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इनसाइड स्टोरी:28 टन का टैंकर आते ही जयपुर से कोटा की सप्लाई कम करने का फरमान आ गया

कोटाएक महीने पहले
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कलेक्टर उज्ज्वल राठौड़ बोले- ऑक्सीजन कहां, कितनी देनी है, यह राज्य सरकार के स्तर पर तय होता है। - Dainik Bhaskar
कलेक्टर उज्ज्वल राठौड़ बोले- ऑक्सीजन कहां, कितनी देनी है, यह राज्य सरकार के स्तर पर तय होता है।

गुरुवार को गुजरात के जाम नगर से 28 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का एक टैंकर कोटा आया था, यह लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने राज्य के ऑक्सीजन कोटे के अतिरिक्त अपने निजी प्रयासों से मंगवाया था। इस टैंकर के आने की बात भी गोपनीय रखी गई थी क्योंकि कुछ अधिकारियों ने आशंका जताई थी कि इसे कहीं और डायवर्ट किया जा सकता है। चिकित्सा विभाग के सूत्रों के अनुसार टैंकर आते ही जयपुर में बैठे अधिकारियों ने भिवाड़ी से मिलने वाली सप्लाई पर कुछ दिन रोक लगा दी।

उनका तर्क था कि अब आपको कुछ दिन के लिए पर्याप्त सप्लाई मिल गई है। शुक्रवार को ऑक्सीजन एक्सप्रेस का एक टैंकर भी जयपुर मंगा लिया। मौजूदा हालात को देखते हुए ये तय है कि कोटा को दो-तीन दिन बाद फिर से ऑक्सीजन संकट झेलना पड़ेगा, वह भी तब, जब हमें अलग से 28 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिल चुकी।

यूं समझें इस कटौती के नुकसान
28 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन स्टेट कोटे के अतिरिक्त मिलने से कोटा के सभी कोविड हॉस्पिटलों को ऑक्सीजन बैकअप मिलता, जिससे वे बेफिक्र होकर नए मरीज एडमिट कर पाते। अब नियमित कोटे से इस कटौती के चलते इसी 28 मीट्रिक टन से ऑक्सीजन की खपत होगी। ऐसे में अगले दो दिन में बैकअप फिर से खत्म हो जाएगा।

बड़ी समस्या- तीनों ऑक्सीजन प्लांट्स में खराबी, रात तक सिर्फ एक ठीक हो सका
इसी बीच, एक और बुरी खबर यह रही कि कोटा के कोविड हॉस्पिटलों में ऑक्सीजन सप्लाई कर रहे दो सप्लायरों के तीन प्लांट्स में तकनीकी खराबी आ गई। जैसे ही एक-एक करके ये प्लांट ठप हुए तो इंजीनियर बुलाए गए, रात तक एक प्लांट ठीक हो गया था। सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन ने ऑक्सीजन प्लांट्स से घरों के लिए सिलेंडर देने पर रोक लगा दी। प्लांट्स ठप होने से रोजाना सिलेंडर रिफिलिंग की क्षमता भी कम हो गई।

अधिकारियों ने बताया कि सुबह रानपुर स्थित हाड़ौती गैस के लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट से जनरेशन बंद हो गया, दिनभर की मशक्कत के बाद शाम को इंजीनियरों ने इसे ठीक किया और प्रॉडक्शन शुरू हो पाया। रानपुर में ही दूसरी फर्म के दोनों प्लांट्स ऑक्सीजन जनरेशन व लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट भी तकनीकी समस्या के चलते बंद हो गए। रात तक इन्हें ठीक कराया जा रहा था।

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