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वर्ल्ड स्ट्रोक डे आज:कोविड संक्रमण की वजह से नसों में खून के थक्के जम रहे हैं, इसके चलते युवाओं को भी हो रही लकवे की शिकायत

काेटाएक महीने पहले
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लकवा होने एवं अस्पताल में भर्ती कराने के समय अंतराल में भी परिवर्तन आया है। जिन मरीजो को रीपरफ्यूजन थैरेपी दी जा सकती है, ऐसे मरीजों की संख्या में भी कमी हुई है

आज वर्ल्ड स्ट्राेक डे (विश्व लकवा दिवस) है। इस बार काेविड महामारी के बीच यह दिन (29 अक्टूबर) आ रहा है। कोविड रोगियों में बड़ी संख्या में स्ट्रोक की समस्या भी देखी जा रही है। इसी मुद्दे पर भास्कर ने कोटा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल व जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विजय सरदाना से लंबी चर्चा की।

उनसे हर उस सवाल का जवाब लिया, जो कोविड के बीच लकवे को लेकर आमजन के मन में है। उन्होंने बताया कि सामान्यतः कोविड मरीजों में लकवा देखा गया है, जिसमें हर उम्र के मरीज शामिल हैं। जानिए डॉ. सरदाना से उन सभी सवालों के जवाब, जो सभी के मन में उठ रहे हैं-
भास्कर के पाठकों के लिए कोविड और स्ट्रोक से जुड़े हर सवाल का जवाब दे रहे हैं जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विजय सरदाना

Q. कोविड 19 बीमारी में नर्व सिस्टम से संबंधित लक्षण क्या-क्या है? A. सिर दर्द-2% से 66.1%, सिर चकराना-2.5% से 21.4%, स्वाद एवं सुंघने की क्षमता में कमी आना-50.8% से 59.2% और चेतना प्रभावित होना 5.1% से 69% है। Q. कोविड और नॉन कोविड मरीज में लकवा किस तरह से अलग होता है? A. पारंपरिक रूप से लकवे के लिए जो कारण (जोखिम कारक) है, उनमें अनकंट्रोल हाई बीपी, डायबिटीज, धूम्रपान, अधिक काॅलेस्ट्रोल, आरामदायक जीवन शैली, अनकंट्रोल हार्टबीट प्रमुख हैं। जिन मरीजों में उक्त जोखिम कारक होते हैं, उनमें लकवा होने की आशंका अधिक होती है।

Q. कोविड में लकवा किस प्रकार का होता है? A. कोविड में माइनर या मेजर दोनों प्रकार का लकवा पाया जाता है। छोटी एवं पतली रक्त नलिकाओं में थक्का बनने एवं परिस्थितियां स्पष्ट है, जिससे माइनर लकवा होता है। इसी तरह बड़ी रक्त नलिकाओं में भी रूकावट के कई मामले सामने आएं है, जिसमें मेजर लकवा होता है। कोविड वायरस का लगाव एसीई-2 रिसेप्टर के प्रति पाया गया है, जो रक्त वाहिनियों की भीतरी परत/खून की नसों की मासपेशियों में होता है, जो कि मस्तिष्क के अंदर की रक्त वाहिनियों को क्षतिग्रस्त कर देता है एवं वाहिनियों के फटने से हेमोरेजिक स्ट्रोक भी हो सकता है। Q. क्या कोई उम्र विशेष है, जिसमें लकवा ज्यादा होता है? A. कोविड मे लकवा सभी आयु वर्ग में पाया गया है। 30, 40, 50 वर्ष की उम्र के मरीजो में भी मेजर स्ट्रोक पाए गए हैं, जैसा आमतौर पर 70-80 वर्ष की आयु के मरीजो में पाए जाते हैं। लकवाग्रस्त मरीज, जो कोविड पॉजिटिव है, उसमें 42 प्रतिशत मरीज 50 वर्ष से कम आयु के पाए गए हैं। जबकि ज्यादातर लकवा (75 फीसदी से अधिक) 65 वर्ष की आयु से अधिक उम्र में पाया जाता है। Q. कोविड मरीजों में लकवा अधिक क्यों होता है? A. विभिन्न रिसर्च में सामने आया है कि कोविड रक्तनलिकाओ में सूजन उत्पन्न करता है। जिससे खून का थक्का बनने की प्रवृति बढ़ जाती है। जिसका पता हमें डी डायमर का स्तर बढ़ने एफपीटी कम होने से लगता है। जिससे शरीर के अंदर खून का थक्का बनना शुरू हो जाता है एवं रक्त प्रवाह कम होने लगता है, जिससे लकवा हो जाता है।

