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मेडिकल कॉलेज में 13 महीने में पहली देहदान:5 दिन पहले पेरेलाइज्ड हुई 88 वर्षीय बुजुर्ग महिला, निधन के बाद नाती ने अंतिम इच्छा पूरी की, RTPCR टेस्ट के बाद एनोटॉमी विभाग को सौपी देह

कोटा6 दिन पहले
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13 महीने में पहला व कोरोना काल का दूसरा देहदान हुआ है - Dainik Bhaskar
13 महीने में पहला व कोरोना काल का दूसरा देहदान हुआ है

कोटा मेडिकल कॉलेज में इस साल पहला देहदान हुआ है। स्टेशन निवासी सिद्धी बाई (88) के निधन के बाद बुधवार को देहदान की सभी प्रक्रिया पूरी की गई। परिजन, शव वाहन में देह लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। एनोटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ प्रतिमा जायसवाल को देह सौपी। उसके बाद परिजनों को देहदान का सर्टिफिकेट सौंपा गया।डॉ प्रतिमा जायसवाल ने बताया कि 13 महीने में पहला व कोरोना काल का दूसरा देहदान हुआ है। इससे पहले जून 2020 में व्यवसायी पदमचंद भंसाली का देहदान हुआ था।

नाती ने अंतिम इच्छा पूरी की

मृतका के नाती शिवांग ने बताया कि उनकी नानी सिद्धि पाण्डेय ने पांच साल देहदान की इच्छा जाहिर कर चुकी थी। 23 मार्च 2016 में देहदान के लिए मेडिकल कॉलेज में रजिस्ट्रेशन कराया था। ताकि उनकी देह मेडिकल बच्चों के रिसर्च में काम आ सके।पांच दिन पहले वो पेरेलाइज्ड हो चुकी थी। उनकी इच्छानुसार देहदान की प्रक्रिया के मेडिकल कॉलेज में सम्पर्क किया। और उनका RTPCR टेस्ट करवाया। नर्सिंग स्टाफ ने घर आकर सैम्पल लिया।मंगलवार शाम करीब साढ़े छ बजे उनकी मौत हो गई। उसी दिन रिपोर्ट नेगेटिव आई। उन्हें कोविड के कोई सिमटम भी नहीं थे।बॉडी को तत्काल फ्रिजर में रखवाया गया। बुधवार को देहदान हो सका।

परिजन, शव वाहन में देह लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे
परिजन, शव वाहन में देह लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे

अब तक 36 देहदान मिल चुकी

कोटा मेडिकल कॉलेज को अब तक 36 देहदान मिल चुकी। साल 2020 में 4 देहदान हुए थे। जनवरी में 2, फरवरी व जून में 1-1 देहदान मिली थी। जिसके 13 माह बाद बुधवार को पहला देहदान हुआ है। डॉ. जायसवाल ने बताया कि कॉलेज में 250 सीट हो गई है। ऐसे में मेडिकल स्टूडेंट को प्रैक्टिकल के लिए हर साल 10 से 15 देह की आवश्यकता होती है। लेकिन दो या तीन देहदान होता है। लोगों को देहदान के क्षेत्र में कार्य कर लोगों को मोटिवेट करना चाहिए। मेडिकल कॉलेज से सम्बंद्ध सभी हॉस्पिटल के अधीक्षक के पास रजिस्ट्रेशन फार्म उपलब्ध है। मेडिकल कॉलेज का ही रजिस्ट्रेशन मान्य होता है।

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