प्रशासन शहराें व गांवाें से संग अभियान:एक रुपए में मिल रहे ग्रांट एक्ट के पट्टे के लिए आवेदकों को ‌2000 तक खर्च करने पड़ रहे

काेटा9 दिन पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।
  • नक्शे और कागज तैयार करवाने में खर्च हो रही अतिरिक्त रकम

प्रशासन शहराें व गांवाें से संग अभियान के दाैरान पुराने इलाकाें में वर्षाें से रह रहे लाेगाें काे स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत सरकार ने मात्र 1 रुपए में पट्टा देने की घाेषणा की है, लेकिन आवेदक काे इसके लिए 1500 से लेकर 2 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

सरकार के खजाने में ताे 1 रुपए ही जाएगा, लेकिन आवेदन करने के लिए नक्शा, वाेटर लिस्ट, पुराने दस्तावेजाें की फाेटाे काॅपी, वर्तमान दस्तावेजाें की फाेटाेकाॅपी आदि तैयार करने में खर्चा आता है। इसलिए ग्रांट एक्ट के तहत आवेदन कम आ रहे हैं। कैंप में माैजूद अधिकारी व कर्मचारी बताते हैं कि गरीबी रेखा से नीचे के आवेदन खर्च सुनकर उसकी तुलना दवाइयाें व राशन से करने लगते हैं।

यदि फाइल नहीं बनवा सकते हैं ताे सरकार उठाएगी खर्च

अति निम्न वर्ग के लाेगाें के लिए सरकार ने एक सुविधा यह भी कर रखी है कि यदि किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति इतनी भी नहीं है कि वाे अपने मकान के ग्रांट एक्ट में पट्टे के लिए फाइल बनाने का खर्च वहन कर सके ताे उसका खर्च सरकार उठाएगी। इसके लिए निगम या पालिका को जानकारी देनी होगी। नगर मित्र उसकी फाइल बिना तैयार करेगा। उस फाइल काे बनाने में जाे भी खर्च आएगा, उसका भुगतान निगम या पालिका करेगी।

इस तरह आता है खर्च:

पट्टे के लिए फाइल लगाने के लिए सरकार ने नगर मित्राें काे नियुक्त कर रखा है। जिनका शुल्क 5 रुपए प्रति वर्ग मीटर या फिर अधिकतम 2500 रुपए फिक्स है। या ताे लाेग नगर मित्राें के माध्यम से फाइल लगवाएं या फिर बाजार में नक्शा तैयार करवाए। इसमें नक्शे के लिए 800 से 1500 रुपए लिए जा रहे हैं। दस्तावेजाें की फाेटाेकाॅपी में 200 से 300 रुपए खर्च हाे जाते हैं। नगर मित्र डाेर स्टेप सर्विस देता है ताे उसके 250 रुपए शुल्क है।

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