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  • Kambleeshwar Mahadev Started To Cry When The Boat In The Chambal Started To Eat, But There Was An Outcry As Soon As The Bundi Rescue Team Arrived Before Keta.

नाव दुखांतिका:चंबल नदी में नाव हिचकोले खाने लगी ताे कमलेश्वर महादेव के जयकारे लगे, लेकिन डूबते ही मच गया हाहाकार, काेटा से पहले पहुंची बूंदी की रेस्क्यू टीम

लाखेरी6 दिन पहले
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  • इस तट पर बूंदी प्रशासन और उस तट पर कोटा प्रशासन बचाव के लिए राहत कार्य चला रहा था
  • इंद्रगढ़ क्षेत्र के पापड़ा गांव की अलका मीणा लापता

लाखेरी मेज नदी की बस दुखांतिका को अभी लोग भूल नहीं पाए कि बुधवार को चाणदाकलां गांव में चंबल के तट पर हुई नाव दुखांतिका ने सभी को सन्न कर दिया। हालांकि घटना कोटा जिले में हुई, लेकिन बूंदी प्रशासन चाक-चौबंद होकर बूंदी जिले की सीमा में चंबल नदी के तट पर पहुंच गया। एक छोर पर बूंदी जिले का पुलिस एवं प्रशासन तो दूसरी ओर कोटा का प्रशासन मौजूद था।चंबल नदी का एक हिस्सा बूंदी के गांव चाणदाकलां में आता है, जबकि दूसरा किनारा कोटा के खातौली की सीमा गोठड़ाकला गांव में है, जहां पर यह घटना हुई है, वह बेजपुर चंबल नदी का घाट कहलाता है। दोनों तरफ चंबल से शवों को निकालना चला। नाव में सवार इंद्रगढ़ के अभयपुर निवासी हनीफ (60) तैरकर निकल चुके थे, जबकि इंद्रगढ़ के पापड़ा गांव निवासी अलका मीणा की तलाश जारी रही। हादसे के ढाई घंटे बाद बूंदी से एसडीआरएफ की टीम ने आकर रेस्क्यू शुरू किया। इससे पहले ग्रामीण ट्यूब, सेहरा व रस्सी लेकर दौड़ पड़े। चाणदा के ग्रामीण युवक ट्यूब के सहारे दूसरी ओर पहुंचे। चीख-पुकार के बीच प्रयास करके कुछ लोगों को बचा लिया। कुछ को जिंदा नहीं निकाल पाए।नाव जब हिचकोले खाने लगी, तब कमलेश्वर महादेव के जयकारे जरूर लगे, लेकिन जयकारे के थोड़ी देर बाद नाव डूबने लगी तो हाहाकार मच गया। कुछ लोग तैरकर आ गए तो कुछ को लोगों ने बचा लिया। घटनास्थल की ओर सायरन बजाती एंबुलेंस, पुलिस व प्रशासन की गाड़ियां गांवों से गुजरती रही। हादसा नदी की दूसरी तरह हुआ। इसके चलते चाणदा की ओर रेस्क्यू नहीं हुआ। कलेक्टर आशीष गुप्ता, एसपी शिवराज मीणा, एसडीएम प्रमोदकुमार, लाखेरी डीएसपी घनश्याम वर्मा, इंद्रगढ़ तहसीलदार नरेंद्रसिंह व थानाप्रभारी राजेश मीणा पुलिसकर्मी नजर जमाए हुए थे। इंद्रगढ़-लाखेरी-आसपास से अस्पतालों से मेडिकल टीमें व थानों का जाब्ता मौजूद रहा।

इसलिए जान जोखिम में डालते हैं ग्रामीणबूंदी/नमानारोड. आवागमन के साधनों का भले ही विकास हो गया है, लेकिन आज भी एक से दूसरे गांव में जाने के लिए नावों का ही सहारा लिया जाता है। हैरत की बात यह है कि जान जोखिम में डालकर लोग ट्यूबों का भी सहारा लेने से भी नहीं चूकते। बूंदी विधानसभा क्षेत्र के बरुंधन पंचायत क्षेत्र के नावघटा नदी पार बैरवा का झोपड़ा व बरुंधन गांव के बीच घोड़ा पछाड़ नदी पर पुलिया नहीं बनने के कारण ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करना मजबूरी बनी हुई है। इसके कारण दुर्घटना हो चुकी है। लोगों की पानी में डूबने से मौत हो चुकी है। नावघटा बैरवा का झोपड़ा निवासी वार्डपंच घनश्याम बैरवा व शंकरलाल बैरवा ने बताया कि नदी पर पुलिया नहीं होने के कारण स्कूली बच्चों-ग्रामवासियों को बरुंधन गांव में आने जाने के लिए नाव में बैठकर 25 फीट गहरी एवं 300 फुट लंबी नदी को पार कर आना-जाना पड़ता है। चुनाव के समय जनप्रतिनिधि वोट मांगते समय पुलिया बनाने का आश्वासन देते हैं, लेकिन पुलिया नहीं बनाई। पिछले दिनों ग्रामीणों ने एक माह तक आंदोलन किया था, जिसे राज्यमंत्री अशोक चांदना ने आश्वासन देकर समाप्त करवाया था। पीडब्ल्यूडी की ओर से पुलिया निर्माण के प्रस्ताव बनाकर भिजवाने के अलावा काेई काम नहीं हुआ।

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