आंखों पर संकट:डेढ़ साल में प्रदेश में नहीं हाे पाए 2 लाख ऑपरेशन, नतीजा- 10 हजार के तो माेतियाबिंद पक गए

काेटा2 महीने पहलेलेखक: आशीष जैन
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काेविड के कारण डेढ़ साल से प्रदेश में नेत्र चिकित्सा शिविर नहीं हाे रहे। - Dainik Bhaskar
काेविड के कारण डेढ़ साल से प्रदेश में नेत्र चिकित्सा शिविर नहीं हाे रहे।

काेविड के कारण डेढ़ साल से प्रदेश में नेत्र चिकित्सा शिविर नहीं हाे रहे। नतीजा यह हुआ कि राज्य में करीब दाे लाख ऑपरेशन नहीं हाे पाए। अब इन मरीजाें की आंखाें में कई तरह की जटिलताएं सामने आ रही है। करीब 10 हजार लाेगाें के माेतियाबिंद पक चुके हैं और इनमें से 500 से ज्यादा मरीजाें में काला पानी की समस्या दिख रही है।

यानी इनकी आंखाें की राेशनी प्रभावित हाे चुकी है। भास्कर ने पूरे राज्य के सरकारी आंकड़े खंगाले और अलग-अलग शहराें के आई सर्जन्स से बात की ताे यह तस्वीर सामने आई। डाॅक्टराें ने कहा बैकलाॅग तेजी से पूरा नहीं हुआ ताे भयावह स्थितियां सामने आएगी, क्याेंकि अब पके हुए माेतियाबिंद के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। राज्य में नेत्र शिविराें में हर साल करीब 3 लाख ऑपरेशन हाेते थे, लेकिन बीते डेढ़ साल में मात्र 1.44 लाख ऑपरेशन हाे पाए हैं। इनमें भी बड़ी तादाद में मरीज खुद सर्जरी कराने आए हैं। पूरे डेढ़ साल में कुछ दिन ही कैंप हुए थे।

  • नेत्र सर्जन बाेले- यदि गंभीरता से नहीं लिया ताे आने वाले दिनाें में काला पानी के मरीजाें की संख्या बढ़ेगी, काेविड के कारण बंद थे नेत्र चिकित्सा शिविर

एक्सपर्ट बोले-सरकारी तंत्र लगातार कैंप लगाकर जल्द बैकलॉग पूरा करे

प्रदेश के दर्जनभर डाॅक्टराें से लिया इनपुट :

आई कैंपाें में सर्वाधिक सर्जरी करने वाले सर्जन्स में शुमार काेटा के डाॅ. सुधीर गुप्ता से भास्कर ने बात की ताे उन्हाेंने पूरे राज्य में दर्जनभर प्रमुख चिकित्सकाें से चर्चा की। सभी जगह से मिले इनपुट के आधार पर उन्हाेंने बताया कि स्टेट में इस साल की शुरुआत से ही पके हुए माेतियाबिंद व काला पानी के मरीजाें की संख्या बढ़ी है। करीब 10 हजार मरीजाें का माेतियाबिंद पक गया। इसी तरह काला पानी के भी हर संभाग स्तर पर 50 से 100 केस आ चुके हैं। सरकारी तंत्र इसे चैलेंज के रूप में ले और कैंप लगाकर जल्द बैकलॉग पूरा करे।

अभियान के लिए सभी सीएमएचओ काे दिए निर्देश, कैंपाें लगाने के लिए केंद्र से मांगी गाइडलाइन : डाॅ. पारीक

ज्वाॅइंट डायरेक्टर (अंधता) डाॅ. दिनेश पारीक ने माना कि बैकलाॅग बढ़ गया हैं। हमने कैंप शुरू करने के लिए केंद्र से गाइडलाइन मांगी है। हमने सभी अधिकृत हाॅस्पिटलाें या सरकारी हाॅस्पिटलाें काे सर्जरी करने की परमिशन दी हुई है। सभी सीएमएचओ काे निर्देशित किया है कि वे आशाओं के जरिए सर्वे कराएं और ऑपरेशन याेग्य मरीजाें काे सूचीबद्ध कराएं।

जयपुर और उदयपुर में बढ़े ऐसे मरीज

एसएमएस के सीनियर प्राेफेसर डाॅ. जेके चाैहान ने कहा कि आने वाले दिनाें में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ेगी। आरएनटी मेडिकल काॅलेज उदयपुर के नेत्र राेग विभाग एचओडी डाॅ. विनय गुप्ता ने कहा कि पहले बिखरे हुए माेतियाबिंद के साथ काला पानी के माह में 4-5 मरीज आते थे, अब 10 से 12 आते हैं।

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