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हारने लगा कोरोना:600 में से 300 रह गए भर्ती मरीज, ऑक्सीजन की खपत 2000 से घटकर 1000 सिलेंडर पहुंची

काेटा20 दिन पहले
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  • लेकिन विशेषज्ञों की सलाह-अब भी पूरी सावधानी बरतें, नहीं तो फिर बिगड़ जाएंगे हालात
  • 20 दिन बाद संकट से राहत
  • 69 नए रोगी : ठीक दो माह बाद नए मरीजों का आंकड़ा 100 से कम

काेविड की सैकंड वेव की पीक अब उतार पर है। शनिवार को मात्र 69 नए रोगी आए। ऐसा ठीक दो माह बाद हुआ है, जब 100 से कम मरीज आए हों। अप्रैल और मई का माह सबसे खतरनाक साबित हुआ है। मई माह खत्म हाेने काे है, लेकिन इसी माह में शहर ने दाे तस्वीरें देखी, पहली-काेविड हाॅस्पिटल में फर्श पर ऑक्सीजन के अभाव में तड़पते राेगी और अब दूसरी-अस्पतालाें में खाली पड़े वार्ड।

अस्पताल का यह खालीपन बीते दाे माह से रात-दिन ड्यूटियां कर रहे डाॅक्टराें और नर्सिंगकर्मियाें काे भी खासा सुकून दे रहा है। 20 दिन के अंतराल में ही काेविड हाॅस्पिटल में भर्ती मरीजाें की संख्या में 50 फीसदी गिरावट आई है। इस माह 7 मई काे 608 मरीज एडमिट थे, जाे 28 मई काे घटकर 309 रह गए हैं। अब आसानी से जनरल बेड, ऑक्सीजन बेड, वेंटीलेटर बेड मिल रहे हैं। जबकि 20 दिन पहले स्थिति यह थी कि सामान्य बेड तक नहीं मिल पा रहा था। नए अस्पताल के अधीक्षक डाॅ. सीएस सुशील अाैर एसएसबी के अधीक्षक डाॅ. नीलेश जैन के मुताबिक, भर्ती मरीजाें के लिहाज से अब स्थिति नियंत्रण में है। आईसीयू बेड की समस्या भी अब 60 नए बेड क्रिएट करने से खत्म हाे गई है।

मौतें घटना भी जरूरी : सात ने दम तोड़ा, सरकारी रिकॉर्ड में 4 ही बताए

कोटा में शनिवार को मात्र 69 नए कोरोना पॉजिटिव मरीज आए। ऐसा ठीक दो माह बाद हुआ है, जब 100 से कम नए मरीज आए हैं। इससे पहले 100 से कम रोगी 30 मार्च को आए थे, उस दिन 61 केस रिपोर्ट हुए थे, लेकिन उसके बाद से लगातार आंकड़ा 100 से ऊपर और बीच में तो एक हजार से भी ज्यादा पहुंच गया था। बीते 24 घंटे में 2298 सैंपल टेस्ट किए गए थे, इनमें से ये 69 रोगी पॉजिटिव मिले। वहीं, कोविड हॉस्पिटल में शनिवार काे 7 की माैत हुई, जबकि सरकारी रिपाेर्ट में 4 माैतें बताई गई हैं।

इनवेजिव वेंटीलेशन पर गया एक भी मरीज नहीं बच पाया

मेडिसिन विभाग के एचओडी डाॅ. एस जैलिया ने भास्कर से बातचीत में एक चाैंकाने वाली जानकारी दी। उन्हाेंने कहा कि सैकंड वेव में काेविड हाॅस्पिटल में वेंटीलेटर (इनवेजिव वेंटीलेशन) पर गया एक भी मरीज रिकवर नहीं कर पाया। जबकि पहली वेव में 20 से 30 फीसदी मरीज रिकवर कर पाए थे। सैकंड वेव में करीब 400 रोगी इनवेजिव वेंटीलेशन पर लिए गए, लेकिन कोई रिकवर नहीं हो सका। नॉन इनवेजिव वेंटीलेशन (एनआईवी) पर लिए गए रोगियों में से 50 से 60 प्रतिशत रोगी रिकवर हो गए। असल में इस बार हमने इनवेजिव वेंटीलेशन पर रोगी को तभी लिया, जब एनआईवी पर भी ऑक्सीजन लेवल मेंटेन नहीं हो सका था। ये मरीज वैसे भी बहुत क्रिटिकल होते हैं।

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