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जांच.. जांच.. जांच.. और नतीजा जीरो:4 विभाग कर रहे जांच, आरोपी तय नहीं, सवाल : क्या पीड़ितों काे न्याय मिलेगा

कोटा18 दिन पहले
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  • महिला को पानी का इंजेक्शन लगाने, वेंटिलेटर नहीं देने से महिला की मौत सहित 3 मामलों की हो रही जांच

जांच, जांच और सिर्फ जांच.... पुलिस-प्रशासन को इन शब्दों का मोल उन गमजदा परिजनों से पूछना चाहिए, जिन्होंने लापरवाही और सिस्टम के फेल्योर के चलते हमेशा के लिए अपनों को खो दिया। शहर में पिछले दिनों घोर लापरवाही के तीन मामले सामने आए।

पहला- कोटा हार्ट अस्पताल में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने के लिए पानी के इंजेक्शन लगाने से महिला माया रोहिड़ा की मौत, दूसरा- एमबीएस अस्पताल में नेताओं के फोन नहीं करवाने पर वेंटिलेटर का बेड नहीं देने से महिला बीना देवी की मौत और तीसरा- मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाहर एंबुलेंस चालक द्वारा 35 हजार मांगने के बाद बेटी सीमा के शव को कार में रखकर ले जाने को मजबूर पिता।

सरकारी कागजों में चल रही जांच को लीपापोती का ब्लैक फंगस लग गया हैं। इस बीमारी का जल्द ऑपरेशन नहीं हुआ तो जांच का निष्कर्ष एक सिर्फ एक आएगा-सिस्टम की मौत और लापरवाहों की जीत। पढ़िए, रिपोर्ट-

पहला मामला : रेमडेसिविर की जगह पानी के इंजेक्शन लगाने से हुई थी माया की मौत
कोटा हार्ट इंस्टीट्यूट कोटा जिला प्रशासन व पुलिस पर भारी साबित होता नजर आ रहा है। निदेशक डॉ. राकेश जिंदल पर केस दर्ज होने के बाद उनके साथ आईएमए के अधिकारी आए और पुलिस-प्रशासन बैकफुट पर आ गए। पहले जिस तेजी से जांच चल रही थी, उसकी स्पीड को लखवा मार गया।

अब जांच कछुए से भी धीरे हो गई है। मामले में चार जांच चल रही हैं। सीएमएचओ डॉक्टर भूपेन्द्र सिंह तंवर, मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक देवेन्द्र विजयवर्गीय, डीएसपी मुकुल शर्मा और एसडीएम कर रहे हैं। लेकिन, जांच का रिजल्ट अभी तक शून्य है। सभी अपनी गेंद एक-दूसरे के पाले में डालकर कह रहे हैं जांच जारी है। डीएसपी मुकुल शर्मा का कहना है कि पुलिस जांच डॉक्टर्स की ओपिनियन पर निर्भर करती है, अभी ओपिनियन नहीं आई है। बाकी सूचनाएं मांगी गई है और दस्तावेजों की जांच जारी है।

यह है मामला : कोटा हार्ट इंस्टीट्यूट के कोविड वार्ड में नर्सिंग कर्मचारी मनोज रैगर ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने के लिए महिला माया रोहिड़ा को पानी के इंजेक्शन लगा दिए। जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई। भास्कर ने पूरे प्रकरण का खुलासा किया तो पुलिस ने पहली एफआईआर महावीर नगर थाने में मनोज और उसके भाई राकेश रैगर के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया। महिला की मौत के बाद जवाहर नगर पुलिस ने कोटा हार्ट अस्पताल के निदेशक डॉ. राकेश जिन्दल, डॉ. बीएम मीणा, नर्सिंग कर्मचारी व अन्यों पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया।

दूसरा मामला : एमबीएस में वेंटिलेटर बेड नहीं देने से बीना देवी की मौत
एमबीएस अस्पताल में वेटिलेंटर नहीं मिलने से 21 मई को महात्मा गांधी कॉलेानी निवासी बीना देवी की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन की कमेटी ने जोरशोर से मामले की जांच बैठाई। लेकिन, नतीजा सिफर रहा। कमेटी ने जांच में किसी को दोषी माना ही नहीं।

यानी वेंटिलेटर के अभाव में महिला की मौत जो हुई, उसमें किसी की कोई लापरवाही, गलती नहीं थी। एमबीएस अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर नवीन सक्सेना ने अजीब तर्क देते हुए जांच खत्म कर दी। उनका तर्क था कि किसी की गलती नहीं, यह सिर्फ तालमेल की कमी थी। तालमेल की कमी से एक मरीज की मौत हो गई और इसको एक्शन लेने जैसा अपराध नहीं माना जा रहा। अस्पताल प्रशासन ने सिर्फ स्टाफ को पाबंद किया है कि आगे से ऐसा मामला आने पर वरिष्ठ अधिकारियों से पूछा जाए और उपलब्ध होने पर हर मरीज को बेड दिया जाए।

तीसरा मामला : एंबुलेंस के 35 हजार मांगे, बेटी का शव कार में ले गए
कोविड हॉस्पिटल से जिस वक्त एक मजबूर पिता अपनी बेटी सीमा का शव ले जाने के लिए एंबुलेंस तलाश रहा था, उस वक्त वहां नगर निगम की 8 एंबुलेंस खड़ी थीं। मामले का खुलासा हुआ तो प्रशासन डैमेज कंट्रोल का प्रयास करता रहा। कभी मृतका के पिता के ऑडियो वायरल किए तो कभी एक प्रत्यक्षदर्शी का वीडियो वायरल करके यह साबित करने का प्रयास किया कि किसी ने कोई लापरवाही नहीं बरती। लेकिन, मामले में सीएम ने संज्ञान लिया तो कलेक्टर ने विस्तृत जांच के आदेश जारी किए।

दक्षिण निगम के एईएन कपिल पालीवाल, परिवहन विभाग के एसआई सतवीर सिंह को निलंबित किया और मेडिकल कॉलेज में संवेदक सुपरवाइजर संदीप सारवाल की सेवा समाप्त की है। वहीं, महावीर नगर थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई। डीएसपी मुकुल शर्मा का कहना है कि मामले में अभी बयान लिए जा रहे है, जांच जारी है।

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