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ग्रामीणों का चुनाव बहिष्कार का एलान:1000 हजार की आबादी के गांव रामनगर झित्या में कभी नही आई एम्बुलेंस, 3 किमी के रास्ते में पैदल चलना भी मुश्किल

कोटा7 महीने पहले
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रामनगर झित्या ने निवासियों ने पंचायत चुनाव के बहिष्कार का एलान किया है। - Dainik Bhaskar
रामनगर झित्या ने निवासियों ने पंचायत चुनाव के बहिष्कार का एलान किया है।

जिले की कसार पंचायत के गांव रामनगर झित्या ने निवासियों ने पंचायत चुनाव के बहिष्कार का एलान किया है। स्थानीय लोगों ने रोड़ नहीं तो वोट नहीं का नारा देकर मतदान नहीं करने का फैसला किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 50 साल से गांव को जोड़ने वाली 3 किलोमीटर सड़क का हिस्सा बदहाल है। गांव के भागीरथ (65), किशन (65) जगदीश (45) ने बताया कि इस रास्ते से कभी भी एम्बुलेंस गांव तक नहीं आई। सड़क निर्माण नहीं होने से लोगों को 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। लाडपुरा पंचायत समिति के ग्राम पंचायत कसार के रामनगर झित्या के ग्रामीणों ने रोड बनाने की मांग को लेकर रविवार को एकजुट होकर चुनाव का बहिष्कार कर दिया।

ग्रामीणों ने रोड बनाने की मांग को लेकर रविवार को एकजुट होकर चुनाव का बहिष्कार कर दिया।
ग्रामीणों ने रोड बनाने की मांग को लेकर रविवार को एकजुट होकर चुनाव का बहिष्कार कर दिया।

हनोतिया रोड़ से रामनगर झित्या तक सड़क पर पैदल चलना मुश्किल

ये गांव जिला परिषद के वार्ड 3 व लाडपुरा पंचायत समिति के वार्ड 14 में आता है। गांव में 200 घरों में 1 हजार की आबादी है। करीब 465 वोटर है। बाबूलाल (45), रणजीत (40) समेत ग्रामीणो का कहना है कि ये सबसे पुराना गांव है। यहां के ग्रामीणों को आने जाने के लिए अभी भी कच्चे मार्ग गुजरना पड़ता है। हनोतिया रोड़ से रामनगर झित्या को जोड़ने वाली 3 किलोमीटर सड़क में बरसात के दोनों में कीचड़ व दलदल में होकर आना जाना पड़ता है। बरसात में बीमार या गर्भवती महिला को उपचार के लिए कीचड़ मे होकर लाना पडता है। या फिर गांव से लगभग तीन से चार किलोमीटर पहले वाहन को खडा करना पडता है। एम्बुलेंस तो गांव में आने से ही मना कर देती है, क्योंकि वो गांव तक नही पहुच पाती है।

15 किलोमीटर का चक्कर लगाने की मजबूरी

हनोतिया रोड़ से रामनगर झित्या को जोड़ने वाली सड़क की बदहाली के कारण उन्हें 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। उन्हें कसार की तरफ से हाइवे पर होते हुए गांव में आना पड़ता है। इसमें समय भी लगता है। पैसा भी खर्च होता है। सरकारें गावों के विकास पर ध्यान नहीं दे रही है। शहर से शहर को जोड़ने वाली मुख्य सड़कों में सुधार हुआ है। लेकिन गांव से गांव को जोड़ने वाली सड़कों में सुधार नहीं होने से ग्रामीणों को मजबूरी में लंबा चक्कर लगाना पड़ता है।

पूर्व सरपंच प्रेमराज बंजारा का कहना है कि लम्बे समय से रोड़ की मांग को लेकर जिला परिषद सहित सरकार को पत्र लिखा। अभी भी प्रशासन गांव के संग शिविर में सड़क निर्माण की मांग की है। लेकिन अभी तक सड़क निर्माण नहीं हुआ। ग्रामीणों को परेशान होना पड़ रहा है।

फोटो-सूर्यप्रकाश मेवाड़ा,मंडाना