धर्म / शनि जयंती मनाई, मंदिर में हुआ प्रतिमा का अभिषेक, दान-पुण्य भी किए

Celebrated Shani Jayanti, consecration of statue in temple, also performed charity and charity
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Celebrated Shani Jayanti, consecration of statue in temple, also performed charity and charity

  • श्रद्धालु ने घर पर ही शनि का जाप कर दान का संकल्प लिया
  • ज्येष्ठ मास में कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाती है शनि जयंती

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 08:06 AM IST

कोटा. लॉकडाउन के चलते मंदिरों में नहीं जाकर श्रद्धालु ने घर पर ही शनि का जाप कर दान का संकल्प लिया। शनि के मंत्र, हनुमान चालीसा, भैरव नामावली के पाठ करें। जातकों ने शनिदेव की आराधना के साथ महिलाओं ने घर पर ही वट सावित्री के व्रत की पूजा की। वट के पत्ते की घर पर विधि-विधान से आराधना की। इस दिन महिलाएं 16 शृंगार कर निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं। इस व्रत पर बरगद के पेड़ की पूजा और परिक्रमा की जाती है, लेकिन इस बार साेशल डिस्टेंस देखते हुए घर पर ही पूजा के बाद सत्यवान और सावित्री की कथा सुनाई। इस व्रत को करने से पति की उम्र बढ़ती है और परिवार में समृद्धि  की कामना की। ज्योतिष शास्त्र में शनि को न्याय का देवता मानते हैं। शनि की आराधना से सभी कष्ट दूर होते है। 
घंटाघर शनि मंदिर में तड़के 3:30 बजे किया केसर दूध से अभिषेक

 घंटाघर प्राचीन शनि मंदिर श्रीशनेश्वरजी ट्रस्ट अध्यक्ष दिनेश जोशी ने बताया कि सुबह 3.30 बजे केसर दूध से शनिदेव का अभिषेक कर मंगला आरती की गई। 11 बजे पंचामृत अभिषेक 12 बजे महाआरती 108 दीपक के साथ संध्या में पंचामृत अभिषेक तैल अभिषेक शृंगार स्वर्ण किया गया। भगवान को कचाैरी, इमरती, खीर, पूड़ी, उड़द के लड्डू का भोग लगाया। भगवान को चढ़ाई गई काला कपड़ा, उड़द, काले तिल, लोहा, छाता, काला कंबल हनुमान चालीसा शनि चालीसा शनि स्तुति से भगवान का गुणगान किया। सुंदरकांड का पाठ किया गया। शयन आरती कोरोना वायरस काल में शनिदेव को मनाने के लिए शनि चालीसा शनि स्तुति, शनि स्तोत्र का पाठ, शनि मंत्र हनुमान चालीसा का पाठ किया।

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