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खामियां:शिल्ट व मलबे की निकासी नहीं होने से मेज नदी पर एनीकट के अस्तित्व को खतरा

लाखेरी13 दिन पहले
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  • बरसात की सिल्ट व मिट्टी की नहीं हो पा रही निकासी, एनीकट की अपस्ट्रीम पर भरने लगी मिट्टी व शिल्ट, भराव क्षमता हो रही प्रभावित

शहर की पेयजल समस्या के स्थाई समाधान के लिए मेज नदी पर एनीकट बनाने के समय खामियां छोड़ दी गई, जिसके चलते एनीकट के अस्तित्व को खतरा होने लगा है। अब इसमें पानी की जगह मिट्टी व मलबा मिलेगा। बरसाती पानी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी व मलबे की उचित निकासी नहीं होने से अपस्ट्रीम में धीरे-धीरे मिट्टी जमा होने लगी है। इससे एनीकट की भराव क्षमता प्रभावित हो रही है। एनीकट निर्माण के समय इसके एक छोर पर मोशन वाले स्लूगेट लगाने थे, जाे ठेकेदार फर्म ने नहीं लगाए। इसके चलते नदी में पानी के साथ आने वाली मिट्टी अपस्ट्रीम की तरफ जमा हो रही है। अब पानी के साथ आने वाली शील्ट, मिट्टी व अपशिष्ट जमा होने लगेंगे। इससे एनीकट की वास्तविक भराव क्षमता काफी कम हो जाएगी। इसका असर एनीकट की उपयोगिता के साथ शहर की पेयजल सप्लाई पर नजर आएगा।

विदित रहे, लाखेरी की पेयजल समस्या के स्थाई समाधान के लिए सरकार ने चार करोड़ की लागत से मेज नदी पर 7 मीटर लंबा व डेढ़ मीटर ऊंचाई वाला एनीकट जलसंसाधन विभाग से बनवाया था। एनीकट में 64 एमसीएफटी पानी की भराव क्षमता मानी गई थी। लगभग 22 किमी तक पानी के ठहराव का अनुमान लगाया था। एनीकट बनाने से शहर की जलसमस्या का समाधान हो पाया है। जलदाय विभाग 3240 किलोलीटर पानी का उत्पादन कर शहर में सप्लाई कर रहा है। एनीकट शहर के लिए उपयोगी है, वहीं पानी का ठहराव नदी के आसपास के गांवों के लिए वरदान बन गया है। लिफ्ट द्वारा पानी का उपयोग सिंचाई के लिए हो रहा है। इससे आसपास का भूमिगत जलस्तर रिचार्ज होता है।

स्लो मोशन वाले स्लू गेट लगने थे एनीकट पर
एनीकट निर्माण के समय नदी में बहकर आने वाली मिट्टी व अपशिष्ट पदार्थो की निकासी के लिए यहां मंदिर की तरफ स्लो मोशन वाले दो स्लू गेट लगाने थे। इन गेट को जरूरत के हिसाब से ऊपर नीचे करके पानी की निकासी की जा सकती थी। मानसून सीजन में गेट को पूरे खोलकर पानी की निकासी की जा सकती थी। इससे अपस्ट्रीम की तरफ जमा होने वाली मिट्टी पानी के साथ बह जाती। स्लू गेट नहीं लगाने से पानी की निकासी नहीं हो रही और अपस्ट्रीम की तरफ जमा सिल्ट बह पा रही है।

गेट की जगह फंसी पड़ी है लोहे की प्लेटें
एनीकट पर जिस जगह स्लू गेट लगने थे, वहां पहले से लगी हुई लोहे की प्लेटें फंसी हुई है। एनीकट निर्माणकर्ता एजेंसी को इन प्लेट को निकालकर स्लू गेट लगाने थे। प्लेट फंसी होने से पानी तो रिसकर बहता रहता है, लेकिन अपस्ट्रीम की तरफ जमा मिट्टी वहीं जमी रह जाती है। एनीकट निर्माण से पहले जलदाय विभाग लोहे की प्लेट लगाकर नदी का पानी रोककर सप्लाई के लिए पानी का ठहराव करता था। बरसाती दिनों में प्लेट को ऊंचा करके पानी छाेड़ने से मिट्टी-मलबा पानी के साथ बह जाता था। इस जोखिमभरे काम में एनीकट पर तकनीकी रूप से स्लूगेट लगाना जरूरी था।इंजीनियराें से चर्चा करने के साथ समस्या का समाधान का प्रयास करेंगे। कोशिश करेंगे कि एनीकट पर तकनीकी के हिसाब से गेट लगाए जाए, ताकि एनीकट की उपयोगिता बरकरार रहे।
-प्रमोदकुमार, एसडीएम
^एनीकट पर स्लूगेट लगाने के लिए कई बार पत्र लिखे गए हैं। एनीकट पर स्लूगेट लगने से मिट्टी व शिल्ट बहकर निकल सकती है अाैर इसकी भराव क्षमता बनी रहेगी।
-नंदकुमार, एईएन, जलदाय विभाग

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