Q. कोविड लकवाग्रस्त मरीज की मृत्यु दर नॉन कोविड से ज्यादा हैै? A. कोविड लकवे में मृत्यु दर अधिक है। एक शोध के अनुसार कोविड रोगी, जो कि गंभीर श्वास संबंधी लक्षणों से ग्रसित है, उनकी अस्पताल में मृत्यु दर सबसे अधिक 58.6 प्रतिशत है। जो सामान्य काेविड मरीजों के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है। Q. क्या काेविड ग्रसित लकवे के मरीज के परिणाम सामान्य लकवे के मरीजों से गंभीर है? A. शोध बताते हैं कि काेविड मरीजों में खून की धमनियो में थक्का बनने की प्रवृत्ति देखी गई है, इससे ज्यादा गंभीर लकवा एवं गंभीर परिणाम जैसे अधिक मृत्यु दर व गंभीर विकलागंता प्रमुख है। शरीर के अन्य अंगों पर भी इसका असर देखा गया है। Q. क्या लकवे का इलाज कोविड और नाॅन-कोविड मरीज में अलग-अलग है ? A. स्टेंडर्ड एक्यूट स्ट्राेक ट्रीटमेंट गाइडलाइन सभी मरीजों पर लागू की जानी चाहिए, जिसके तहत एनसीसीटी ब्रेन और सीटी चेस्ट साथ ही कोविड-19 सस्पेक्ट या पाॅजिटिव मरीजों में करा दिया जाना चाहिए। जाे मरीज विंडाे पीरियड में आते हैं और इंट्राविनस थ्राेंबाेलिसिस के लिए उपयुक्त है, उन्हें थ्राेंबाेलाइज कराया जाना चाहिए। ऐसे राेगियाें में प्लेटलेट्स काउंट कम हाेने के तथ्य सामने आते हैं, ऐसे में सीबीसी जैसी बुनियादी जांच जरूर करा लेनी चाहिए और साथ ही डी-डायमर जांच भी सभी मरीजों की करवानी उचित है। Q. काेविड मरीज को अस्पताल में रहते हुए लकवा होने से कैसे बचाया जा सकता है? A. इससे जुड़े काेविड मार्कर टेस्ट है, जिन्हें कराने के बाद यदि संकेत मिलते हैं ताे हिपारेन का उपयाेग किया जाना चाहिए, यह न सिर्फ रक्त के थक्के बनने से रोकता है, बल्कि इसका एंटी इंफ्लामेट्री एवं प्राेटेक्टिव इफैक्ट रक्त वाहिनियों पर होता है। Q. काेविड में लकवा होने के बाद फिर से लकवा होने से रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए? A. उच्च रक्त चाप, मधुमेह, अधिक वसा के लिए एवं खून पतला करने की दवाइयां नियमित रूप से लेनी चाहिए एवं जो मरीज थक्का रोधी दवाइयां ले रहे हैं, उन्हें समय-समय पर जांच करानी चाहिए और व्यायाम लगातार करना चाहिए।

Q. क्या यह सही है कि लाॅक डाउन के दाैरान लकवे के मरीज अस्पताल में दिखाने नहीं आए, इसके क्या परिणाम रहे? A. लकवे के मरीजों का अस्पताल में भर्ती होना काेविड महामारी में कम हुआ है। लेकिन यह कमी केवल कम गंभीर मरीजों की है। लकवा होने एवं अस्पताल में भर्ती कराने के समय अंतराल में भी परिवर्तन आया है। जिन मरीजो को रीपरफ्यूजन थैरेपी दी जा सकती है, ऐसे मरीजों की संख्या में भी कमी हुई है। इटली में हुए शोध के अनुसार अगर हम इसी समय अंतराल के वर्ष 2019 के आंकड़ाें से मिलान करे तो महामारी होने के बाद अस्पताल के भर्ती दर में 45 प्रतिशत तक की कमी आई है।

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