बारिश में टूटी सड़कें आपदा हैं:इन पर 111 करोड़ खर्च भी किए गए लेकिन कोरोना से 3200 महिलाओं की माैत आपदा नहीं?

कोटा21 दिन पहले
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और इधर प्रदेश में महिलाओं की मौत से कई परिवार बिखरे, टूटे, कर्ज में डूब गए, कोई सहायता नहीं मिली। - Dainik Bhaskar
और इधर प्रदेश में महिलाओं की मौत से कई परिवार बिखरे, टूटे, कर्ज में डूब गए, कोई सहायता नहीं मिली।

आटा चक्की लगा परिवार पाल रही थी विधवा मां, वह सहारा भी छिना
कोटा के लखावा राेड निवासी कशिश और अज्ञ के पिता की 2016 में हार्ट अटैक से म़ृत्यु हाे गई थी। पत्नी चेतना ने परिवार चलाने के लिए घर में ही आटा चक्की शुरू की। सब ठीक था लेकिन 29 अप्रेल को काेराेना ने चेतना की भी जान ले ली। अब बच्चे मामा और नाना-नानी के भरोसे हैं। सरकार की तरफ से न महिला की मौत पर कोई मुआवजा मिला और न ही अनाथ बच्चों के लिए मिलने वाली सहायता की गई।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को कोरोना ने, पति को उनके गम ने छीन लिया
​​​​​​​जिले के कुंडी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दाखाबाई की कोरोना से मृत्यु हो गई। सारे दायित्व उन पर ही थे। वह कोरोना काल में लगातार सर्वे कर रही थीं। 4 मई को जिला अस्पताल बारां में कोरोना के उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। उनके गम में मजदूर पिता भी 20 अगस्त को नहीं रहे। बेटा 8 महीने से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। कर्ज भी हो गया लेकिन कोई सहायता राशि नहीं मिली।

मां की मौत से बिखरा परिवार, दादा-दादी के भरोसे दो मासूम
शहर की गुरुनानक कॉलोनी निवासी रेखा नामा की मौत से पूरा परिवार टूट गया। पति पारस नामा की मौत के बाद रेखा नामा आशा सहयोगिनी के पद पर कार्य करती हुई जैसे-तैसे अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही थीं, लेकिन लगातार काम करने के बाद 9 जून 2021 को रेखा नामा की कोरोना से मौत हो गई। 14 साल की सुकृति व 16 साल का वैभव अकेले रह गए। दोनों बच्चों की दादा-दादी परवरिश कर रहे हैं।

पिता नहीं थे, स्वच्छता सुपरवाइजर मां का सहारा भी दो मासूमों से छिना
शहर के वसुंधरा विहार निवासी मंजुलाबेन पाटीदार के पति की करीब 10 साल पूर्व स्टोव फटने से मौत हो गई। हाल ही 5 जनवरी को कोरोना संक्रमण के चलते मंजुलाबेन की भी मौत हो गई। अब उसके 12 और 9 वर्षीय दो पुत्र अनाथ हो चुके हैं। मंजुलाबेन स्वच्छता परियोजना में सुपरवाइजर थीं। अभी यह तय नहीं हुआ है कि अनाथ बच्चे किसके पास रहेंगे। सरकार से भी कोई सहायता नहीं मिली।

नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़: सरकार जानबूझकर राज्य में महिला की मौत पर मुआवजा नहीं दे रही है।

सांसद दीया कुमारी: महिला मुखिया के सम्मान का ढोंग करने वाली सरकार की पोल खुल चुकी है।

सीएम गहलोत: कोरोना से पीड़ित हर व्यक्ति की मदद के लिए तैयार हैं। इस मामले काे भी दिखवाएंगे।

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