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  • 245 Patients Arrived In 3 Days; Doctors Advice Do Not Take The Corona Lightly, Because 30% Of The People With Lameness Become Weak After Recovery.

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नहीं थम रहा कोरोना:3 दिन में 245 रोगी आए; डॉक्टरों की सलाह- कोरोना को हल्के में न लें, क्योंकि रिकवर होने के बाद 30% लोगों के लंग्स कमजोर हो गए

काेटाएक महीने पहले
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लापरवाही बढ़ने के साथ ही काेराेना का प्रकाेप बढ़ता जा रहा है। पिछले तीन दिनाें में काेराेना के 245 नए मरीज मिले हैं। मंगलवार काे 61 नए मरीज आए, वहीं साेमवार काे 86 और रविवार काे 98 मरीज आए थे। इससे पहले के तीन दिनाें में यानी कि 25, 26 और 27 मार्च काे 283 मरीज आए थे।

अभी मार्च खत्म हाेने में एक दिन शेष है, लेकिन काेराेना के मरीजाें का आंकड़ा 1231 पहुंच गया है। मार्च में जिस तेजी से काेराेना ने पैर पसारे हैं, यह चिंताजनक है। चिकित्सा विभाग खुद मान रहा है कि इसी तरह से बढ़ता रहा ताे स्थिति पिछले साल से भी भयावह हाे सकती है।

इसके विपरीत लाेग मास्क और साेशल डिस्टेंसिंग की पालना बहुत कम कर रहे हैं। हाेली पर भी लाेगाें ने भले ही रंग और पानी से हाेली नहीं खेली, लेकिन गुलाल का टीका लगाने के बहाने एक-दूसरे के संपर्क में अाए। लाेगाें ने एक-दूसरे के रंग-गुलाल लगाकर हाेली खेली।

बेड बढ़ाने के लिए आज हाेगी मीटिंग
जिस तेजी से काेराेना पाॅजिटिव मरीज आ रहे हैं, उसकाे लेकर मेडिकल काॅलेज प्रशासन भी चिंतित है। मंगलवार काे एक्टिव केस 666 थे, जबकि 76 मरीजाें काे डिस्चार्ज किया जा चुका था। मेडिकल कालेज प्रिंसिपल डाॅ. विजय सरदाना ने बुधवार काे नए अस्पताल के अधीक्षक डाॅ. सीएस सुशील, सुपरस्पेशिलियटी विंग के अधीक्षक डाॅ. नीलेश जैन तथा मेडिसिन, एनेस्थिसिया विभागाें के एचओडी की एक मीटिंग बुलाई है। जिसमें माैजूदा बेड की क्षमता और बढ़ते मरीजाें के ट्रेंड पर चर्चा कर मरीजाें काे भर्ती करने के लिए बेड बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।

इस साल 3 माह में 2862 रोगी, इनमें से 43% मरीज पिछले 30 दिनों में मिले

पिछले वर्ष काेटा में पहला केस 5 अप्रैल काे आया था। अप्रैल में 197 केस आए थे और 8 लाेगाें की माैत हाे गई थी। जुलाई तक 1008 केस आए थे। इस साल तीन माह में ही 2862 केस आ चुके हैं। इनमें से 1231 मामले ताे मार्च के 30 दिनाें में ही आए हैं।

हालांकि एक सुखद पहलू ये है कि पिछले साल अप्रैल से जुलाई के बीच 36 लाेगाें की माैत हुई थी, जबकि इस साल तीन महीने के दाैरान एक भी माैत नहीं हुई है। नए अस्पताल में एक मरीज की माैत जरूर हुई, लेकिन वाे दूसरे जिले का था।

रिसर्च : कोरोना से उबरे 23 प्रतिशत मरीजों के फेफड़ों में फाइब्रोसिस की शिकायत, 7 फीसदी की श्वास नली में समस्या

काेविड काे हल्के में ले रहे लाेगाें काे यह खबर पढ़ लेनी चाहिए। मेडिकल काॅलेज के मेडिसिन विभाग के डाॅक्टराें ने पाेस्ट काेविड मरीजाें पर रिसर्च की है, जिसमें सामने आया कि रिकवर हाे चुके 30 फीसदी मरीजाें के फेफड़े कमजाेर हाे गए हैं और श्वास नली में अवराेध पैदा हाे गए हैं।

