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प्रदेश में वन्यजीव सुरक्षित नहीं:दो साल में वन्यजीवों के शिकार के 630 मामले सामने आए, सवाईमाधोपुर पहले और कोटा संभाग पांचवें नंबर पर

कोटा5 महीने पहलेलेखक: प्रवीण जैन
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राज्य सरकार ने विधानसभा में जारी किए आंकड़े, सर्दी में सबसे अिधक होता है शिकार - Dainik Bhaskar
राज्य सरकार ने विधानसभा में जारी किए आंकड़े, सर्दी में सबसे अिधक होता है शिकार

प्रदेश के टाइगर रिजर्व, वन्यजीव क्षेत्राें और वन मंडलाें में वन्यजीव सुरक्षित नहीं हैं। शिकारी आए दिन पक्षियाें से लेकर वन्यजीवाें काे शिकार कर रहे हैं। प्रदेश में पिछले दाे साल में अवैध शिकार के 630 मामले दर्ज हाे चुके हैं। ये आंकड़े राज्य सरकार ने विधानसभा में जारी किए हैं। ये आंकड़े ते वे हैं जाे दर्ज हुए। इसके अलावा कई मामले दर्ज नहीं किए जाते। अगर सभी मामले दर्ज किए जाएं ताे आंकड़े और चाैंकाने वाले आ सकते हैं। सरकार की ओर से जारी आंकड़ाें के अनुसार रणथंभाैर रिजर्व एवं वन्यजीव विभाग में 64 मामले सबसे अधिक दर्ज हुए हैं।

जबकि सबसे कम जयपुर में 3 मामले दर्ज हुए हैं। इसके अलावा सरिस्का में 32, उदयपुर में 38, जाेधपुर में 28 और मुकंदरा में 19 अवैध शिकार के मामले दर्ज हुए हैं। काेटा के बाद सबसे कम जयपुर में अवैध शिकार के मामले दर्ज हुए हैं। वहीं, दूसरी ओर वन मंडल एरिया में सबसे अधिक वन्यजीवाें के अवैध शिकार के मामले जाेधपुर में 127, जयपुर में 51, अजमेर में 110, भरतपुर में 10, बीकानेर में 98, जाेधपुर में 127, काेटा में 25, उदयपुर में 25 मामले दर्ज हुए हैं।

बड़ी चाैकाने वाली बात है कि इन शिकार में अधिकतर मछली से लेकर पाटागाेह, खरगाेश, माेर, जंगली सूअर, पैंथर, सांभर, मैना पक्षी, बार हैडेड गूंज, तीतर, चिंकारा, झाऊ चूहा, काला हिरण, कबूतर, माेर, कमेडी पक्षियाें का शिकार शामिल हैं। वहीं, दूसरी ओर काेटा संभाग में भालू से लेकर पैंथर सहित अन्य वन्यजीवाें के शिकार के मामले सामने आ रहे हैं।

चिंताजनक : टाइगर रिजर्व और संरक्षित वन क्षेत्र में भी घुसपैठ कर रहे शिकारी, दो साल में कर चुके 134 शिकार

सरिस्का में बाघ एसटी-16 का मामला दर्ज : प्रदेश में पिछले दाे साल में एक मामला बाघ के शिकार का दर्ज हुआ है। सरिस्का टाइगर रिजर्व की ओर से रेंज अकबरपुर में जून 2019 में बाघ एसटी-16 के शिकार का मामला दर्ज किया था। इसके अलावा रिजर्व की ओर से नवंबर 2019 में पैंथर का तालवृक्ष रेंज में शिकार का मामला दर्ज किया था। हालांकि मुकंदरा में अभी तक बाघ एमटी-1 काे लेकर अभी तक किसी भी तरह की स्थिति सामने नहीं आई है। अभी मिसिंग माना है।

टाइगर रिजर्व में शिकार के मामले

एरिया मामले

रणथंंभाैर 64

सरिस्का 32

मुकंदरा 19

उदयपुर 38

जाेधपुर 28

जयपुर 03

संभाग वन मंडल में शिकार के मामले

वन मंडल मामले दर्ज

जयपुर 51

अजमेर 110

भरतपुर 10

बीकानेर 98

जाेधपुर 127

काेटा 25

उदयपुर 25

मादा पैंथर : शिकारियाें के फंदे फंसी मादा पैंथर काे बचाया, इलाज जारी : हाड़ाैती के बूंदी के सटे लक्ष्मीपुरा के जंगल में शिकारियाें के लाेहे के फंदे में फंसी एक माथा पैंथर पिछले दिनाें विभाग काे मिली थी। इसके पैर का पंजा बुरी तरह जख्मी हाे गया था। इसके 16 टांके आए हैं।

काला हिरण : काले हिरण का सिर कटा मिला, आराेपियाें का सुराग तक नहीं : मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में गागराेन रेंज के पास बाेर का कुआ में पिछले दिनाें एक काले हिरण का मामला साेशल मीडिया में सामने आया। विभाग ने इसके बाद पड़ताल की है। टाइगर रिजर्व प्रशासन अभी तक मामले की जांच में जुटा है। आराेपियाें का अभी तक सुराग नहीं मिला।

जंगली खरगाेश के शिकारियाें से 51 हजार का जुर्माना लेकर छाेड़ा : पिछले दिनाें काेटा के बंधा गांव में वन्यजीव जंगली खरगाेश के शिकार के मामले में वन विभाग ने आराेपियाें काे पकड़ कर शिकार के अपराध में जुर्माना वसूला है। इसमें रेंजर ने शिकार के मामले में डबल जुर्माना 51 हजार रुपए वसूल कर आराेपियाें काे छाेड़ दिया था।

... इधर बाघाें के अवैध शिकार में कमी

केंद्र सरकार की रिपाेर्ट में 2019 और 2020 बाघाें की माैत के मामले सामने आए हैं। 2019 में 96 बाघाें की माैत हुई। इनमें 17 शिकार के मामले सामने आए। 2020 में 8 मामले अवैध शिकार के आए हैं।

एक्सपर्ट: विभाग रखे निगरानी : डाॅ.सुल्ताना

वन्यजीव एक्सपर्ट डाॅ. फातिमा सुल्ताना के अनुसार सर्दी के सीजन में वन्यजीवाें के शिकार की घटना अधिक हाेती है। इसमें वन्यजीव विभाग एवं वन मंडल में भी फ्लाइंग स्क्वायड काेे अलर्ट रखना हाेगा। कम संसाधन में विभाग के पास अधिक जिम्मेदारी है। यह उनके लिएभी चैलेंजिंग भी है। ग्रामीणाें काे भी इसमें विभाग काे पूरा सहयाेग करनाा चाहिए। तब जाकरवन्यजीवाें काे बचाया जा सकता है।

टीम रेगुलर निगरानी कर रही है: भटनागर

एसीएफ अनुराग भटनागर का कहना है कि विभाग की ओर से वन्यजीव एरिया में पूरी निगरानी रखी जा रही है। रेगुलर गश्त माॅनिटिरिंग कर रही है। मुखबिर का भी सहारा ले रहे हैं। स्टाफ की कमी है। इसका समाधान हाे जाए ताे विभाग काे काफी राहत मिल सकती है।

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