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वर्ल्ड थैलीसीमिया डे आज:संभाग के 400 थैलीसीमिक बच्चों को हर माह चाहिए 600 यूनिट ब्लड, कोरोनाकाल में इनको आपकी ज्यादा जरूरत

काेटाएक महीने पहले
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ऐसे रक्तवीरों की जरूरत, सुबोध 120 बार कर चुके रक्तदान - Dainik Bhaskar
ऐसे रक्तवीरों की जरूरत, सुबोध 120 बार कर चुके रक्तदान
  • प्राइवेट ब्लड बैंकों में रक्त की कमी से एमबीएस पर बढ़ा भार

यह काेटा के स्वैच्छिक रक्तदाताओं का जज्बा ही है, जाे काेराेनाकाल में भी थैलीसीमिक बच्चाें के लिए खून की कमी नहीं आने दी। बीते एक साल से महामारी और लाॅकडाउन के बावजूद इन बच्चाें के लिए काेटा के रक्तदाता पूरा प्रयास कर रहे हैं और छाेटे रक्तदान शिविर भी लगा रहे हैं। हालांकि अब पूरा लाेड एमबीएस ब्लड बैंक पर ही आ गया है, क्याेंकि शहर के ज्यादातर प्राइवेट ब्लड बैंकों ने इन बच्चाें काे रक्त देने से हाथ खड़े कर दिए हैं।

इसी के चलते एमबीएस ब्लड बैंक में आए दिन स्टाॅक भी गड़बड़ा रहा है और बार-बार रक्तदाताओं से छाेटे रक्तदान शिविर लगाने की अपील की जा रही है। आज वर्ल्ड थैलीसीमिया डे है, इस खास माैके पर भास्कर ने इन बच्चाें से जुड़ी माैजूदा समस्याओं पर डाॅक्टर्स व इनके पैरेंट्स से बात की।

इसमें सामने आया कि जाे बच्चे सालाें से शहर के प्राइवेट ब्लड बैंकाें में रजिस्टर्ड थे, अब वहां उन्हें रक्त देने से मना किया जा रहा है। प्राइवेट ब्लड बैंकाें का तर्क है कि उनके पास रक्त ही नहीं आ रहा। एमबीएस ब्लड बैंक में काेराेना काल से पहले करीब 300 बच्चे हर माह रक्त लेने आते थे, अब यह संख्या बढ़कर 400 तक पहुंच गई है। हर माह इन बच्चाें काे ब्लड बैंक से 550 से 600 यूनिट ब्लड दिया जा रहा है।

डाेनर की व्यवस्था करने का संकट : माेडक की खुशी (17), दिव्यांश (22) और शोभा (17) पिछले कई सालों से एक साथ कोटा आकर ब्लड चढ़वाते हैं। खुशी के पिता भूपेंद्र ने बताया कि तीनों परिवार एक ही वाहन से बच्चों को कोटा लाते हैं और हर 10 दिन में ब्लड चढ़वाते हैं। हमारा रजिस्ट्रेशन प्राइवेट ब्लड बैंक में है, जहां आज तक कभी कोई समस्या नहीं हुई। इस बार कोरोना महामारी में रक्तदान शिविर कम लगे हैं, इसलिए पहली बार हमसे कहा गया है कि आप डोनर लेकर आओ। एमबीएस ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. एचजी मीणा ने बताया कि पहले 250 से 300 थैलीसीमिक बच्चों को रक्त दिया जा रहा था, अब यह संख्या बढ़कर 350 से 400 तक हो गई है।

ऐसे रक्तवीरों की जरूरत, सुबोध 120 बार कर चुके रक्तदान
स्टेशन क्षेत्र के सुबोध जैन अब तक 120 से ज्यादा बार ब्लड दे चुके हैं। सुबोध 1981 से रक्तदान कर रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार काे ए निगेटिव रक्त ग्रुप का प्लाज्मा डोनेट कर दो लोगों की जिंदगी बचाई है।

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