वीएमओयू में प्रिंटिंग के ठेके में भ्रष्टाचार का मामला:आरोपी तत्कालीन वित्त नियंत्रक सुरेश चंद्र गिरफ्तार, 21 दिसंबर तक जेल भेजा

कोटाएक महीने पहले
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आरोपी को कोर्ट में पेश किया। - Dainik Bhaskar
आरोपी को कोर्ट में पेश किया।

एसीबी बारां ने वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा वित्तीय वर्ष 2016-17 के द्वारा पाठ्य पुस्तक सामग्री के लिए निविदा जारी की गई थी, निविदा की शर्त अनुसार निविदा प्राप्त करने वाली फर्म ने नियमों का उल्लंघन करते हुए ठेका प्राप्त कर विश्वविद्यालय में नुकसान पहुंचाने के मामले में फरार आरोपी वित्त नियंत्रक सुरेश चंद्र को गिरफ्तार कर मंगलवार को न्यायालय में पेश किया। जहां से उसे 21 दिसंबर तक न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।

प्रकरण के अुनसार परिवादी प्रफुल्ल गोयल प्राॅपराइटर प्रज्ञा पब्लिकेशन मथुरा उत्तर प्रदेश ने शिकायत की थी कि छपाई में लिए गए कागज की साइज 23 गुणा 36/8 इंच में 60 जीएसएम पेपर के तथा 180 जीएसएम के मय कवर एवं परफैक्ट बाइंडिंग के साथ होना चाहिए, निविदा में सरस्वती प्रेस मथुरा की सबसे कम 0.18 रुपए पर पेज पर प्रिंटिंग की लागत पाए जाने पर उसे निविदा के बाद कार्यादेश जारी किया, परंतु वीएमओयू कोटा के अधिकारियों द्वारा कार्य आदेश जारी करने से पूर्व फर्म का भौतिक सत्यापन किया गया, जिसमें उन्होंने फर्म का वार्षिक टर्नओवर चेक नहीं किया है। फर्म का वार्षिक टर्नओवर मात्र 5 करोड़ है, जबकि उसने निविदा में अपना वार्षिक टर्नओवर 12 करोड़ दर्शाया, जो गलत है।

इसके बावजूद भी वीएमओयू कोटा के अधिकारियों ने मिलीभगत कर फर्म को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया। उक्त शिकायत पर भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो मुख्यालय जयपुर पर परिवाद दर्ज हुआ, परिवाद की जांच से शिकायत में वर्णित तथ्य प्रमाणित पाए जाने पर ब्यूरो मुख्यालय जयपुर द्वारा प्रकरण दर्ज किया गया।

प्रकरण में आरोपी सुरेश चंद वित्त नियंत्रक वीएमओयू कोटा एवं करण सिंह निदेशक एमपीडी विभाग एवं अमित अग्रवाल प्राॅपराइटर सरस्वती प्रिंटिंग प्रेस मथुरा उत्तर प्रदेश के विरुद्ध धारा 13 (1) डी, 13 (2), पीसी एक्ट 1988, 467, 468, 471 एवं 120 बी भारतीय दंड संहिता का अपराध प्रमाणित पाया गया।

एसीबी बारां एएसपी गोपाल सिंह के नेतृत्व में टीम ने फरार आरोपी सुरेश चंद निवासी जयपुर हाल स्वामी विवेकानंद नगर कोटा को गिरफ्तार किया। न्यायालय ने मामले में सुनवाई के बाद आरोपी को 21 दिसंबर तक न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। एसीबी इस मामले में पहले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

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