शर्मनाक:मनोहरथाना सीएचसी पर प्रसूता रातभर तड़पती रही, नर्स अपने कक्ष में सोती रही, सुबह बच्चे-मां की मौत, परिजनों का हंगामा

मनोहरथानाएक वर्ष पहले
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मनोहरथाना. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह प्रसव हुआ तो पहले बच्चे की मौत हो गई और एक घंटे बाद ही मां की भी मौत हो गई। - Dainik Bhaskar
मनोहरथाना. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह प्रसव हुआ तो पहले बच्चे की मौत हो गई और एक घंटे बाद ही मां की भी मौत हो गई।
  • अस्पताल प्रशासन की लापरवाही,बच्चे की मौत के बाद मां को रैफर करने लगे तो समय पर एंबुलेंस भी नहीं मिली
  • नवजात शिशु और मां की मौत के गम में बेसुध घर वाले, गुस्सा भी भड़का

कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गुरुवार रात को भर्ती हुई गर्भवती महिला रात भर दर्द से तड़पती रही, लेकिन अपने कक्ष में सो रही ड्यूटी नर्स उसे देखने तक नहीं आई। सुबह प्रसव हुआ तो पहले बच्चे की मौत हो गई और एक घंटे बाद ही मां की भी मौत हो गई। इस पर गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दी है। ग्राम पंचायत पिंडोला के गुहाड़ी गांव निवासी नारायणसिंह ने बताया कि उसकी पत्नी ललताबाई के प्रसव पीड़ा होने पर गुरुवार रात 10 बजे मनोहरथाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर आए थे। यहां जांच करने पर नर्स ने बताया कि उसका प्रसव सुबह तक होगा। इसके बाद वह जाकर अपने कक्ष में सो गई। बाद में गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने और उसकी तड़प देख नर्स को बुलाने गए, लेकिन वह एक बार भी नहीं आई। बच्चे का जन्म हो गया, तब जाकर नर्स आई, लेकिन 20 मिनट बाद ही बच्चे की मौत हो गई। उधर, प्रसूता की हालत भी गंभीर होती जा रही थी। उसे रैफर करना चाहा तो एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन वह भी नहीं मिली। परिजनों को निजी साधन से प्रसूता को ले जाने नहीं दिया। नतीजा हुआ कि एक घंटे बाद ही प्रसूता की भी मौत हो गई। इससे परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। मौके पर बड़ी संख्या में भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों से समझाइश कर मामला शांत किया।

एंबुलेंस नहीं मिली तो परिजन निजी वाहन से ले जाने लगे तो अस्पताल ने मना कर दिया

परिजनों ने बताया कि बच्चे की मौत के बाद मां की हालत गंभीर होने पर उसे रैफर किया जाना था, इसके लिए एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन स्थानीय एंबुलेंस पहले ही किसी एक्सीडेंट केस को छोड़ने झालावाड़ गई थी। इधर, परिजन निजी वाहन से ले जाने की बात कहने लगे तो अस्पताल प्रशासन ने मना कर दिया।

ऐसे में बारां जिले के हरनावदाशाहजी की एंबुलेंस को बुलाया गया, लेकिन जब तक वह मौके पर पहुंची, प्रसूता ने दम तोड़ दिया।
नर्स रात को एक बार देख लेती तो दोनों बच जाते: प्रसूता और उसके बच्चे की मौत पर परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। परिजन बोले कि पहले नर्स ने संभाला नहीं। अगर समय रहते देख लेते और रैफर कर देते तो शायद दोनों बच जाते।

मनोहरथाना अस्पताल में एक महीने में यह दूसरा हादसा: मनोहरथाना अस्पताल में यह दूसरा हादसा है, जब नवजात शिशु की जन्म के बाद मौत हो गई। हालांकि इस बार तो प्रसूता की भी मौत हो गई। इससे पहले भी एक प्रसूता के बच्चे की मौत हो चुकी है। इस पर भी परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया था।

परिजनों का आरोप निराधार
^इलाज में लापरवाही का परिजनों का आरोप निराधार है। परिजन रात 10 बजे नहीं, देर रात 2:30 बजे प्रसूता को अस्पताल लाए, जिसके बाद सुबह 4 बजे प्रसव पीड़ा पर महिला का डॉक्टर की देखरेख में प्रसव कराया गया था, लेकिन प्रसूता व बच्चे को बचा नहीं सके। इलाज में कोई कमी नहीं रखी। दोनों की मौत का मुझे भी दुख है।
पूजा प्रजापति, नर्स, सीएचसी, मनोहरथाना

शिकायत कलेक्टर व सीएमएचओ को भेज दी
^ सीएचसी में प्रसूता व बच्चे की मौत के मामले में परिजनों ने रिपोर्ट दी है। हमें जांच का अधिकार नहीं है। ऐसे में शिकायत कलेक्टर व सीएमएचओ को भेज दी है। वही इस मामले में संज्ञान लेंगे।
अजीत मेघवंशी, सीआई

परिजनों का इलाज में लापरवाही का आरोप गलत
^ परिजनों का इलाज में लापरवाही का आरोप गलत है। महिला का प्रसव समय पर हुआ है और बच्चा मृत पैदा हुआ था, इसी के कारण प्रसूता की भी हालत बिगड़ी है। प्रसूता अपने साथ पहले जो जांचें हुई, उसकी रिपोर्ट भी नहीं लाई थी, इससे जटिल प्रसव केस भी जानकारी नहीं थी। फिर भी मामले से सीएमएचओ को अवगत करा दिया है। उनके द्वारा जो भी दिशा निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
सत्येंद्र मीणा, बीसीएमओ, मनोहरथाना

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