अब इन मरीजाें काे दूसरी बीमारियाें का खतरा भी आम लाेगाें से ज्यादा है। ये वे मरीज हैं, जिन्हें काेविड से रिकवर हुए 4 से 5 माह बीत चुके। मेडिसिन विभाग के प्राेफेसर डाॅ. मनाेज सालूजा के निर्देशन में रेजीडेंट डाॅ. दिलीप मीणा और डाॅ. गाैरव ने यह रिसर्च की है। रिसर्च में 166 लाेगाें काे शामिल किया गया। इनमें 71 मरीज वे हैं, जाे काेविड की वजह से हाॅस्पिटल में एडमिट रहे। जबकि 95 ऐसे हैं, जाे हाेम आइसाेलेशन में रहे थे।

डाॅ. सालूजा के मुताबिक, काेविड के साइड इफेक्ट लंबे समय तक रह सकते हैं और कई मरीजाें में ताउम्र इस बीमारी के काॅम्पलिकेशन हाे सकते हैं। इसीलिए हमने यह रिसर्च की।

कार्य क्षमता हुई प्रभावित, थाेड़ी देर में ही हांफने लगते हैं
डॉ. सलूजा के मुताबिक, इस अध्ययन में शामिल 23 प्रतिशत मरीजों में लंग्स के एल्व्यूलाई में सिकुड़न का पता चला है। यह वह जगह है, जाे लंग्स में एयर स्पेस हाेती है। इस जगह पर फाइब्रोसिस बन गए, जिससे इनकी ऑक्सीजन भरने की क्षमता कम हो गई है। दूसरी तरफ 7 प्रतिशत मरीजाें की श्वास नली में अवरोध पैदा हो गए हैं, जिससे मरीजाें में कार्बन डाइऑक्साइड गैस को बाहर निकालने में समस्या आ रही है।

ये मरीज ज्यादा चलने-फिरने पर हांफने लगते हैं, इनकी कार्यक्षमता पर इसका बहुत बुरा असर आया है। रिसर्च में शामिल 166 मरीजों में 109 पुरुष और 57 महिलाएं थी, इनकी उम्र 20 से 80 साल तक थी।

सिक्स मिनट वॉक टेस्ट में पास मरीजों पर हुई रिसर्च : रिसर्च के लिए उन्हीं मरीजाें काे शामिल किया गया, जाे सिक्स मिनट वाॅक टेस्ट में फिट पाए गए। इसमेंं किसी व्यक्ति काे 6 मिनट के लिए चलाया जाता है और उसके बाद उसका एसपीओ 2 मापा जाता है, यदि वह नाॅर्मल आता है ताे उसे फिट माना जाता है और यदि कम मिलता है ताे उसे अनफिट माना जाता है। स्माेकर, हार्ट या फेफड़े की बीमारी के शिकार लाेगाें काे भी रिसर्च से बाहर रखा गया।

आज 111 साइट पर वैक्सीनेशन

सीएमएचओ डॉ. भूपेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि बुधवार 31 मार्च को जिले में 55 शहरी व 56 ग्रामीण काे मिलाकर 111 साइट्स पर कोविड वैक्सीनेशन सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें 21 प्राईवेट अस्पताल व शेष 90 सरकारी साइट्स शामिल हैं।

2450 लाभार्थियों को लगी पहली डोज

मंगलवार को जिले में 112 साइट पर आयोजित सेशन में 2450 लाभार्थी कोविड वैक्सीन की पहली डोज लगवाने पहुंचे। वहीं 698 ने दूसरी डोज लगवाई। सीएमएचओ डॉ. भूपेन्द्र सिंह तंवर ने बताया कि पहली डोज लगवाने वालों में 60 वर्ष से अधिक आयु के 2117, गंभीर बीमारियों से ग्रसित 45 से 59 वर्ष आयु वर्ग के 277 व्यक्ति और 20 छूटे हेल्थ वर्कर्स व 36 फ्रंटलाइन वर्कर्स शामिल रहे।

वहीं, दूसरी डोज 60 वर्ष से अधिक के 550 वरिष्ठ नागरिकाें, 45 से 59 वर्ष आयु वर्ग के गंभीर बीमारी वाले 25 व्यक्तियाें, 47 हेल्थ वर्कर्स व 76 फ्रंटलाइन वर्कर्स ने लगवाई।

दरगाह कमेटी चेयरमैन अमीन पठान ने लगवाई कोरोना वैक्सीन : दरगाह कमेटी, दरगाह ख्वाजा साहब अजमेर चेयरमैन एवं राजस्थान क्रिकेट संघ के उपाध्यक्ष अमीन पठान ने मंगलवार काे वैक्सीन की पहली डोज लगवाई।

दावा- पहली बार इतने पाेस्ट काेविड मरीजाें पर हुआ रिसर्च : डाॅ. सालूजा का दावा है कि पहली बार इतनी बड़ी संख्या में पोस्ट कोविड मरीजों पर अध्ययन किया गया है। रिसर्च पेपर जल्द प्रकाशन के लिए भेजा जाएगा।

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