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कोरोना:87 नए मरीज आए, एक और मौत, काेविड जैसे लक्षणाें वाले हर मरीज काे दे रहे हैं हाइड्राेक्सीक्लाेराेक्वीन

कोटा12 दिन पहले
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  • डिस्पेंसरियों से बंट चुकी 1 लाख टेबलेट, एक माह पहले की थी शुरुआत

शहर में शनिवार को 87 नए कोरोना संक्रमित मरीज आए। पहले से भर्ती एक मरीज की मौत भी हो गई। सरकारी रिपोर्ट में कोई मौत नहीं बताई गई है। कोटा में अब कुल मरीज 10201 हो चुके हैं। जिले में 2.11 लाख टेस्ट किए जा चुके हैं। सरकारी रिपोर्ट के हिसाब से अब तक 111 मरीजों की मौत हुई है, हालांकि वास्तविक आंकड़ा इससे काफी ज्यादा है। अच्छी बात यह है कि इनमें से 9488 रिकवर हो गए हैं। अब एक्टिव केस मात्र 602 बचे हैं।

कोविड जैसे लक्षण वाले मरीजों को दे रहे हैं एचसीक्यू किट : काेटा में बीते कुछ दिनाें से काेविड के गंभीर मरीजाें की संख्या कम हाे गई है। नए अस्पताल में संचालित कोविड हॉस्पिटल में इक्कादुक्का ही रह गए हैं। मरीजों की संख्या घटने को लेकर सीएमएचओ डॉ. बीएस तंवर ने दावा किया है। डॉ. तंवर ने बताया कि बीते एक माह से कोटा में सभी डिस्पेंसरियों पर हमने नए पैटर्न पर काम शुरू कराया है।

इसके तहत कोविड जैसे लक्षणों वाले (कोविड लाइक इलनेस) वाले मरीज को टेस्ट कराए बिना ही हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) तथा अन्य जरूरी दवाइयां दी जा रही हैं। इसके किट बनवाए गए हैं, जैसे ही डिस्पेंसरी पर मरीज बुखार, खांसी, गले में खराश, हाथ-पैर टूटने या अन्य लक्षण बताता है तो उसे टेस्ट कराने की बजाय सीधे वह किट दे देते हैं, इससे मरीज का अर्ली स्टेज पर ट्रीटमेंट शुरू हो रहा है और वह गंभीर होने से बच रहा है।

असल में 16 सितंबर को कोटा आए एडिशनल डायरेक्टर की मीटिंग में हमने यह प्लान उनके सामने रखा था, इस पर उन्होंने सहमति दे दी और अगले दिन यानी 17 सितंबर से हमने इसी पैटर्न पर दवाइयां देना शुरू कर दिया। सीवियरिटी कम होने के और भी कई फैक्टर हो सकते हैं, क्योंकि इससे मरीज का चेस्ट इंफेक्शन कंट्रोल रहता है और वह सांस की तकलीफ जैसी स्टेज पर पहुंचने से बचता है।

मल्टीविटामिन टेबलेट भी हैं इस किट में

सीएमएचओ ने बताया कि हमने किट बनवाए हैं, इस किट में एचसीक्यू के अलावा एजीथ्रोमाइसीन, लिवो सिट्राजिन, विटामिन सी, जिंक व बी कॉम्पलेक्स जैसी दवाइयां है। पहले तक हम ये किट पॉजिटिव मरीजों के परिवार वालों को ही दे रहे थे, लेकिन अब लक्षणों के आधार पर सभी मरीजों को देना शुरू कर दिया है। बीते एक माह में इसके बेहतर रिजल्ट हमें दिख रहे हैं।

विशेषज्ञों के वीडियो बनवाए, तब दूर हुई हिचकिचाहट : डॉ. तंवर के मुताबिक, शुरुआती दौर में जब एचसीक्यू देने की बात आई तो हमारे डॉक्टरों को हिचकिचाहट हुई, क्योंकि इस दवा को लेकर कई तरह की भ्रांतियां है। इस पर हमने मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों के वीडियो मैसेज बनवाए और हमारे डॉक्टरों तक पहुंचाए।

उसमें बताया गया कि उक्त दवा के अब तक कोई साइड इफैक्ट सामने नहीं आए हैं। कार्डियक मरीजों को जरूर यह दवा नहीं दी जा रही। बीते एक माह में हमारी डिस्पेंसरियों पर हजारों मरीजों को यह टेबलेट दी गई है, लेकिन अब तक कहीं से भी मेरे पास साइड इफैक्ट की शिकायत नहीं है।

एक फैक्टर यह भी : मरीजों की सीवियरिटी कम होने का दूसरा बड़ा फैक्टर यह है कि मरीजों को समय पर परामर्श मिल रहा है। असल में कोविड के शुरुआती दौर में शहर में प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले कमोबेश सभी डॉक्टरों ने मरीज देखना बंद कर दिया था। ऐसे में मरीजों के पास मेडिकल कॉलेज के अलावा कोई विकल्प नहीं होता था, जहां मरीज बहुत दिक्कत होने पर ही जा रहा था। अब सभी प्रैक्टिस कर रहे हैं, ऐसे में गली-मोहल्ले में मरीज को आसानी से परामर्श मिल रहा है। समय पर दवा मिल रही है तो स्वत: ही सीवियरिटी कम हो रही है।

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