इंतजार:पिछले साल थे बाढ़ के हालात, अब बारिश का इंतजार

लाखेरीएक महीने पहले
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  • पिछले साल दस गांव थे बाढ़ग्रस्त, वो इलाके आज बरसात के लिए देवी-देवताओं से मन्नत मांग रहे

प्रकृति का खेल भी निराला है, ठीक एक वर्ष पहले जहां बाढ़ के हालात थे, नदी-नाले उफने थे। दस गांवों के चारों ओर नदियों का पानी पहरेदार बनकर ग्रामीणों को घराें में रहने को मजबूर कर रहा था, वो इलाके आज बरसात के लिए देवी-देवताओं से मन्नत मांग रहे है। इस वर्ष बरसात भी कहीं ठीक हुई तो कहीं तरसा रही है। क्षेत्र में अभी तक अच्छी बरसात का इंतजार है। जलाशयों को पानी की दरकार है, जबकि बीते साल इन दिनों शहर के आसपास गांवों में जलप्लावन के हालात थे। मेज व चंबल नदी अपने पूरे वेग से बह रही थी। मेज नदी के उफान से कोटा-लालसोट मेगा हाईवे दस दिन बंद रहा था। सखावदा, बसवाड़ा, शहणपुर, पाली, कांकरा मेज, करीरिया जलमग्न होने के कगार पर थे। मेज नदी में चंबल के वेग के कारण थाक लगने से बड़ाखेड़ा सहित दो पंचायतों का लाखेरी से संपर्क कट गया था। इस बाढ़ में क्षेत्रीय करीब 100 घर चपेट में आए थे-फसलें चौपट हो गई थी। इसके उलट इन्हीं दिनों क्षेत्र में यूं तो खंडवर्षा हुई है, लेकिन बरसात का खास असर नजर नहीं आता है। मेज नदी में अभी उफान का इंतजार है।सखावदा में चंबल व मेज का हुआ था मिलन: पिछले वर्ष बाढ़ के हालात के बीच सखावदा क्षेत्र में चंबल व मेज का मिलन हुआ था। इस राेमांच को देखने के लिए सखावदा की घाटी पर दिनभर भीड़ लगती थी। मेज नदी शहणपुर के पास चंबल में मिलती है, लेकिन बाढ़ के दौरान चंबल का पानी भांडग्वार के पीछे वाली पहाड़ी की तलहटी तक पहुंच गया था। जिसके चलते चंबल और मेज नदी में अंतर करना मुश्किल था। सभी तरफ पानी ही पानी नजर आता था।

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