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वन्यजीव प्रेमियाें ने कहा:6 हजार किमी सफर तय कर आलनिया, अभेड़ा के वेटलैंड पहुंचे ग्रे-लेग गूज पक्षी

काेटा9 महीने पहले
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  • वेटलैंड एरिया में सुरक्षित नहीं प्रवासी पक्षी, आए दिन हो रहा शिकार, वन्यजीव विभाग द्वारा रेगुलर गश्त और सुरक्षा बढ़ाई जाए

आलनिया, अभेड़ा के वेटलैंड इन दिनाें सात समंदर पार से पक्षियाें का बसेरा बना हुआ है। लेकिन ये विदेशी मेहमान यहां सुरक्षित नहीं हैं। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यहां इनकी सुरक्षा की प्रॉपर व्यवस्था नहीं होने से शिकार इनका शिकार कर रहे हैं, जबकि ये पक्षी काेटा के वेटलैंड पर करीब छह हजार से अधिक किमी दूरी का सफर कर आते हैं। वेटलैंड एरिया में शिकार के सबूत मिले हैं। वन्यजीवप्रेमियाें का कहना है कि आलनिया से लेकर अभेड़ा तालाब एरिया में चाेरी-छुपे पक्षियाें का शिकार हाे रहा है। शिकारी रात में वेटलैंड में शिकार करते हैं। पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक आरएस ताेमर ने काेटा के वेटलैंड एरिया में पक्षियाें के लिए भी रेड अलर्ट के अनुसार नाइट पेट्राेलिंग की बात कही है, ताकि हर साल आने वाले इन प्रवासी पक्षियाें की संख्या में और अधिक इजाफा हाे सके।

इधर, लाडपुरा रेंजर संजय नागर ने बताया कि लाडपुरा रेंज के अधीन सभी एरिया में रेड अलर्ट के अनुसार पूरी निगरानी के निर्देश दिए हैं। रेगुलर पेट्राेलिंग जारी है। पक्षियाें के शिकार केे मामले में संदिग्ध पर भी नजर रखी जा रही है।
ग्रे-लेग गूज पक्षियों के कलरव से गूंज रहे वाटर प्वाइंट्स

इन दिनाें शहर सहित आसपास के वेटलैंड में ग्रे-लेग गूज पक्षियाें की चहचहाट गूंज रही है। शहर के आसपास एरिया में ग्रे-लेग गूज का ग्रुप भी नजर आ रहे हैं। पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक आरएस ताेमर ने बताया कि आलनिया से लेकर अभेड़ा सहित अन्य तालाबाें में इन पक्षियाें की अच्छी संख्या है। लेकिन, इनकी सुरक्षा काे लेकर बड़ी चिंता है। इनकी सुरक्षा के लिए वन्यजीवाें की तरह अलर्ट रखना चाहिए।

  • पूरे एरिया में नाइट पेट्राेलिंग के लिए 4 जनाें की टीम बनाई हुई है। अभी तक शिकार के मामले सामने नहीं आए हैं। मुखबिर का भी इसके लिए सहयाेग ले रहे हैं। विभाग की ओर से पूरी निगरानी रखी जा रही है। - कुंदनसिंह, रेंजर मंडाना
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