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कोटा सिटी में 1200 व्यक्तियों पर तैनात है एक जवान:सीएम अशोक गहलोत द्वारा पुलिसकर्मियों के ड्यूटी टाइम को व्यवस्थित करने के निर्देशों के बाद भास्कर ने जाना टाइम शेड्यूल

कोटा21 दिन पहले
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एयरपोर्ट के सामने सुबह 10 से रात 8.30 बजे तक ड्यूटी करता एक ही पुलिसकर्मी। - Dainik Bhaskar
एयरपोर्ट के सामने सुबह 10 से रात 8.30 बजे तक ड्यूटी करता एक ही पुलिसकर्मी।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पुलिसकर्मियों के ड्यूटी टाइम ने भले ही हैरान कर दिया हो, लेकिन पुलिसकर्मियों के पत्नी-बच्चों और परिजनों ने इस हैरानी को अपनी आदत बना ली है। पुलिसकर्मियों के न तो घर से निकलने का समय फिक्स है और न वापस आने का।

इसमें भी चौराहों पर खड़े ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के हालात और भी ज्यादा खराब है, क्योंकि उनको पूरे समय एक जगह खड़े रहकर ड्यूटी करनी होती है। पुलिसकर्मियों के ड्यूटी टाइम को व्यवस्थित करने के निर्देशों के बाद भास्कर ने कांस्टेबल से लेकर एएसपी तक के अधिकारियों के ड्यूटी टाइम का पूरा शेड्यूल जाना।

बातचीत से सामने आया कि पुलिसकर्मियों की सुबह 8 से रात 8 बजे तक यानी कम से कम 12 घंटे की ड्यूटी तो ऑफिश्यली होती है। लेकिन, थाने और ट्रैफिक में ड्यूटी करने वाला औसतन हर स्तर का पुलिसकर्मी 12 से 16 घंटे की ड्यूटी कर रहा है।

एएसपी से लेकर कांस्टेबल तक का यह रहता है दिनभर का टाइम शेड्यूल
एएसपी व डीएसपीएएसपी सुबह 8 बजे कंट्रोल से जिले के हालात, घटनाएं मालूम करते हैं और रोजाना के निर्देश देते हैं। 10 बजे ऑफिस पहुंचते हैं जो शाम 7 बजे तक रहते हैं। इस बीच थानाधिकारियों से फाइलों, घटनाओं व वारदातों को खोलने के बारे में डिटेल लेते हैं। रात 8 से 9 के बीच घर जाते हैं अथवा जिस भी इलाके में बड़ी वारदात हुई हो, उस थाने पर कैंप करते हैं। डीएसपी का भी यह ही रूटीन होता हैं, लेकिन उन्हें नाइट गश्त भी करनी होती है।

थानाधिकारी शहरी क्षेत्र का हर सीआई सुबह 9 बजे थाने पहुंचता है। दिनभर की घटनाओं, वारदातों, फाइलों, मुकदमों और परिवादियों के बीच शाम 6 बजे तक थाने पर रहता है। कहीं भी वारदात, रैली, जुलूस, धरना, वीआईपी ड्यूटी में मौके पर जाना होता है। शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक थाना इलाके में गश्त करना होता है और हर घंटे पुलिस कंट्रोल को अपनी लोकेशन देनी होती है। कई बार पूरी रात को गश्त करनी होती है।

एसआई और एएसआईसुबह 8 बजे थाने पहुंचना होता है। लेकिन, जिनकी नाइट ड्यूटी होती है, उन्हें छूट दी जाती है। यह छूट पुलिस की अंदरूनी व्यवस्था है, नियमों में कोई शिफ्ट की व्यवस्था नहीं है। दिनभर मुकदमों की जांच और लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी में निकलता है। रात 8 बजे तक थाने पर रहते हैं, लेकिन शहरी क्षेत्र में अक्सर रात को 10 बजती है।

हैड कांस्टेबल और कांस्टेबलसुबह 8 बजे से ही इनकी ड्यूटी भी शुरू होती है, लेकिन इनका जाने का कोई समय फिक्स नहीं होता। रात 9 बजे तक तो सभी थाने पर रहते हैं। इसके बाद परिस्थिति के अनुसार कई बार रात 12 बजे तक और कई बार रातभर थाने रूकना पड़ता है। नाइट गश्त में कांस्टेबलों की ड़यूटी जरूरी होती है। चेतक और सिग्मा में सुबह 9 से रात 9 तक की ड्यूटी ही लगती है। हालांकि, जो रात को ड्यूटी करता है, उसे सुबह लेट तक आने की छूट दी जाती है।

ट्रैफिक कांस्टेबल सुबह 6 से शाम 6 बजे तक रोजाना चौराहे अथवा दूसरे ट्रैफिक प्वाइंट पर ड्यूटी होती हैं। लेकिन, अक्सर रात 8 बजे तक की ड्यूटी करनी पड़ती है।

पुलिस महकमे में जाब्ते की कमी है सबसे बड़ी बाधा
​​​​​​​शहर की वर्तमान जनसंख्या 15 लाख मानी जाती है। वहीं, 2 से 3 लाख जनता में कोचिंग छात्र, उनके परिजन, बाहर से काम की तलाश में आने वाले मजदूर, कर्मचारी, प्राइवेट कंपनियों के बाहर से कोटा में रह रहे कर्मचारी शामिल हैं। वहीं, कोटा में वर्तमान में कुल जाब्ता 2 हजार 335 का है। जिसमें से 1400 पुलिसकर्मी फिल्ड में काम करते हैं यानी थानों में तैनात हैं। बाकी कर्मचारियों को पुलिस लाइन, ऑफिस वर्क में लगा रखा है।

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