प्रसारण सेवाएं बंद:अगले महीने बंद हो जाएगा बूंदी का टीवी टावर; 28 साल पहले इसी टावर की बदौलत मिला था दूरदर्शन का निर्बाध प्रसारण

काेटा2 महीने पहले
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इस टावर से था इमोशनल टच - Dainik Bhaskar
इस टावर से था इमोशनल टच
  • केबल-डीटीएच और ओटीटी के दौर में खत्म हुई उपयोगिता, डीडी का ट्रांसमीटर बंद होगा

बूंदी में तारागढ़ दुर्ग की पहाड़ियाें पर बने दूरदर्शन के टीवी टावर (एचपीटी) से प्रसारण सेवाएं 31 अक्टूबर से बंद हो जाएंगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। असल में केबल, डीटीएच और ओटीटी के दौर में ट्रांसमीटरों की उपयोगिता खत्म हो गई है। इस टावर का उद्घाटन 27 जून 1993 में तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री केपी सिंह देव तथा पीएमओ में राज्यमंत्री भुवनेश चतुर्वेदी ने किया था।

अब सिर्फ एफएम के प्रसारण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा टावर- साइट इंजीनियर

इस टावर की स्थापना को लेकर बूंदी ने बड़ी लड़ाई लड़ी थी। तब टावर कोटा में लगना था, लेकिन उपयुक्त लोकेशन नहीं मिल सकी। रावतभाटा में पहाड़ियों पर जगह तलाशी गई, लेकिन फॉरेस्ट की आपत्ति आ गई थी। दिल्ली से आए इंजीनियरों ने तारागढ़ दुर्ग की पहाड़ी को इसके लिए उपयुक्त पाया। इसके बाद कोटा में विरोध होने लगा। बूंदी एचपीटी के साइट इंजीनियर बीएल मीणा ने बताया कि ट्रांसमीटर बंद करने के आदेश मिल गए हैं। यहां पहले दो ट्रांसमीटर हुआ करते थे, एक पहले ही बंद कर दिया था, दूसरा अब कर रहे हैं। अब यहां से दूरदर्शन के प्रसारण की सेवाएं नहीं होंगी। यह टावर अब सिर्फ एफएम के लिए यूज होगा।

छतों पर एंटीना लगते थे, टीवी टावर के बाद हट गए

इस टावर के लगने से पहले कोटा संभाग में दूरदर्शन की सेवाएं बहुत अस्त-व्यस्त हुआ करती थी। छतों पर बड़े-बड़े एल्युमीनियम के एंटीना लगा करते थे, जिन्हें रस्सियों के जरिए बांधकर रखा जाता था। कोई भी प्रोग्राम देखने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता था कि एंटीना हिल तो नहीं रहा? एंटीना हिलने की वजह से प्रसारण भी प्रभावित होता था। आंधी-तूफान, तेज बारिश और बंदरों की वजह से टावर गिर जाया करते थे। ऐसे में जब यह टावर लगा और यहां से दूरदर्शन से प्रसारण शुरू हुआ तो छतों पर एंटीना लगाने की जरूरत खत्म हो गई और इसके बिना ही शानदार प्रसारण मिलने लगा था। आज भले ही हमें इसकी इंपोर्टेंस नहीं दिखती, लेकिन उस जमाने में इसका बड़ा महत्व था। बूंदी में ऊंची पहाड़ी पर बना यह टावर किसी पर्यटक स्थल से कम नहीं है, सैकड़ों देसी-विदेशी पर्यटक इसे देखने आते हैं।

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